अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
इजरायल की गाजा में नागरिकों की मूलभूत आवश्यकताओं को सुनिश्चित करने की दायित्व: अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का परामर्शी मत परिचय अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice – ICJ), जो संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च न्यायिक निकाय है, ने हाल ही में एक ऐतिहासिक परामर्शी मत (Advisory Opinion) जारी किया है। इस मत में न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि गाजा पट्टी में रहने वाली नागरिक आबादी की मूलभूत आवश्यकताओं को सुनिश्चित करना इजरायल का अंतरराष्ट्रीय दायित्व है। यह परामर्शी मत न केवल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (International Humanitarian Law) की व्याख्या को गहराता है, बल्कि यह वैश्विक नैतिकता, मानवाधिकारों की रक्षा, और संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में नागरिक सुरक्षा की अवधारणा को भी सशक्त करता है। पृष्ठभूमि और संदर्भ गाजा पट्टी दशकों से इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष का केंद्र रही है। 2007 में हमास के नियंत्रण में आने के बाद से, इजरायल ने गाजा पर सख्त नाकाबंदी (Blockade) लागू की हुई है। इस नाकाबंदी के कारण गाजा में भोजन, बिजली, दवाइयाँ, स्वच्छ जल और ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी बनी रहती है। ...