अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
मध्य प्रदेश में सोयाबीन खेती का संकट: चुनौतियाँ और समाधान भूमिका मध्य प्रदेश, जिसे “भारत का सोयाबीन राज्य” कहा जाता है, देश के कुल सोयाबीन उत्पादन का लगभग 55–60% योगदान देता है। प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा इसी फसल पर निर्भर है। सोयाबीन न केवल किसानों के लिए नकदी फसल है, बल्कि देश की तिलहन आत्मनिर्भरता के लिए भी इसका महत्व अत्यधिक है। किन्तु, पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में लगातार संकट गहराता जा रहा है। उत्पादन लागत बढ़ने, समर्थन मूल्य के कमजोर क्रियान्वयन, बीज की गुणवत्ता में गिरावट, जलवायु अस्थिरता, और आयात की चुनौती ने किसानों को हताश कर दिया है। परिणामस्वरूप, युवा किसान खेती से विमुख हो रहे हैं और शहरी रोजगार की ओर पलायन कर रहे हैं। यह लेख इसी संकट की जड़ों का विश्लेषण करता है और उसके व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है। 1. संकट की पृष्ठभूमि और प्रमुख चुनौतियाँ (क) MSP का अप्रभावी क्रियान्वयन सोयाबीन किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) एक सुरक्षा कवच के समान है। परंतु, मध्य प्रदेश में यह कवच अब खोखला साबित हो रहा है। कई जिलों में सरकारी खरीद केंद्रों...