अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
🌎 विश्व सरकार बनाम ट्रम्प का अमेरिका: प्रोजेक्ट 2025 और नई विश्व व्यवस्था का विश्लेषण 🔹 सारांश डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल (2025–2029) में अमेरिका की विदेश नीति ने वैश्विक शासन की अवधारणा को गहराई से चुनौती दी है। “ अमेरिका फर्स्ट ” सिद्धांत अब केवल एक चुनावी नारा नहीं रहा, बल्कि यह अमेरिका की वैचारिक दिशा बन गया है। ट्रम्प प्रशासन की Project 2025 नीति-रूपरेखा, संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व व्यापार संगठन (WTO) और अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं के प्रति स्पष्ट असंतोष और दूरी को दर्शाती है। यह लेख तर्क देता है कि अमेरिका अब “विश्व सरकार” जैसी किसी सामूहिक व्यवस्था का नेतृत्व नहीं करना चाहता, बल्कि एक अमेरिका-केंद्रित वैश्विक शक्ति-संतुलन स्थापित करने का प्रयास कर रहा है — जो न केवल बहुध्रुवीय अराजकता को जन्म दे सकता है, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी दीर्घकालिक खतरा बन सकता है। 🔹 परिचय द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने एक ऐसी विश्व व्यवस्था का निर्माण किया था जिसे अक्सर “ लिबरल इंटरनेशनल ऑर्डर ” कहा जाता है। इसका उद्देश्य था — वैश्विक शांति, मुक्त व्यापार, और लोकतांत्रिक शासन ...