अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
A New Momentum in India-UK Relations: Keir Starmer’s Mumbai Visit and the Dawn of a Strategic Partnership
भारत-यूके संबंधों में नई गति: कीर स्टार्मर की मुंबई यात्रा से उभरता वैश्विक सहयोग का नया युग ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का 8 अक्टूबर 2025 को मुंबई आगमन, भारत-यूके संबंधों के इतिहास में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा सकता है। यह केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक साझेदारी के पुनर्परिभाषित स्वरूप का प्रतीक है। 125 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ स्टार्मर का आगमन यह दर्शाता है कि ब्रिटेन, भारत को अब केवल एक व्यापारिक साझेदार के रूप में नहीं, बल्कि एक रणनीतिक सहयोगी और वैश्विक साझेदारी के स्तंभ के रूप में देख रहा है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और बदलता परिदृश्य भारत और ब्रिटेन का संबंध उपनिवेशी अतीत से लेकर आधुनिक लोकतंत्र की साझी विरासत तक फैला है। 1947 के बाद से दोनों देशों ने “कॉमनवेल्थ” की भावना के तहत कई स्तरों पर सहयोग बनाए रखा। लेकिन पिछले दो दशकों में, यह संबंध औपनिवेशिक छाया से बाहर निकलकर समानता और साझेदारी आधारित संबंधों में परिवर्तित हुआ है। ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन ने जब यूरोपीय संघ से अलग होकर अपनी वैश्विक व्यापार नीति को ...