अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
जापान में सत्ता का पुनर्संयोजन: सनाए ताकाइची का सामूहिक इस्तीफा और दूसरे कार्यकाल की रणनीतिक दिशा 18 फरवरी 2026, टोक्यो — जापान की राजनीति में आज जो दृश्य सामने आया, वह किसी संकट, विद्रोह या शासन विफलता का परिणाम नहीं था, बल्कि संसदीय परंपरा का एक परिपक्व प्रदर्शन था। प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने अपने पूरे मंत्रिमंडल के साथ सामूहिक इस्तीफा दिया, ताकि संसद (डाइट) के नए सत्र में पुनर्नियुक्ति की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जा सके। यह कदम उस समय आया है जब उनकी पार्टी, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP), हालिया आम चुनाव में निचले सदन में दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर चुकी है। अतः यह इस्तीफा राजनीतिक अस्थिरता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक पुनर्संयोजन (democratic reset) का प्रतीक है। 1. संवैधानिक प्रक्रिया या राजनीतिक संकेत? जापान की संसदीय व्यवस्था में प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल संसद के विश्वास पर आधारित होते हैं। जब नया सत्र प्रारंभ होता है या आम चुनाव के बाद नई संसद का गठन होता है, तो कैबिनेट का इस्तीफा देना एक औपचारिक आवश्यकता है। टोक्यो स्थित नेशनल डाइट बिल्डिंग में दोपहर को होने वाले स...