अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
लाल सागर तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान: भारत के व्यापार और रणनीति पर प्रभाव परिचय लाल सागर, जो एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ने वाला समुद्री गलियारा है, वैश्विक व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण धमनियों में से एक माना जाता है। लेकिन हाल के वर्षों में यह क्षेत्र भू-राजनीतिक तनावों का केंद्र बन गया है। रॉयटर्स की 21 अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों के कारण इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बाधित हो रही है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हुआ है। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ा है, जो यूरोप और मध्य पूर्व के बाज़ारों पर व्यापार के लिए काफी हद तक निर्भर हैं। शिपिंग लागत, बीमा प्रीमियम और ऊर्जा परिवहन खर्च बढ़ने से भारत की आर्थिक स्थिरता और निर्यात प्रतिस्पर्धा पर दबाव बढ़ा है। लाल सागर तनाव: पृष्ठभूमि लाल सागर स्वेज नहर के माध्यम से भूमध्य सागर और हिंद महासागर को जोड़ता है। यह वैश्विक समुद्री व्यापार का लगभग 12–15% हिस्सा वहन करता है, जिसमें तेल, गैस, खाद्य पदार्थ,...