हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स की सदस्यता का अंत: ब्रिटिश लोकतंत्र के विकास का एक निर्णायक अध्याय ब्रिटेन की संसदीय परंपरा विश्व की सबसे पुरानी और स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। किंतु इस गौरवपूर्ण परंपरा के भीतर कुछ ऐसे तत्व भी रहे हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ लंबे समय से असंगत माने जाते रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख था हाउस ऑफ लॉर्ड्स में वंशानुगत पीयर्स (Hereditary Peers) की सदस्यता—एक ऐसी व्यवस्था जिसके अंतर्गत कुलीन परिवारों के सदस्य केवल अपने जन्म के आधार पर संसद के ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करते थे। मार्च 2026 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित Hereditary Peers Bill इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही वह परंपरा समाप्त हो जाएगी जिसके अंतर्गत राजनीतिक शक्ति का एक हिस्सा जन्माधिकार से निर्धारित होता था। यह सुधार न केवल एक संस्थागत परिवर्तन है, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र के क्रमिक आधुनिकीकरण की उस दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें सामंती विरासतों को धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरू...
भारत की बहुलतावादी आत्मा पर सुनियोजित प्रहार : पहलगाम त्रासदी से सीख जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हालिया आतंकी हमला महज हिंसा की एक सामान्य घटना नहीं थी। यह भारत की धर्मनिरपेक्ष पहचान पर किया गया एक सुनियोजित और गहरा प्रहार था — एक ऐसा प्रयास जो सामाजिक अविश्वास को बढ़ाने, सांप्रदायिक विभाजन को गहरा करने और भारत की बहुलतावादी छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से किया गया। 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या — जिनमें से कई को धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया — इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि आतंक का उद्देश्य केवल जानमाल का नुकसान नहीं, बल्कि भारत के सामाजिक संतुलन को अस्थिर करना भी था। यह त्रासदी न केवल मानवीय दृष्टिकोण से अत्यंत दुखद है, बल्कि इसके दूरगामी सामाजिक, राजनीतिक और रणनीतिक निहितार्थ भी हैं। अतः यह आवश्यक हो जाता है कि इस घटना के पीछे की गहरी परतों को समझा जाए और भविष्य के लिए एक सशक्त रणनीति तैयार की जाए। सामाजिक ताने-बाने पर हमला धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाना आतंकवाद की पुरानी रणनीति रही है। 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के पलायन ने यह दिखा दिया था कि कैसे सांप्रदा...