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पंजाब की बाढ़: किसानों की तबाही और पुनर्जनन की राह (निबंधात्मक लेख – UPSC दृष्टिकोण से) प्रस्तावना: अन्न भंडार का संकट पंजाब, जिसे भारत का अन्न भंडार कहा जाता है, अपनी उपजाऊ मिट्टी और मेहनती किसानों की बदौलत देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ रहा है। सतलज, ब्यास और रावी नदियों की गोद में बसा यह राज्य हरित क्रांति का प्रतीक है। लेकिन सितंबर 2025 की भयावह बाढ़ ने इस स्वर्णिम पहचान को गहरी चोट पहुंचाई। खेतों में लहलहाती फसलें जलमग्न हो गईं, किसानों के चेहरों पर निराशा छा गई, और पंजाब का हरा-भरा सपना झीलों में तब्दील हो गया। यह केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय संकट है, जो हमें दीर्घकालिक समाधानों की ओर सोचने को मजबूर करता है। बाढ़ का विनाशकारी स्वरूप सितंबर 2025 की बाढ़ ने पंजाब के 23 जिलों में तबाही मचाई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लगभग 1.93 लाख हेक्टेयर (करीब 4.77 लाख एकड़) कृषि भूमि जलमग्न हो गई। 2,000 से अधिक गांव पानी की चपेट में आए, 50-55 लोगों की जान गई, और करीब चार लाख लोग विस्थापित हुए। प्रारंभिक अनुमान बताते हैं कि ₹13,800 करोड़ का नुकसान हुआ, ज...