हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
Tribal Pride Day 2025: Celebrating Birsa Munda’s 150th Birth Anniversary and India’s Indigenous Legacy
जनजातीय गौरव दिवस: आदिवासी विरासत का उत्सव और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती परिचय भारत का स्वतंत्रता संग्राम केवल दिल्ली, मुंबई या कोलकाता जैसे शहरों की सीमाओं में नहीं सिमटा था, बल्कि यह संघर्ष जंगलों, पहाड़ियों और आदिवासी अंचलों में भी उतनी ही प्रखरता से लड़ा गया था। इन्हीं आदिवासी संघर्षों की विरासत के केंद्र में हैं भगवान बिरसा मुंडा—एक ऐसे युवा नायक, जिन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध “उलगुलान” (महान विद्रोह) का बिगुल फूंका और आदिवासी स्वाभिमान का प्रतीक बन गए। 15 नवंबर को मनाया जाने वाला “जनजातीय गौरव दिवस” बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में 2021 में केंद्र सरकार द्वारा घोषित किया गया था। यह दिवस न केवल एक ऐतिहासिक स्मृति है, बल्कि भारत की विविधता, लोक संस्कृति और जनजातीय अस्मिता का राष्ट्रीय उत्सव भी है। 2025 में जब यह दिवस पांचवीं बार मनाया जा रहा है, तब यह अवसर भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के समापन का प्रतीक भी बन रहा है। भगवान बिरसा मुंडा: धरती आबा और उलगुलान के अग्रदूत भगवान बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के उलीहातु गांव में हुआ। ...