अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
हर वर्ष 15 जनवरी को भारतीय थल सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भारतीय सेना के लिए गर्व और सम्मान का प्रतीक है, जो हमारे देश की सुरक्षा और अखंडता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती है। इस दिवस का ऐतिहासिक महत्व 15 जनवरी 1949 की उस घटना से जुड़ा है, जब फील्ड मार्शल केएम करियप्पा ने ब्रिटिश जनरल सर फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ का पदभार ग्रहण किया। यह एक ऐतिहासिक क्षण था, जिसने भारतीय सेना को औपनिवेशिक नियंत्रण से पूर्ण स्वतंत्रता दिलाई और सेना की कमान भारतीय हाथों में सौंपी। भारतीय सेना की गौरवशाली भूमिका भारतीय सेना न केवल बाहरी खतरों से देश की रक्षा करती है, बल्कि आपदाओं और संकट की घड़ी में नागरिक सहायता भी प्रदान करती है। सेना की वीरता, अनुशासन और त्याग का उदाहरण विभिन्न युद्धों और शांति अभियानों में देखने को मिला है। थल सेना दिवस का आयोजन इस दिन देशभर में विशेष परेड और समारोह आयोजित किए जाते हैं। दिल्ली के परेड ग्राउंड में सेना के जवान अपनी ताकत और आधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन करते हैं। यह दिन न केवल सेना के जवानों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए ग...