हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
Dharmendra Passes Away at 89: End of an Era for Bollywood’s He-Man | Legendary Actor Dies on 24 November
धर्मेंद्र: भारतीय सिनेमा के ही-मैन की विरासत, उपलब्धियाँ और सांस्कृतिक प्रभाव का विश्लेषण सारांश (Abstract) धर्मेंद्र (1935–2025) भारतीय जनमानस के उन विरले कलाकारों में से थे जिन्होंने सिनेमा में केवल अभिनय नहीं किया, बल्कि उसे जिया और अपनी जीवंत उपस्थिति से एक सांस्कृतिक युग का निर्माण किया। छह दशकों में फैले उनके करियर ने हिंदी सिनेमा को वैचारिक, सौंदर्यात्मक और भावनात्मक—तीनों स्तरों पर दिशा दी। 24 नवंबर 2025 को उनका निधन केवल उनकी विरासत का अवसान ही नहीं, बल्कि एक युग का अंत भी है। यह लेख धर्मेंद्र के जीवन, अभिनय-शिल्प, सांस्कृतिक प्रभाव और फिल्म इतिहास में उनकी प्रासंगिकता का विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसमें उनकी कला की व्यापकता और मानवीय संवेदनशीलता का बहुआयामी स्वरूप उभरता है। परिचय (Introduction) धर्मेंद्र का नाम हिंदी सिनेमा की स्मृतियों में कभी भी केवल एक अभिनेता के रूप में नहीं रहा; वे लोक-नायक, आदर्श-पुरुष और मानवीय संवेदना के प्रतीक के रूप में उभरे। 1950–60 के दशक में जब भारत नव-स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपनी सांस्कृतिक पहचान खोज रहा था, धर्मेंद्र उस खोज के मानवीय,...