अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
Deepak Prakash Sworn in as Bihar Minister in Jeans Without Fighting Election – Dynastic Politics or Fresh Blood?
बिहार में दीपक प्रकाश की नियुक्ति : वंशवादी राजनीति, संवैधानिक उपबंध और लोकतांत्रिक आदर्शों का अंतर्विरोध भूमिका 21 नवंबर 2025 को बिहार में उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश को बिना किसी निर्वाचित पद पर रहते हुए मंत्री नियुक्त किया गया। शपथ ग्रहण के दौरान उनकी अनौपचारिक वेशभूषा चर्चा का विषय बनी, परंतु यह घटना महज़ व्यक्तिगत शैली का मामला नहीं है। यह भारतीय लोकतंत्र में वंशवादी राजनीति, संवैधानिक प्रावधानों के लचीले उपयोग और जन-प्रतिनिधित्व के अवमूल्यन के गहरे संकट को उजागर करती है। 1. संवैधानिक व्यवस्था : उद्देश्य और विचलन भारतीय संविधान का अनुच्छेद 164(4) यह अनुमति देता है कि कोई गैर-विधायक व्यक्ति छह माह तक मंत्री रह सकता है, बशर्ते वह इस अवधि के भीतर विधानमंडल का सदस्य बन जाए। मूल उद्देश्य —विशेषज्ञता एवं प्रशासनिक दक्षता वाले तकनीकी विशेषज्ञों को सरकार में शामिल करना—स्पष्टतः लोकतांत्रिक शासन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए था। परंतु व्यवहार में यह प्रावधान धीरे-धीरे राजनीतिक परिवारों के उत्तराधिकार को वैधानिक स्वरूप प्रदान करने का साधन बन गया। पिछले कई दशकों में कई उदाहरण—संज...