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Polity Point By Arvind Singh PK Rewa

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Nepal Election 2026: Rise of RSP and Balen Shah Signals a New Era in Nepali Politics

नेपाल चुनाव 2026: एक नई राजनीतिक क्रांति और युवा नेतृत्व का उदय नेपाल की राजनीति में मार्च 2026 के आम चुनावों ने एक ऐतिहासिक परिवर्तन का संकेत दिया है। लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता, गठबंधन सरकारों की विफलताओं और पारंपरिक दलों के प्रभुत्व से जूझ रहे इस हिमालयी राष्ट्र में अब एक नई राजनीतिक धारा उभरती दिखाई दे रही है। 5 मार्च 2026 को हुए चुनावों में युवा-केंद्रित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (Rastriya Swatantra Party – RSP) की अप्रत्याशित सफलता ने न केवल पुराने राजनीतिक समीकरणों को तोड़ दिया, बल्कि नेपाल की लोकतांत्रिक राजनीति में एक पीढ़ीगत परिवर्तन का संकेत भी दिया है। इस चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं है, बल्कि राजनीतिक संस्कृति के परिवर्तन की शुरुआत भी हो सकता है। युवा मतदाताओं, विशेषकर जेन-ज़ेड पीढ़ी, ने पहली बार इतने व्यापक स्तर पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया है। राजनीतिक पृष्ठभूमि: असंतोष से परिवर्तन तक नेपाल की आधुनिक राजनीति पिछले तीन दशकों से अस्थिरता और लगातार बदलती सरकारों से प्रभावित रही है। 1990 के दशक में बहुदलीय लोकतंत्र की बह...

Tarique Rahman: From Exile to Power | Bangladesh’s Democratic Revival After 2026 Election

तारिक रहमान: निर्वासन की आग से निकली आशा की ज्योति बांग्लादेश के नए राजनीतिक सूर्योदय की कहानी 20 नवंबर 1965 को ढाका में जन्मे आज बांग्लादेशी राजनीति के सबसे निर्णायक व्यक्तित्व के रूप में उभरे हैं। 2026 के आम चुनावों में (BNP) की ऐतिहासिक जीत के बाद वे प्रधानमंत्री-निर्दिष्ट बने—एक ऐसा क्षण जो केवल सत्ता-परिवर्तन नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष, निर्वासन और लोकतांत्रिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले जनउभार के बाद बने शून्य को भरने की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर है—और राष्ट्र की निगाहें उन्हीं पर टिकी हैं। विरासत, बचपन और राष्ट्रनिर्माण की स्मृतियाँ तारिक रहमान की राजनीतिक चेतना किसी एक घटना की देन नहीं; यह इतिहास की आग में तपकर बनी है। वे —बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के नायक—और पूर्व प्रधानमंत्री के ज्येष्ठ पुत्र हैं। 1971 के युद्धकालीन अनुभवों और परिवार पर पड़े दमन ने उन्हें कम उम्र में ही सत्ता, स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के अर्थ सिखाए। ढाका के BAF Shaheen College में अनुशासन और आत्मसंयम ने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया। विश्वविद्यालयी वर्षों में अंतरराष्ट्रीय...

Bangladesh Election 2026: Gen-Z Uprising, Fall of Hasina Era and BNP’s Return to Power

बांग्लादेश चुनाव 2026: जेन-जेड विद्रोह से लोकतांत्रिक सत्ता परिवर्तन तक भूमिका 12 फरवरी 2026 को संपन्न बांग्लादेश का 13वाँ संसदीय आम चुनाव केवल एक नियमित लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं था, बल्कि यह दक्षिण एशिया के राजनीतिक इतिहास में एक युवा-प्रेरित सत्ता परिवर्तन का प्रतीक बन गया। 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले जन-उभार के बाद यह पहला बड़ा चुनाव था, जिसने 15 वर्षों से सत्ता में रही शेख हसीना की अवामी लीग के राजनीतिक प्रभुत्व का औपचारिक अंत कर दिया। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में गठित अंतरिम सरकार की देखरेख में हुए इस चुनाव ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को स्पष्ट जनादेश प्रदान किया और देश की राजनीति को एक नए युग में प्रवेश कराया। पृष्ठभूमि: 2024 का जन-उभार और सत्ता का पतन 2024 में बांग्लादेश ने अभूतपूर्व राजनीतिक उथल-पुथल देखी। विश्वविद्यालयों और शहरी केंद्रों से शुरू हुआ जेन-जेड (युवा पीढ़ी) का आंदोलन धीरे-धीरे एक व्यापक राष्ट्रीय विद्रोह में बदल गया। इस आंदोलन की मुख्य मांगें थीं— चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता सत्तावादी शासन का अंत भ्रष्टाचार औ...

