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Rohingya Crisis Explained: From Historical Roots in Myanmar to the Genocide Case at the International Court of Justice
रोहिंग्या संकट: इतिहास की परछाइयों से अंतरराष्ट्रीय न्याय के कटघरे तक इतिहास कभी अचानक घटित नहीं होता। वह धीरे-धीरे बनता है—सदियों की स्मृतियों, भूलों, भय और सत्ता के निर्णयों से। म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के साथ जो घटित हुआ, वह भी किसी एक वर्ष, एक सैन्य अभियान या एक राजनीतिक सरकार का परिणाम नहीं है। यह एक लंबी ऐतिहासिक प्रक्रिया का निष्कर्ष है, जिसकी जड़ें औपनिवेशिक काल में हैं और जिसकी परिणति आज अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के कठघरे में खड़े म्यांमार राज्य के रूप में दिखाई देती है। इतिहास की शुरुआत: सहअस्तित्व से संदेह तक म्यांमार का पश्चिमी तटीय क्षेत्र—अराकान या आज का राखाइन राज्य—कभी व्यापार, संस्कृति और धर्मों के मेल का क्षेत्र था। अरब, फारसी और बंगाली व्यापारियों के साथ इस्लाम यहाँ पहुँचा और समय के साथ एक मुस्लिम समुदाय विकसित हुआ, जिसे आज रोहिंग्या कहा जाता है। मध्यकालीन अराकान में बौद्ध और मुस्लिम समुदायों का सहअस्तित्व असामान्य नहीं था। परंतु आधुनिक राष्ट्र-राज्य की अवधारणा ने इस सहअस्तित्व को संदेह में बदल दिया। जैसे-जैसे पहचान “स्थानीय” और “बाहरी” के खाँचों में...