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ऊर्जा युद्ध का उदय: मध्य पूर्व संघर्ष, अमेरिका–इज़राइल मतभेद और भारत की ऊर्जा सुरक्षा प्रस्तावना मार्च 2026 में मध्य पूर्व का संघर्ष एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। यह अब पारंपरिक सैन्य टकराव की सीमाओं से आगे बढ़कर “ऊर्जा युद्ध” का स्वरूप ग्रहण कर चुका है—जहाँ तेल और गैस अवसंरचना स्वयं रणनीतिक लक्ष्य बन गई हैं। ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को चुनौती दी है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी गहरे संकट में डाल दिया है। इस संघर्ष का एक महत्वपूर्ण आयाम यह है कि ऊर्जा संसाधनों पर हमले अब सैन्य रणनीति का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। इसके परिणामस्वरूप वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता, आपूर्ति बाधाएं और कीमतों में तेज़ उछाल देखने को मिल रहा है। यह स्थिति भारत जैसे ऊर्जा-आयात निर्भर देशों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है। ऊर्जा अवसंरचना: युद्ध का नया रणक्षेत्र हाल के घटनाक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऊर्जा अवसंरचना अब “सॉफ्ट टारगेट” नहीं, बल्कि “हाई-वैल्यू स्ट्रेटेजिक एसेट” बन चुकी है। दुनिया के सबसे बड़े गैस क्षेत्रों में से एक Sout...