अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
US Justice Department Memo and Arrest of Venezuela President Maduro: Legal, Political and International Law Analysis
अमेरिकी न्याय विभाग का मेमो और निकोलस मादुरो की सैन्य-सहायता प्राप्त गिरफ्तारी: कानूनी, राजनीतिक एवं अंतरराष्ट्रीय विधिक आयामों का विश्लेषण परिचय संयुक्त राज्य अमेरिका के राजनीतिक इतिहास में कार्यपालिका की शक्तियों और अंतरराष्ट्रीय कानून के बीच टकराव के अनेक उदाहरण मिलते हैं, किंतु हालिया घटनाक्रम ने इस बहस को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया है। जनवरी 2026 में, डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दौरान, अमेरिकी सेना ने वेनेज़ुएला की राजधानी काराकास में एक सैन्य अभियान चलाकर वहाँ के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को गिरफ्तार कर लिया। इस अभियान को “ऑपरेशन रिज़ॉल्व” नाम दिया गया, जिसे अमेरिकी प्रशासन ने एक “न्याय प्रवर्तन अभियान” के रूप में प्रस्तुत किया। इस कार्रवाई के कानूनी औचित्य के लिए अमेरिकी न्याय विभाग (Department of Justice) के ऑफिस ऑफ लीगल काउंसल (OLC) द्वारा तैयार किया गया एक गोपनीय मेमो हाल ही में सार्वजनिक किया गया, जिसमें तर्क दिया गया कि राष्ट्रपति को ऐसा आदेश देने में न तो अमेरिकी संविधान और न ही अंतरराष्ट्रीय कानून कोई बाधा डालता है। यह लेख इसी मेमो ...