अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
🏹 शीतल देवी: बिना हाथों की तीरंदाज जिसने रचा इतिहास | 2025 पैरा वर्ल्ड चैंपियन मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी शक्ति उसके भीतर छुपा हुआ साहस और आत्मविश्वास होता है। जब परिस्थितियाँ कठिन हो जाएं, शरीर की सीमाएँ चुनौती पेश करें और समाज की अपेक्षाएँ भी कम कर दी जाएं—तब जो व्यक्ति अपने सपनों को थामे रहता है, वही इतिहास रचता है। जम्मू-कश्मीर की शीतल देवी ऐसी ही मिसाल हैं। विपरीत परिस्थितियों में जन्म और संघर्ष शीतल देवी का जन्म फोकोमेलिया (Phocomelia) नामक विकृति के साथ हुआ, जिसमें हाथ विकसित नहीं हो पाते। बचपन से ही उनका जीवन सामान्य बच्चों से अलग था। लेकिन इस कमी ने उनके हौसले को कभी कमजोर नहीं किया। जहाँ बहुत से लोग इसे जीवन की सबसे बड़ी बाधा मान लेते, वहीं शीतल ने इसे अपनी प्रेरणा बना लिया। तीरंदाजी का सफर तीरंदाजी एक ऐसा खेल है जो हाथों की मजबूती और नियंत्रण पर निर्भर करता है। लेकिन शीतल देवी ने यह साबित किया कि शरीर की सीमा मनुष्य की नियति तय नहीं करती। उन्होंने पैरों से तीर चलाना सीखा, अभ्यास में खुद को गढ़ा और धीरे-धीरे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नाम रोशन किया। ...