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भारत की बहुलतावादी आत्मा पर सुनियोजित प्रहार : पहलगाम त्रासदी से सीख जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हालिया आतंकी हमला महज हिंसा की एक सामान्य घटना नहीं थी। यह भारत की धर्मनिरपेक्ष पहचान पर किया गया एक सुनियोजित और गहरा प्रहार था — एक ऐसा प्रयास जो सामाजिक अविश्वास को बढ़ाने, सांप्रदायिक विभाजन को गहरा करने और भारत की बहुलतावादी छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से किया गया। 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या — जिनमें से कई को धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया — इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि आतंक का उद्देश्य केवल जानमाल का नुकसान नहीं, बल्कि भारत के सामाजिक संतुलन को अस्थिर करना भी था। यह त्रासदी न केवल मानवीय दृष्टिकोण से अत्यंत दुखद है, बल्कि इसके दूरगामी सामाजिक, राजनीतिक और रणनीतिक निहितार्थ भी हैं। अतः यह आवश्यक हो जाता है कि इस घटना के पीछे की गहरी परतों को समझा जाए और भविष्य के लिए एक सशक्त रणनीति तैयार की जाए। सामाजिक ताने-बाने पर हमला धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाना आतंकवाद की पुरानी रणनीति रही है। 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के पलायन ने यह दिखा दिया था कि कैसे सांप्रदा...