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ट्रम्प की H-1B नीति: भारत के लिए चुनौती या अवसर? संपादकीय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया कार्यकारी आदेश ने वैश्विक आईटी उद्योग को हिला दिया है। 20 सितंबर को जारी प्रोक्लेमेशन के तहत, एच-1बी वीजा के नए आवेदकों के लिए एकमुश्त 100,000 डॉलर (लगभग 84 लाख रुपये) की फीस लगाई गई है। यह कदम अमेरिकी श्रम बाजार को 'अमेरिकन वर्कर्स फर्स्ट' नीति के तहत मजबूत करने का प्रयास है, लेकिन इसका सबसे बड़ा निशाना भारत है – जहां से कुल एच-1बी वीजा का 71 प्रतिशत हिस्सा आता है। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि यह फीस मौजूदा वीजा धारकों पर लागू नहीं होगी, फिर भी भारतीय आईटी कंपनियों और युवा प्रतिभाओं के लिए यह एक बड़ा झटका है। भारत सरकार ने इसे 'मानवीय परिणामों' वाली चिंता बताते हुए कूटनीतिक स्तर पर आवाज बुलंद की है।इस संपादकीय में हम इस नीति के भारत पर पड़ने वाले बहुआयामी प्रभावों का विश्लेषण करेंगे। भारत का एच-1बी निर्भरता: एक आंकड़ों की झलक भारतीय आईटी क्षेत्र अमेरिकी बाजार पर बुरी तरह निर्भर है। नास्कॉम के अनुसार, 2024 में भारतीय कंपनियों ने लगभग 80,000 एच-1बी वीजा के लिए आवेदन क...