Bangladesh General Election 2026: Democratic Reset After the Gen-Z Revolution

बांग्लादेश के आम चुनाव 2026: राजनीतिक पुनर्जन्म और लोकतांत्रिक पुनर्संरचना की ऐतिहासिक घड़ी भूमिका: एक युग का अंत, एक नए अध्याय की शुरुआत 12 फरवरी 2026 को बांग्लादेश ने न केवल अपना 13वां संसदीय आम चुनाव संपन्न किया, बल्कि एक साथ हुए संवैधानिक जनमत संग्रह के माध्यम से अपने राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने का प्रयास भी किया। यह चुनाव सामान्य सत्ता परिवर्तन भर नहीं था, बल्कि अगस्त 2024 की छात्र-नेतृत्व वाली ‘जुलाई क्रांति’ के बाद पहला राष्ट्रीय लोकतांत्रिक परीक्षण था, जिसने देश की सत्ता संरचना को जड़ से हिला दिया। लगभग डेढ़ दशक तक सत्ता में रहीं शेख हसीना के पतन, अवामी लीग की चुनावी अनुपस्थिति और व्यापक संस्थागत सुधारों की पृष्ठभूमि में यह चुनाव बांग्लादेश के इतिहास में एक राजनीतिक पुनर्जन्म के रूप में दर्ज किया जा रहा है। पृष्ठभूमि: ‘जुलाई क्रांति’ और सत्ता संरचना का ध्वंस 2009 से 2024 तक शेख हसीना का शासन राजनीतिक स्थिरता के साथ-साथ बढ़ते अधिनायकवादी रुझानों के लिए भी जाना गया। विपक्ष का दमन, चुनावों की विश्वसनीयता पर प्रश्न, न्यायपालिका और मीडिया पर दबाव तथा अल्पसंख्यकों—विशेषकर ह...

Bangladesh Election 2026: Gen Z Politics, Constitutional Referendum and the Future of Democracy

बांग्लादेश चुनाव 2026: लोकतंत्र की नई दिशा या पुरानी चुनौतियों का नया अध्याय? दक्षिण एशिया की राजनीति में बांग्लादेश एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनाव केवल 300-सदस्यीय जतीय संसद के गठन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उस राजनीतिक प्रयोग की परीक्षा भी हैं, जिसे अंतरिम सरकार ‘दूसरे गणराज्य’ की संज्ञा दे रही है। जुलाई 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद यह पहला बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास है, जिसने 15 वर्षों से सत्ता में रही शेख हसीना की अवामी लीग सरकार का अंत कर दिया था। करीब 12.7 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं की भागीदारी वाला यह चुनाव इसलिए भी असाधारण है क्योंकि इसके साथ ही संवैधानिक जनमत संग्रह (रेफरेंडम) भी कराया जा रहा है, जो बांग्लादेश की शासन-व्यवस्था की संरचना को ही बदल सकता है। यह प्रश्न अब केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि यह तय करने का है कि क्या बांग्लादेश वास्तव में लोकतांत्रिक पुनर्जन्म की ओर बढ़ रहा है या फिर वह पुराने संघर्षों के नए संस्करण से रूबरू होने वाला है। विद्रोह के बाद की राजनीति: एक शून्य और कई दावेदार 2024 का छात्र आंदोलन केव...

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Lifetime Ban on Convicted Politicians: Balancing Democracy, Justice, and the Constitution

 दोषी राजनेताओं पर आजीवन प्रतिबंध का प्रश्न: लोकतंत्र, न्याय और संविधान के मध्य संतुलन की तलाश भारत एक विशाल लोकतांत्रिक देश है, जहाँ विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की त्रयी के बीच सत्ता का संतुलन लोकतंत्र की मूल भावना को जीवित रखता है। इसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पहलू है जनता द्वारा अपने प्रतिनिधियों का चयन। किंतु जब जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि ही किसी आपराधिक मामले में दोषी सिद्ध हो जाते हैं, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या उन्हें भविष्य में चुनाव लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए? हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसमें दोषी सांसदों और विधायकों पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की माँग की गई थी। केंद्र सरकार ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है और वर्तमान में निर्धारित छह वर्षों की अयोग्यता को बढ़ाकर आजीवन प्रतिबंध लगाना “अनुचित रूप से कठोर” होगा। इस मुद्दे पर उठी बहस लोकतंत्र, न्याय और संविधान के बीच संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करती है। 1. पृष्ठभूमि और महत्त्व भारतीय लोकतंत्र विश्व के सबसे बड़े लोकत...

