अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
भारत में नई श्रम संहिताओं का लागू होना (21 नवंबर 2025): UPSC दृष्टिकोण से एक विश्लेषण भारत ने 21 नवंबर 2025 से अपने श्रम-कानूनी ढाँचे में स्वतंत्रता के बाद का सबसे बड़ा संरचनात्मक परिवर्तन लागू किया है। लगभग 29 बिखरे हुए कानूनों को समन्वित करके चार श्रम-संहिताएँ— वेतन संहिता, 2019 , औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 , सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 , व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य-दशा संहिता, 2020 — पूर्ण रूप से प्रभावी हो गई हैं। यह सुधार न केवल 4.5 करोड़ संगठित कर्मचारियों, बल्कि 40 करोड़ से अधिक असंगठित एवं गिग श्रमिकों को भी प्रभावित करता है। UPSC के लिए यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संरचनात्मक सुधार , श्रम-बाजार आधुनिकीकरण , सामाजिक सुरक्षा , संघवाद , Ease of Doing Business , और Inclusive Growth जैसे मुख्य विषयों से जुड़ा है। 1. वेतन और मजदूरी व्यवस्था में मानकीकरण राष्ट्रीय फ्लोर वेज , वेतन-परिभाषा का मानकीकरण, समयबद्ध भुगतान और बोनस की नई सीमा जैसी व्यवस्थाएँ मजदूरी-समानता की दिशा में बड़ा कदम हैं। UPSC विश्लेषण यह क्षेत्रीय असमानताओं को घटाने , श्रम...