अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
महाराष्ट्र सरकार का निर्णय: मराठों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र – सामाजिक न्याय की एक नई राह प्रस्तावना भारत का सामाजिक ढांचा जटिल है, और आरक्षण नीति इसके केंद्र में है। यह नीति सामाजिक न्याय और समान अवसरों का वादा करती है, लेकिन कई बार यह विवादों का कारण भी बनती है। महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग ने दशकों से राजनीति और समाज को हिलाकर रखा है। हाल ही में, महाराष्ट्र सरकार ने एक नया रास्ता चुना – हैदराबाद गज़ेटियर के आधार पर मराठा समुदाय के उन लोगों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र देना, जो यह साबित कर सकें कि उनके पूर्वज कुनबी थे। यह कदम न सिर्फ मराठा आंदोलन को शांत करने की कोशिश है, बल्कि सामाजिक और संवैधानिक संतुलन की दिशा में एक बड़ा प्रयोग भी है। आइए, इस निर्णय को सरल और रुचिकर ढंग से समझें। मराठा और कुनबी: एक ऐतिहासिक झलक मराठा समुदाय महाराष्ट्र की रीढ़ है। खेती से लेकर राजनीति तक, उनका प्रभाव हर जगह दिखता है। लेकिन आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों ने मराठा समाज को आरक्षण की मांग की ओर धकेला। 2018 में, महाराष्ट्र सरकार ने मराठों को SEBC (सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग) के तहत आरक्ष...