Manipur Crisis & PM Modi’s Visit: Challenges and Prospects of the SoO Agreement | UPSC Analysis

मणिपुर में शांति की संभावनाएं: पीएम मोदी की प्रस्तावित यात्रा और कुकी समूहों के साथ युद्धविराम विस्तार परिचय मणिपुर, भारत का एक सांस्कृतिक और भौगोलिक रूप से विविधतापूर्ण पूर्वोत्तर राज्य, मई 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा के कारण गहरे संकट में है। मेइती और कुकी-जो समुदायों के बीच संघर्ष ने 260 से अधिक लोगों की जान ले ली और 60,000 से अधिक लोगों को विस्थापित कर दिया। इस संकट के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 13 सितंबर 2025 को प्रस्तावित मणिपुर यात्रा और केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा कुकी उग्रवादी समूहों के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते के विस्तार की पहल शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यह लेख मणिपुर संकट के विभिन्न आयामों, केंद्र सरकार की रणनीति, और इस यात्रा के संभावित प्रभावों का विश्लेषण करता है, जो UPSC के दृष्टिकोण से सामाजिक, राजनीतिक, और प्रशासनिक पहलुओं को समझने के लिए प्रासंगिक है। मणिपुर हिंसा की पृष्ठभूमि मणिपुर का संकट सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक असमानताओं का परिणाम है। राज्य में मेइती (इंफाल घाटी में बहुसंख्यक) और कुकी-जो तथा नागा (पहाड़ी क्षेत्रों में) समुदा...

India-US Tariff Dispute : A Comprehensive Analysis

  भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद : एक व्यापक विश्लेषण परिचय भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद 2025 में एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभरा, जिसने दोनों देशों के व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित किया। इस लेख में टैरिफ विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वर्तमान स्थिति, कारण, प्रभाव और संभावित समाधान का व्यापक विश्लेषण किया गया है। यह लेख UPSC, SSC, बैंकिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है। 1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 2018: ट्रंप प्रशासन ने भारत से स्टील और एल्यूमीनियम पर अतिरिक्त शुल्क लगाया। 2019: भारत ने जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी मोटरसाइकिल, बादाम और सेब जैसे उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाया। GSP का हटना: 2019 में अमेरिका ने भारत को सामान्यीकृत प्राथमिकता प्रणाली (GSP) से हटा दिया, जिससे भारत को शुल्क-मुक्त निर्यात का लाभ मिलना बंद हो गया। 2. वर्तमान स्थिति (मार्च 2025) ट्रंप ने दावा किया कि भारत ने टैरिफ कम करने का वादा किया था, लेकिन भारतीय वाणिज्य मंत्रालय ने इसे खारिज कर दिया। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता की, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। दोनों देश 2025 के अंत ...

Graca Machel Wins Indira Gandhi Peace Prize 2025 | Education, Human Rights, Disarmament

ग्रेसा माशेल को इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण एवं विकास पुरस्कार 2025 शांति, मानवता और विकास की वैश्विक प्रतीक को सम्मान परिचय इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण एवं विकास पुरस्कार केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि उस विचारधारा का प्रतीक है जिसमें शांति, सामाजिक न्याय, मानवाधिकार और सतत विकास को वैश्विक राजनीति का केंद्र माना जाता है। इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा स्थापित यह अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार उन व्यक्तियों और संस्थाओं को दिया जाता है जिन्होंने दुनिया को अधिक मानवीय, सुरक्षित और न्यायपूर्ण बनाने में ठोस योगदान दिया हो। 21 जनवरी 2026 को यह घोषणा हुई कि वर्ष 2025 के लिए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मोज़ाम्बिक की प्रसिद्ध समाजसेवी, राजनेता और वैश्विक मानवाधिकार कार्यकर्ता ग्रेसा माशेल को प्रदान किया जाएगा। यह निर्णय न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और सेवा-यात्रा की मान्यता है, बल्कि उन मूल्यों का भी उत्सव है जिनके लिए वे जीवन भर खड़ी रहीं। ग्रेसा माशेल: संघर्ष से सेवा तक की यात्रा ग्रेसा माशेल का जीवन अफ्रीका के सामाजिक-राजनीतिक संघर्षों, उपनिवेशवाद के बाद के पुनर्निर्माण और मानवाधिकारो...

