अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
भारत में विदेशी निवेश: नियामकीय सुधार, चुनौतियाँ और अवसर (2025 विश्लेषण) भारत में विदेशी निवेश (FDI और FPI) 2025 पर विस्तृत विश्लेषण। SEBI और RBI के नियामकीय सुधारों, SWAGAT-FI योजना, चुनौतियों, अवसरों और UPSC के दृष्टिकोण को शामिल करने वाला यह निबंध छात्रों, शोधकर्ताओं और पॉलिसी एनालिस्ट्स के लिए उपयोगी है। इसमें पूँजी प्रवाह, रोजगार सृजन, रुपये की स्थिरता, डेटा सुरक्षा और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी प्रमुख बातों पर गहराई से चर्चा की गई है। भारत आज विश्व की सबसे तेज़ी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार 2025 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रहने की संभावना है। यह आँकड़ा न केवल भारत की आर्थिक क्षमता को रेखांकित करता है बल्कि इसे वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य भी बनाता है। आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति और बुनियादी ढाँचे के निर्माण के लिए भारी मात्रा में पूँजी की आवश्यकता होती है। इस पूँजी का बड़ा हिस्सा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) से आता है। विदेशी निवेश केवल पूँजी ही नहीं बल्कि प्रबंधन कौशल, ...