अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
Tribal Pride Day 2025: Celebrating Birsa Munda’s 150th Birth Anniversary and India’s Indigenous Legacy
जनजातीय गौरव दिवस: आदिवासी विरासत का उत्सव और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती परिचय भारत का स्वतंत्रता संग्राम केवल दिल्ली, मुंबई या कोलकाता जैसे शहरों की सीमाओं में नहीं सिमटा था, बल्कि यह संघर्ष जंगलों, पहाड़ियों और आदिवासी अंचलों में भी उतनी ही प्रखरता से लड़ा गया था। इन्हीं आदिवासी संघर्षों की विरासत के केंद्र में हैं भगवान बिरसा मुंडा—एक ऐसे युवा नायक, जिन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध “उलगुलान” (महान विद्रोह) का बिगुल फूंका और आदिवासी स्वाभिमान का प्रतीक बन गए। 15 नवंबर को मनाया जाने वाला “जनजातीय गौरव दिवस” बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में 2021 में केंद्र सरकार द्वारा घोषित किया गया था। यह दिवस न केवल एक ऐतिहासिक स्मृति है, बल्कि भारत की विविधता, लोक संस्कृति और जनजातीय अस्मिता का राष्ट्रीय उत्सव भी है। 2025 में जब यह दिवस पांचवीं बार मनाया जा रहा है, तब यह अवसर भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के समापन का प्रतीक भी बन रहा है। भगवान बिरसा मुंडा: धरती आबा और उलगुलान के अग्रदूत भगवान बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के उलीहातु गांव में हुआ। ...