अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
चीन की तेल भंडारण रणनीति — भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा का सबक विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था का सबसे निर्णायक तत्व आज “ऊर्जा” बन चुकी है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि ऊर्जा की आपूर्ति और मूल्य किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता और कूटनीतिक ताकत को गहराई से प्रभावित करते हैं। इसी पृष्ठभूमि में चीन द्वारा हाल ही में अपनी रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता में तेज़ी से विस्तार करने की खबर केवल एक आर्थिक कदम नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक भू-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। यह कदम भारत सहित सभी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक महत्वपूर्ण सबक प्रस्तुत करता है — कि ऊर्जा सुरक्षा केवल संसाधन का प्रश्न नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मूल स्तंभ है। 🔹 चीन की दीर्घदृष्टि: ऊर्जा को शक्ति में बदलने की नीति रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने बीते दो वर्षों में अपने तेल भंडारण स्थलों की संख्या और क्षमता दोनों को अभूतपूर्व गति से बढ़ाया है। यह केवल आपूर्ति व्यवधान से बचाव का उपाय नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर प्रभाव जमाने की एक रणनीतिक चाल है। चीन का लक्ष्य है कि वैश्विक स...