अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
India Approves ₹79,000 Crore Defence Acquisition Plan: Boost to Indigenous Missile, Naval & Intelligence Capabilities
भारत द्वारा ₹79,000 करोड़ के सैन्य हार्डवेयर और हथियारों की खरीद प्रस्तावों को मंजूरी: एक रणनीतिक विश्लेषण सारांश भारत सरकार ने हाल ही में लगभग ₹79,000 करोड़ की लागत से आधुनिक हथियारों और सैन्य उपकरणों की खरीद के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इस स्वीकृति में नाग मिसाइल , उभयचर युद्धपोत , और इलेक्ट्रॉनिक खुफिया एवं निगरानी प्रणालियाँ जैसे अत्याधुनिक सिस्टम शामिल हैं। यह निर्णय न केवल भारत की सैन्य तैयारी को मजबूत करेगा, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उद्योग को भी नई दिशा देगा। यह लेख इस निर्णय के रणनीतिक, तकनीकी और नीति-आधारित पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। परिचय 21वीं सदी के जटिल सुरक्षा वातावरण में, किसी भी राष्ट्र की शक्ति केवल उसकी अर्थव्यवस्था या कूटनीति से नहीं, बल्कि उसकी सैन्य तैयारी और प्रौद्योगिकीय श्रेष्ठता से भी मापी जाती है। भारत, जो एक परमाणु शक्ति और उभरती वैश्विक शक्ति है, निरंतर अपनी रक्षा संरचना को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठा रहा है। रक्षा मंत्रालय द्वारा स्वीकृत इस ₹79,000 करोड़ के पैकेज का उद्देश्य न केवल सशस्त्र ब...