अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
भारत की रूस से तेल आयात बंद करने की प्रतिज्ञा: वैश्विक ऊर्जा राजनीति में नई धुरी का उदय सारांश 16 अक्टूबर 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यह घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस से तेल आयात बंद करने का वादा किया है — यह कथन वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था में एक संभावित भूचाल के समान है। यदि यह कदम वास्तविकता में परिवर्तित होता है, तो यह न केवल भारत की ऊर्जा और विदेश नीति में एक निर्णायक बदलाव होगा, बल्कि वैश्विक शक्ति-संतुलन, अमेरिका-भारत संबंधों और चीन की ऊर्जा रणनीति पर भी गहरा प्रभाव डालेगा। यह लेख इस कथित प्रतिज्ञा के संदर्भ, प्रभाव, चुनौतियों और रणनीतिक निहितार्थों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है, इसे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा राजनीति, आर्थिक यथार्थवाद और वैश्विक भू-संतुलन की व्यापक रूपरेखा में रखकर। परिचय ऊर्जा राजनीति आधुनिक विश्व व्यवस्था की धुरी है। तेल और गैस केवल आर्थिक वस्तुएँ नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक हथियार हैं, जिनके माध्यम से राष्ट्र शक्ति, प्रभाव और सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से तेल व्यापार पर पश्चिमी प्रतिबंधों ने वैश्विक ऊर्जा तंत्र ...