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होर्मुज जलडमरूमध्य पर छाया संकट: सीमित नरमी या बड़े टकराव की प्रस्तावना? प्रस्तावना पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का धुरी बिंदु बन गया है। को लेकर और के बीच जारी तनातनी अब उस बिंदु पर पहुँच चुकी है, जहाँ एक छोटी-सी चूक भी व्यापक संघर्ष को जन्म दे सकती है। हाल ही में प्रशासन द्वारा जारी 48 घंटे का अल्टीमेटम—और उसके जवाब में ईरान का “चयनात्मक खुलापन” वाला बयान—इस संकट को और जटिल बना देता है। यह घटनाक्रम केवल क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन का प्रश्न नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री कानून और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की विश्वसनीयता की भी परीक्षा है। रणनीतिक नरमी: मजबूरी या गणना? ईरान का यह कहना कि जलडमरूमध्य “पूरी तरह बंद नहीं है” बल्कि “दुश्मनों को छोड़कर” अन्य देशों के लिए खुला रहेगा, पहली नजर में नरमी का संकेत प्रतीत होता है। परंतु यह नरमी सशर्त है—और इसी में इसकी जटिलता छिपी है। यह कदम तीन स्तरों पर समझा जा सकता है: आर्थिक विवशता: होर्मुज के माध्यम से विश्व का लगभग पाँचवां हिस्सा तेल व्यापार होता है। पूर्ण अवरोध न केवल वैश्विक बाजारों को झकझोर देगा, बल्कि स्...