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West Asia Crisis 2026: India’s Strategic Response on Energy Security, Diplomacy and Economic Resilience
पश्चिम एशिया का धधकता संकट और भारत की रणनीतिक परीक्षा ऊर्जा सुरक्षा, कूटनीति और आर्थिक लचीलेपन की त्रयी प्रस्तावना फरवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का केंद्र बन गया। अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए सैन्य हमलों ने न केवल क्षेत्रीय संतुलन को अस्थिर किया, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की धुरी—ऊर्जा आपूर्ति—को भी झकझोर दिया। ईरान की जवाबी रणनीति, विशेष रूप से हार्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान, ने इस संकट को एक वैश्विक आपूर्ति झटके (global supply shock) में बदल दिया। ऐसे समय में भारत—जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का लगभग 85% आयात करता है—एक जटिल द्वंद्व के बीच खड़ा है: ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना और घरेलू आर्थिक स्थिरता को बचाए रखना। 1. ऊर्जा सुरक्षा: निर्भरता से लचीलापन तक भारत की ऊर्जा संरचना लंबे समय से पश्चिम एशिया पर निर्भर रही है। सऊदी अरब, इराक, यूएई और कुवैत जैसे देश भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। ऐसे में हार्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान केवल एक क्षेत्रीय घटना नहीं, बल्कि भारत के लिए आर्थिक जोखिम का प्रत...