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जलवायु वार्ताओं में भारत की COP30 तैयारियों पर रुख: जलवायु वित्त और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की मांग परिचय नवंबर 2025 में ब्राजील के बेलेम शहर में आयोजित होने जा रहा संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) का 30वां सम्मेलन (COP30) वैश्विक जलवायु नीति के भविष्य को परिभाषित करने वाला साबित हो सकता है। 21 अक्टूबर 2025 की रॉयटर्स रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने COP30 की तैयारियों के दौरान जलवायु वित्त (Climate Finance) और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) को प्राथमिकता देने का स्पष्ट संकेत दिया है। भारत का यह दृष्टिकोण समान लेकिन विभेदित उत्तरदायित्व और सापेक्ष क्षमताओं (CBDR-RC) के सिद्धांत पर आधारित है, जो पेरिस समझौते (2015) की आत्मा है। भारत, जो विश्व के कुल कार्बन उत्सर्जन में लगभग 7% योगदान देता है लेकिन ऐतिहासिक उत्सर्जन में केवल 4% का हिस्सा रखता है, विकासशील देशों की चिंताओं का प्रतिनिधि बनकर उभरा है। यह लेख COP30 के संदर्भ में भारत के रुख, उसकी नीतिगत प्राथमिकताओं, चुनौतियों और UPSC परीक्षा के दृष्टिकोण से उसकी प्रासंगिकता का विश्लेषण प्रस्तुत करत...