अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
पीएम-कुसुम योजना का वैश्विक प्रदर्शन - एक सकारात्मक कदम केंद्र सरकार द्वारा पीएम-कुसुम (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) योजना को अफ्रीकी देशों और द्वीपीय राष्ट्रों में प्रदर्शित करने की घोषणा एक स्वागत योग्य कदम है। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने हाल ही में इसकी जानकारी दी, जो भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते नेतृत्व और वैश्विक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल को दर्शाता है। पीएम-कुसुम योजना, जो 2019 में शुरू की गई थी, का उद्देश्य भारतीय किसानों को सौर ऊर्जा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना है। इस योजना के तहत, किसानों को सौर पंप स्थापित करने, सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने और बंजर भूमि पर सौर परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देता है। भारत में इस योजना की सफलता ने इसे वैश्विक मंच पर एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया है। अफ्रीकी देशों और ...