राजनीति शास्त्र (Polity & Political Science) की तैयारी को बनाएं आसान और सटीक! क्या आप UPSC, State PCS, UGC NET, PGT या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं? सही मार्गदर्शन और बेहतरीन स्टडी मटेरियल के लिए विजिट करें: 🌐 www.politypoint.com Polity Point ही क्यों चुनें? विस्तृत एवं सरल नोट्स: भारतीय संविधान, राजव्यवस्था और राजनीतिक सिद्धांत की आसान भाषा में समझ। परीक्षा-उन्मुख सामग्री: पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) का विश्लेषण और ट्रेंड के अनुसार स्टडी मटेरियल। क्विज़ और टेस्ट सीरीज़: अपनी तैयारी का सही आकलन करने के लिए नियमित अभ्यास प्रश्न। करंट अफेयर्स से जुड़ाव: राजव्यवस्था से जुड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का सटीक कवरेज। 🎯 आज ही अपनी सफलता की नींव रखें! अभ्यास शुरू करने और अपनी तैयारी को अगली स्तर पर ले जाने के लिए अभी वेबसाइट पर जाएँ: 👉 www.politypoint.com (स्मार्ट स्टडी करें, सफलता हासिल करें!)
Supreme Court Reconsiders RTE Act Exemption for Minority Institutions: Key Insights and Implications
RTE Act और अल्पसंख्यक संस्थान: सुप्रीम कोर्ट की पुनर्विचार पहल प्रस्तावना भारत का संविधान शिक्षा को न केवल एक अधिकार, बल्कि हर बच्चे के भविष्य को संवारने का आधार मानता है। अनुच्छेद 21A के तहत 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार दिया गया है। इसी दिशा में 2009 में लागू Right to Education (RTE) Act एक क्रांतिकारी कदम था, जिसने निजी और सरकारी स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) और वंचित बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित करने का दायित्व सौंपा। लेकिन 2014 में सुप्रीम कोर्ट के प्रमति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट बनाम भारत संघ (Pramati, 2014) फैसले ने अल्पसंख्यक संस्थानों को RTE के दायरे से पूरी तरह बाहर कर दिया। यह निर्णय अल्पसंख्यक समुदायों की स्वायत्तता की रक्षा तो करता था, लेकिन शिक्षा के समान अवसर के सिद्धांत पर सवाल भी उठाता था। अब, 1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर पुनर्विचार का फैसला किया है और इसे एक बड़ी पीठ (Larger Bench) को सौंपा है। यह कदम शिक्षा और अल्पसंख्यक अधिकारों के बीच संतुलन की नई बहस को जन्म देता है। पृष्ठभूमि: संवैधानिक...