भारत की गाजा शांति योजना में भागीदारी: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पर्यवेक्षक के रूप में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति परिचय वर्ष 2026 में गाजा पट्टी का प्रश्न केवल इजराइल–फिलिस्तीन संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति-संतुलन, मानवीय हस्तक्षेप और बहुपक्षीय कूटनीति की परीक्षा बन गया है। ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा प्रारंभ किया गया ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) एक नई पहल के रूप में सामने आया है, जिसका घोषित उद्देश्य गाजा में युद्धविराम की निगरानी, पुनर्निर्माण, हमास के निरस्त्रीकरण तथा एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण व्यवस्था की स्थापना है। फरवरी 2026 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित इस बोर्ड की पहली बैठक में भारत ने पूर्ण सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया। यह निर्णय साधारण कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की संतुलित और बहुस्तरीय विदेश नीति का प्रतीक है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र से परे एक वैकल्पिक मंच? ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में विश्व आर्थिक मंच (दावोस) के दौरान इस पहल की घोषणा की थी। इसे एक ऐसे मंच के रूप में...
ताइवान के राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते और चीन की सैन्य मंशा: 2026 की दहलीज पर शक्ति-संतुलन का नया परीक्षण प्रस्तावना नए वर्ष 2026 की शुरुआत ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और सामरिक अनिश्चितता के बीच हुई। ताइवान के राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते ने अपने नववर्षीय संबोधन में जिस दृढ़ स्वर में राष्ट्रीय सार्वभौमिकता की रक्षा और रक्षा क्षमताओं के आधुनिकीकरण की प्रतिबद्धता दोहराई, वह केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि बदलती एशियाई भू-राजनीति का संकेतक भी है। यह वक्तव्य ऐसे समय आया है जब चीन ने ताइवान के चारों ओर व्यापक सैन्य अभ्यास कर अपनी सैन्य शक्ति-प्रदर्शन रणनीति को एक बार फिर रेखांकित किया है। चीन का सैन्य अभ्यास: शक्ति-संदेश या दबाव-रणनीति? दिसंबर 2025 के अंत में आयोजित “जस्टिस मिशन 2025” केवल एक नियमित सैन्य अभ्यास नहीं था। यह अभ्यास— नौसेना, वायुसेना, रॉकेट फोर्स और कोस्ट गार्ड तटरेखा के अत्यंत निकट लाइव-फायर ड्रिल बहु-डोमेन समन्वित ऑपरेशन —जैसे तत्वों के कारण विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। चीन ने इसे “ताइवान स्वतंत्रता समर्थक ताकतों और बाहरी हस्तक्षेप को चेतावनी” करार दिया, वहीं त...