अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
Supreme Court’s Landmark Verdict: Orders Removal of Stray Dogs and Cattle from Public Places for Public Safety and Animal Welfare
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों एवं मवेशियों को हटाने के निर्देश परिचय भारत जैसे विशाल और जनसंख्या-घनत्व वाले देश में आवारा पशुओं की समस्या नई नहीं है, किंतु हाल के वर्षों में यह जन-सुरक्षा, सार्वजनिक स्वच्छता और शहरी शासन — तीनों स्तरों पर एक गंभीर चुनौती के रूप में उभरी है। स्कूलों, अस्पतालों, बस अड्डों, पार्कों और राजमार्गों पर घूमते आवारा कुत्ते और मवेशी न केवल नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके हैं, बल्कि ये सड़क दुर्घटनाओं, रेबीज जैसी बीमारियों और पर्यावरणीय अव्यवस्था का भी कारण हैं। इसी पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट का हालिया निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसमें न्यायालय ने अधिकारियों को स्कूलों, बस अड्डों तथा राजमार्गों से आवारा कुत्तों और मवेशियों को हटाकर पशु आश्रयों में रखने का निर्देश दिया है। यह फैसला न केवल मानवीय सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि पशु कल्याण और शहरी नियोजन के बीच संतुलन स्थापित करने का भी प्रयास है। समस्या का स्वरूप भारत में आवारा कुत्तों की संख्या लगभग 6 करोड़ आंकी गई है — जो विश्व में सबसे अधिक है। इनमें से अधिकांश शह...