अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला: परमाणु निरोध की दोहरी नैतिकता और विश्व व्यवस्था की परीक्षा (विश्लेषणात्मक एडिटोरियल लेख) प्रस्तावना: युद्ध, शक्ति और नैतिकता का टकराव फरवरी–मार्च 2026 में पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान केवल एक क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और शक्ति-राजनीति के नैतिक आधारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमेरिकी प्रशासन इस अभियान को “पूर्वनिवारक हमला” (pre-emptive strike) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के संभावित परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को रोकना बताया जा रहा है। किंतु इस तर्क के साथ ही एक गहरी विडंबना भी जुड़ी हुई है—वे राज्य जो स्वयं परमाणु हथियारों से लैस हैं, वही एक ऐसे राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ रहे हैं जिसके पास अभी तक परमाणु हथियार होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। यही वह बिंदु है जहाँ परमाणु निरोध (nuclear deterrence) और पर...
हिंदी दिवस 2025: भाषाई एकता, दक्षिण भारत की असहमति और यूपीएससी दृष्टिकोण आज, 14 सितंबर 2025 को हिंदी दिवस के अवसर पर, जब हम हिंदी भाषा की समृद्ध विरासत का जश्न मना रहे हैं, तो यह समय है कि हम भारत की भाषाई बहुलता के संदर्भ में गहन चिंतन करें। 1949 में संविधान सभा द्वारा हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाए जाने की स्मृति में मनाया जाने वाला यह दिवस न केवल हिंदी की सांस्कृतिक शक्ति का उत्सव है, बल्कि राष्ट्रीय एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम की याद भी दिलाता है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में हिंदी को 'राष्ट्रीय भाषा' के रूप में स्थापित करने के प्रयासों ने गंभीर विवादों को जन्म दिया है, विशेष रूप से दक्षिण भारत में। यह संपादकीय इन विवादों का विश्लेषण करते हुए, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के दृष्टिकोण से भाषा नीति की चुनौतियों पर प्रकाश डालता है और एक संतुलित मार्ग की आवश्यकता पर जोर देता है। हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बनाने का प्रयास भारत की भाषाई विविधता के लिए एक दोधारी तलवार साबित हो रहा है। संविधान में स्पष्ट रूप से 'राष्ट्रीय भाषा' की कोई...