Birthright Citizenship: Changing Global Perspectives and Impacts

यह संपादकीय लेख "बर्थराइट सिटिजनशिप: बदलते वैश्विक परिप्रेक्ष्य और प्रभाव" पर आधारित है। इसमें जन्म आधारित नागरिकता के ऐतिहासिक संदर्भ, विभिन्न देशों द्वारा इसे समाप्त करने की प्रवृत्ति, भारत में इस नीति के बदलाव, पक्ष-विपक्ष में तर्क, संभावित प्रभाव और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई है। लेख में यह विश्लेषण किया गया है कि कैसे बर्थराइट सिटिजनशिप मानवाधिकारों और समावेशन को बढ़ावा देती है, लेकिन साथ ही अवैध प्रवास और राष्ट्रीय संसाधनों पर दबाव डालने जैसे मुद्दे भी उत्पन्न कर सकती है। अंत में, यह निष्कर्ष निकाला गया है कि नागरिकता संबंधी नीतियों में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है ताकि राष्ट्रीय हित और मानवाधिकार दोनों सुरक्षित रह सकें। बर्थराइट सिटिजनशिप: बदलते वैश्विक परिप्रेक्ष्य और प्रभाव भूमिका बर्थराइट सिटिजनशिप (जन्मसिद्ध नागरिकता) वह नीति है जिसके तहत किसी व्यक्ति को उस देश की नागरिकता स्वतः प्राप्त हो जाती है, जहां उसका जन्म हुआ है। यह सिद्धांत वर्षों से कई देशों में लागू था, लेकिन हाल के दशकों में विभिन्न देशों ने इसे समाप्त कर दिया है। बढ़ते प्रवास, जनसंख्या...

Trump’s Gaza Ceasefire Declaration: A New Chapter in Middle East Peace and Power Diplomacy

ट्रम्प की ऐतिहासिक गाजा युद्ध समाप्त की घोषणा: मध्य पूर्व में एक नए युग की शुरुआत व नेतन्याहू के लिए क्षमादान की अपील परिचय मध्य पूर्व, जो दशकों से संघर्ष, अस्थिरता और धार्मिक ध्रुवीकरण का केंद्र रहा है, 13 अक्टूबर 2025 को एक नए अध्याय की ओर बढ़ता दिखाई दिया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजरायल की संसद (नेसेट) में गाजा युद्धविराम समझौते की घोषणा की। यह घोषणा न केवल इजरायल और हमास के बीच दो वर्ष तक चले भीषण संघर्ष का अंत करती है, बल्कि अमेरिकी कूटनीति की एक नई दिशा भी निर्धारित करती है — जहाँ "शक्ति के माध्यम से शांति" (Peace Through Strength) को पुनः परिभाषित किया गया है। ट्रम्प के इस कदम ने वैश्विक समुदाय को यह सोचने पर विवश किया कि क्या यह वाकई मध्य पूर्व में स्थायी शांति की शुरुआत है या केवल सामरिक और चुनावी लाभ का परिणाम। यह लेख उसी घोषणा के भू-राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक आयामों का विश्लेषण करता है। संघर्ष का पृष्ठभूमि 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजरायल पर किए गए हमले ने आधुनिक मध्य पूर्व के इतिहास को झकझोर दिया था। लगभग 1,200 नागरिकों की हत्या और सैक...

Why Uzbekistan Matters to India: 5 Key Takeaways from a Growing Strategic Partnership

सिल्क रोड से आगे: उज़्बेकिस्तान के साथ भारत के मजबूत होते रिश्ते से जुड़ी 5 चौंकाने वाली बातें 1. प्रस्तावना: मध्य एशियाई कूटनीति का नया अध्याय हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज़्बेकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान "दोस्तलिक" (Friendship) ऑर्डर से सम्मानित किया जाना यूरेशियाई कूटनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। यह सम्मान केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि मध्य एशिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश के साथ भारत की गहरी होती साझेदारी की मान्यता है। क्षेत्रीय स्थिरता और रणनीतिक महत्व के कारण उज़्बेकिस्तान भारत की व्यापक महाद्वीपीय महत्वाकांक्षाओं में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए यह भू-आवेष्ठित (Landlocked) देश इतना महत्वपूर्ण क्यों है? सिल्क रोड के ऐतिहासिक आकर्षण से परे, यह संबंध एक सुविचारित और आधुनिक रणनीतिक गठबंधन का प्रतिनिधित्व करता है। भू-राजनीतिक दृष्टि से यह साझेदारी भारत की "कनेक्ट सेंट्रल एशिया नीति" का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो दक्षिण एशिया की समुद्री शक्ति को यूरेशिया के संसाधन-संपन्न हृदयस्थल से जोड़ती है।...

