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Women’s Reservation Bill Defeat in Lok Sabha 2026: Constitutional Amendment Fails, Setback for Modi Government
महिला आरक्षण, परिसीमन और लोकतंत्र की परीक्षा: संसद में पराजय के मायने भारतीय लोकतंत्र की जटिलताओं में कभी-कभी ऐसे क्षण आते हैं, जब संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं रह जाती, बल्कि राजनीतिक शक्ति, संघीय संतुलन और संवैधानिक नैतिकता की वास्तविक परीक्षा का केंद्र बन जाती है। हाल ही में लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 की पराजय ऐसा ही एक निर्णायक क्षण है—जहां एक ओर महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण का वादा था, तो दूसरी ओर परिसीमन के जरिए सत्ता संतुलन बदलने की आशंकाएं। यह घटना केवल एक विधेयक की हार नहीं, बल्कि उस सहमति की विफलता है, जो किसी भी बड़े संवैधानिक परिवर्तन के लिए अनिवार्य होती है। राजनीतिक इच्छाशक्ति बनाम संस्थागत सहमति प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इस विधेयक को “नारी सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम” बताया। सरकार का तर्क था कि 33% महिला आरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए सीटों का पुनर्गठन और परिसीमन आवश्यक है। किन्तु समस्या इस उद्देश्य में नहीं, बल्कि इसके साधनों में निहित थी। विपक्ष ने इस प्रस्ताव को एक व्यापक राजनीतिक परियोजना के रूप में देखा,...