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Chhattisgarh Freedom of Religion Bill 2026: Constitutional Balance, Anti-Conversion Law and Its Implications
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026: स्वतंत्रता, संप्रभुता और सामाजिक संतुलन की परीक्षा प्रस्तावना भारत जैसे बहुलतावादी लोकतंत्र में धर्म केवल व्यक्तिगत आस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और राजनीतिक विमर्श का भी केंद्र है। ऐसे में 19 मार्च 2026 को पारित छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 केवल एक कानूनी प्रावधान भर नहीं, बल्कि यह उस व्यापक बहस का हिस्सा है जिसमें राज्य, समाज और व्यक्ति के अधिकारों के बीच संतुलन खोजा जा रहा है। यह विधेयक, जो अवैध मतांतरण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लाया गया है, एक ओर जहां कमजोर वर्गों की सुरक्षा का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर यह धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक दायरे की सीमाओं को भी परखता है। ऐतिहासिक और विधिक संदर्भ छत्तीसगढ़ का यह कदम नया नहीं है। भारत में ‘एंटी-कन्वर्जन’ कानूनों की जड़ें 1960 के दशक में मिलती हैं, जब मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों ने पहली बार ऐसे कानून बनाए। छत्तीसगढ़ ने 1968 के अधिनियम को अपनाया था, जिसे अब अधिक कठोर और समकालीन चुनौतियों के अनुरूप अद्यतन किया गया है। इस विधेयक का वैधान...