हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
सुधाकंठ भूपेन हजारिका – ब्रह्मपुत्र के कवि | UPSC दृष्टिकोण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 सितंबर, 2025 को असम के महान सांस्कृतिक प्रतीक भूपेन हजारिका को श्रद्धांजलि दी, जिन्हें ‘सुधाकंठ’ (अमृत स्वर) और ‘ब्रह्मपुत्र के कवि’ के रूप में जाना जाता है। उन्होंने हजारिका के गीतों में निहित मानवता, एकता और सामाजिक न्याय के संदेशों को रेखांकित किया। UPSC के दृष्टिकोण से, भूपेन हजारिका की विरासत और उनके योगदान को भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता, और पूर्वोत्तर भारत के सांस्कृतिक एकीकरण के संदर्भ में समझना महत्वपूर्ण है। यह लेख उनके जीवन, कार्य और प्रासंगिकता को UPSC की मुख्य परीक्षा और प्रारंभिक परीक्षा के लिए संक्षेप में प्रस्तुत करता है। भूपेन हजारिका का परिचय जन्म और पृष्ठभूमि : 8 सितंबर 1926 को असम के सादिया (तिनसुकिया) में जन्म। बहुआयामी व्यक्तित्व : गायक, संगीतकार, कवि, फिल्म निर्माता, पत्रकार, राजनीतिक चिंतक और सामाजिक कार्यकर्ता। उपनाम : ‘सुधाकंठ’ और ‘ब्रह्मपुत्र के कवि’ उनकी सांस्कृतिक और भावनात्मक गहराई को दर्शाते हैं। शिक्षा : बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक और कोलं...