हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता: 1945 से 2025 की ओर (An Academic Analysis of the Need for UN Reforms in the 21st Century) परिचय संयुक्त राष्ट्र (United Nations – UN) की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को द्वितीय विश्व युद्ध की भयावहता के बाद एक ऐसे वैश्विक मंच के रूप में की गई थी, जो अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा, विकास और मानवाधिकारों के संरक्षण को सुनिश्चित करे। उस समय यह संस्था एक नई आशा का प्रतीक थी—एक ऐसे विश्व की, जो संवाद और सहयोग से विवादों का समाधान खोजेगा। किन्तु 80 वर्षों के उपरांत, 2025 के वैश्विक परिदृश्य में यह प्रश्न बार-बार उठ रहा है कि क्या संयुक्त राष्ट्र अब भी अपनी मूल भावना और उद्देश्य के अनुरूप कार्य कर पा रहा है? क्या इसकी संरचना, निर्णय-प्रक्रिया और शक्ति-संतुलन 21वीं सदी की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करते हैं? भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 16 अक्टूबर 2025 को इस प्रश्न को मुखर करते हुए कहा कि “संयुक्त राष्ट्र की संरचना 1945 की है, जबकि विश्व अब 2025 की जटिलताओं में जी रहा है।” उनका यह कथन केवल भारत का दृष्टिकोण नहीं, बल्कि उस सामूहिक वैश्विक असंतोष...