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Free Speech in Contemporary India: Evaluating Salman Rushdie’s Critique of Civil Liberties under Modi’s Administration
Free Speech in Contemporary India: Salman Rushdie की आलोचना और मोदी शासन के संदर्भ में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मूल्यांकन (A fresh, original, flowing, exam-oriented essay) भूमिका अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी भी लोकतंत्र का प्राणतत्व है—एक ऐसा संवैधानिक आश्वासन जो नागरिकों को सत्ता से सवाल पूछने, अन्याय पर आवाज़ उठाने और समाज में बौद्धिक विविधता को बनाए रखने की क्षमता देता है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) यही लोकतांत्रिक आधार प्रदान करता है, हालांकि अनुच्छेद 19(2) के "उचित प्रतिबंध" इस अधिकार को सीमित भी करते हैं। उपनिवेशकालीन विरासत से उत्पन्न ये सीमाएँ समय-समय पर राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित होती रही हैं। इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में प्रसिद्ध लेखक सलमान रुश्दी ने दिसंबर 2025 के एक साक्षात्कार में भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के क्षरण को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि बढ़ते "हिंदू राष्ट्रवाद" और "इतिहास के पुनर्लेखन" की आधिकारिक परियोजनाओं ने लेखकों, पत्रकारों तथा शिक्षाविदों पर दबाव बढ़ाया है, जिससे सार्वजनिक विमर्श भ...