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End of Hereditary Peers in the House of Lords: A Historic Reform in British Parliamentary Democracy

हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...

India Belongs to Everyone: An Analysis of Inclusive Nationalism in the Context of the Racial Discrimination and Killing of a Tripura Youth in Uttarakhand

“भारत सबका है" — नस्लीय भेदभाव, क्षेत्रीय पूर्वाग्रह और संवैधानिक भारतीयता का प्रश्न (त्रिपुरा के युवक की उत्तराखंड में हत्या की घटना के सन्दर्भ में) भूमिका हाल ही में उत्तराखंड में त्रिपुरा के एक युवक के साथ हुए नस्लीय भेदभाव और हिंसक हमले ने भारतीय समाज में मौजूद क्षेत्रीय-नस्लीय पूर्वाग्रहों की गहरी परतों को उजागर किया है। उत्तर-पूर्व से आने वाले लोगों के प्रति “अलग दिखने”, “भिन्न भाषा” या “सांस्कृतिक पहचान” के आधार पर बने पूर्वाग्रह, कई बार सामाजिक दूरी और हिंसा का रूप ले लेते हैं। इसी संदर्भ में जब RSS प्रमुख मोहन भागवत यह कहते हैं कि — “भारत सबका है, जाति–क्षेत्र–पहचान के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए” — तो यह कथन केवल नैतिक अपील नहीं, बल्कि भारतीय राष्ट्रवाद, संवैधानिक नागरिकता और सामाजिक न्याय के प्रश्न को सीधे स्पर्श करता है। संवैधानिक दृष्टिकोण — समानता का आदर्श और सामाजिक यथार्थ भारतीय संविधान नागरिकों के बीच समानता, गरिमा और गैर-भेदभाव की गारंटी देता है— अनुच्छेद 14 — कानून के समक्ष समानता अनुच्छेद 15 — धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान के आधार...

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