Why Teacher’s Day Needs a Mirror: The Uncomfortable Truth About Modern Education

शिक्षक दिवस को एक दर्पण की आवश्यकता क्यों है: आधुनिक शिक्षा का असुविधाजनक सच प्रस्तावना: उत्सव के पीछे की खामोशी आज शिक्षक दिवस है, फिर भी एक सजग शिक्षक के भीतर कहीं गहरे स्वयं को इस उत्सव से दूर रखने की तीव्र इच्छा जन्म लेती है। शिक्षक की "व्यथित आवाज़" केवल थकान की अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि अंतरात्मा के प्रतिरोध का स्वर है। जब सार्वजनिक मंचों पर मालाएँ, सम्मान और प्रशंसा के भव्य आयोजन हो रहे होते हैं, तब अनेक शिक्षक उनमें शामिल होने का मन नहीं बना पाते। यह मात्र निराशावाद नहीं, बल्कि शिक्षक-व्यवसाय के अस्तित्व का संकट है। हम एक भयावह विरोधाभास के साक्षी हैं। एक ओर मंचों पर "गुरु-वंदना" का सार्वजनिक प्रदर्शन है, दूसरी ओर उन शिक्षकों का निजी मोहभंग है जो जानते हैं कि मंच पर प्रस्तुत आदर्श छवि वास्तव में एक मुखौटा है, जिसके पीछे अनेक अनकही समस्याएँ छिपी हुई हैं। मंच का मृगतृष्णा: धारणा बनाम वास्तविकता शिक्षक दिवस के समारोह सम्मान के जीवंत उत्सव से अधिक एक औपचारिक अनुष्ठान बनते जा रहे हैं। मंच एक ऐसे फिल्टर का काम करता है जो शिक्षक जीवन की वास्तविकताओं को छिपाकर...

India-China Border Talks: Why the Pre-BRICS Meeting Matters | Strategic Analysis

भारत-चीन कूटनीति: ब्रिक्स (BRICS) से पहले सीमा वार्ता क्यों है इतनी महत्वपूर्ण 1. परिचय: शिखर सम्मेलन से पहले की उच्च-जोखिम वाली शांति  राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल का बीजिंग आगमन और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की उल्टी गिनती का एक साथ होना कोई कूटनीतिक इत्तेफाक नहीं है; यह तनाव कम करने की एक सोची-समझी रणनीति है। भले ही आगामी शिखर सम्मेलन राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित उपस्थिति के साथ वैश्विक सुर्खियों में रहेगा, लेकिन बीजिंग में एक "शैडो समिट" (पर्दे के पीछे की बातचीत) पहले से ही जारी है। भारतीय और चीनी वार्ताकारों के बीच यह उच्च स्तरीय बातचीत वैश्विक कैमरों के सामने आने से पहले दुनिया के सबसे अस्थिर द्विपक्षीय संबंधों को संभालने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। 2. "प्री-समिट" रणनीतिक संरेखण  NSA अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी का मिशन स्पष्ट है: वे उस नींव के निर्माता हैं जो शिखर सम्मेलन को द्विपक्षीय तनाव से बचाने का काम करेगी। उच्च-स्तरीय कूटनीति में बहुपक्षीय सफलता के लिए रणनीतिक तैयारी पहली शर्त होती है। बीजिंग में जारी बैठकों का उद्देश्य यह सुनिश्...

भारत का 10 ट्रिलियन डॉलर का सपना: एक वास्तविकता या चुनौती?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में 'विकसित भारत युवा नेता संवाद' के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था को अगले दशक के अंत तक 10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य प्रस्तुत किया। यह लक्ष्य न केवल भारत के आर्थिक विकास की महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है, बल्कि देश की युवा शक्ति, तकनीकी नवाचार और उद्यमशीलता पर सरकार के भरोसे को भी प्रकट करता है। लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या यह लक्ष्य यथार्थवादी है, या सिर्फ एक राजनैतिक आकांक्षा? आर्थिक क्षमता और संभावनाएं भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसकी GDP 2023 में लगभग 3.73 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंची थी। यदि भारत 10 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहता है, तो इसे हर साल औसतन 8-10% की आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखनी होगी। इसके लिए जरूरी है: 1. औद्योगिक विकास: उत्पादन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश और नवाचार की आवश्यकता है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे कार्यक्रम इस दिशा में सहायक हो सकते हैं। 2. डिजिटल अर्थव्यवस्था: भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से बढ़ रहा है। यदि इसे सही...