अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
अमेरिकी नौसैनिक अभियान 2025: नशीली दवाओं के खिलाफ युद्ध या सैन्य शक्ति का विस्तार? सार सितंबर से अक्टूबर 2025 के बीच अमेरिकी नौसेना द्वारा कैरेबियाई सागर और वेनेजुएला तट पर संचालित पाँच सैन्य अभियानों में कुल 27 लोगों की मृत्यु हुई। इन कार्रवाइयों को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने “ड्रग कार्टेलों के विरुद्ध निर्णायक प्रहार” बताया, किंतु न तो इन अभियानों का ठोस साक्ष्य सार्वजनिक किया गया, न ही अंतरराष्ट्रीय या क्षेत्रीय सहमति ली गई। यह लेख इन अभियानों की कानूनी वैधता, साक्ष्य की अनुपलब्धता और भूराजनीतिक परिणामों का विश्लेषण करता है। अध्ययन निष्कर्ष निकालता है कि ये कार्रवाइयाँ अमेरिकी “War on Drugs” की परंपरा का विस्तार हैं, परंतु पारदर्शिता और जवाबदेही के अभाव में यह नीति अंतरराष्ट्रीय कानून और लोकतांत्रिक संस्थाओं की सीमाओं को धुंधला करती है। प्रस्तावना 2025 के उत्तरार्ध में अमेरिका ने कैरेबियाई सागर में नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ पाँच सशस्त्र नौसैनिक कार्रवाइयाँ कीं। इनमें से अधिकांश अभियानों का केंद्र वेनेजुएला और कोलंबिया के तटीय क्षेत्र रहे, जिनमें कुल 27 लोगों की म...