अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
फ्रांस की अर्थव्यवस्था और सामाजिक कल्याण का भविष्य — भारत के लिए संतुलन का सबक 🌍 प्रस्तावना: समृद्धि की कीमत फ्रांस लंबे समय तक यूरोप के सामाजिक कल्याण मॉडल का प्रतीक रहा है। यह वह देश है जिसने हर नागरिक को स्वास्थ्य, शिक्षा, पेंशन, मातृत्व अवकाश और न्यूनतम आय की गारंटी देकर “मानव कल्याण” को अपनी पहचान बनाया। लेकिन आज यही फ्रांस आर्थिक ठहराव, बढ़ते कर्ज और घटती उत्पादकता के संकट में फँसा है। सवाल यह नहीं कि सामाजिक कल्याण जरूरी है या नहीं, बल्कि यह है कि कितना कल्याण टिकाऊ है और उसकी कीमत क्या होगी? 🇫🇷 फ्रांस का ‘कल्याण द्वंद्व’ फ्रांस का सामाजिक कल्याण मॉडल, जो कभी उसकी ताकत था, अब उसकी सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। फ्रांस का सामाजिक खर्च GDP का 31% है, जो OECD देशों में सबसे अधिक है। यह मॉडल नागरिकों को सुरक्षा का वादा तो करता है, लेकिन इसके लिए भारी कर और बढ़ता राजकोषीय घाटा उसकी कीमत बन रहा है। उदाहरण के लिए, 2023 में जब सरकार ने पेंशन की आयु 60 से 62 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा, तो लाखों लोग पेरिस की सड़कों पर उतर आए। यह विरोध केवल नीति के खिलाफ नहीं था, बल्कि उस “सामाजिक अ...