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India–EU Free Trade Agreement 2026: Economic Impact, Strategic Significance and Global Trade Implications
भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता: 21वीं सदी की भू-अर्थव्यवस्था में एक निर्णायक मोड़ 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में संपन्न 16वें भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन ने वैश्विक व्यापार-कूटनीति में एक लंबे अंतराल को विराम दिया। लगभग दो दशकों की अनिश्चित, जटिल और अक्सर ठहरी हुई वार्ताओं के बाद भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) आखिरकार साकार हुआ। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “साझा समृद्धि का नया ब्लूप्रिंट” कहा, तो यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे “सभी सौदों की जननी” के रूप में रेखांकित किया। इन प्रतीकात्मक वक्तव्यों के पीछे एक ठोस यथार्थ है—यह समझौता केवल टैरिफ घटाने का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत-ईयू साझेदारी का रणनीतिक घोषणापत्र है। लंबी प्रतीक्षा का इतिहास और बदलता संदर्भ भारत-ईयू एफटीए की यात्रा 2007 में शुरू हुई थी। 2013 तक वार्ताएं निर्णायक मोड़ पर पहुंचीं, पर कृषि, दवाओं में बौद्धिक संपदा अधिकार, सेवाओं में बाज़ार-पहुँच और श्रम-पर्यावरण मानकों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर असहमति ने प्रक्रिया को रोक दिया। घर...