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Rising Attacks on Hindu Minorities in Bangladesh: Global Silence and Human Rights Concerns

The Silent Genocide: Persecution of Hindus in Bangladesh and the Moral Failure of the Global Community In an age where conflicts in Gaza, Ukraine, and other flashpoints command the world’s attention, a quieter yet deeply disturbing humanitarian crisis continues to unfold next door to India — in Bangladesh. Since the political upheaval and resignation of Prime Minister Sheikh Hasina in August 2024, reports of violence against the Hindu minority have escalated dramatically. Killings, arson attacks, vandalism of temples, forced displacement, economic boycotts, and intimidation have become frighteningly frequent. According to figures cited by Indian authorities, more than 2,200 incidents of violence against Hindus were recorded in 2024 alone , with similar patterns continuing through 2025 and into 2026. Independent reports corroborate these trends: homes torched, idols desecrated, businesses looted, and families compelled to flee ancestral lands. Yet, despite the mounting evidence, the w...

Sudan Crisis 2025: Civil War, Historical Roots, and Humanitarian Tragedy Analyzed

सूडान संकट: ऐतिहासिक जड़ों से मानवीय त्रासदी तक

सूडान, अफ्रीका का तीसरा सबसे बड़ा देश, आज विश्व के सबसे भयावह गृहयुद्धों में से एक से गुजर रहा है। अप्रैल 2023 से भड़की लड़ाई ने न केवल सत्ता संतुलन को तहस-नहस कर दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र को मानवीय त्रासदी के गहरे गर्त में धकेल दिया है। सूडानी सशस्त्र बलों (SAF) और रैपिड सपोर्ट फोर्सेस (RSF) के बीच चला यह संघर्ष अब तक लाखों लोगों की जान ले चुका है और करोड़ों को विस्थापित कर चुका है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे “दुनिया का सबसे गंभीर मानवीय संकट” घोषित किया है। यह संघर्ष अचानक नहीं उठा; इसकी जड़ें सूडान के औपनिवेशिक अतीत, जातीय तनावों और बाहरी हस्तक्षेपों में गहराई से धंसी हुई हैं।

सूडान का औपनिवेशिक इतिहास इसकी मौजूदा समस्याओं की पृष्ठभूमि तैयार करता है। 1899 से 1956 तक ब्रिटिश-मिस्री शासन के दौरान देश को कृत्रिम रूप से उत्तर और दक्षिण में बाँट दिया गया। उत्तर में मुस्लिम-अरब बहुल समाज और दक्षिण में ईसाई व परंपरागत समुदायों का विभाजन, स्वतंत्रता के बाद भी एक गहरे सामाजिक-राजनीतिक तनाव का कारण बना। यही तनाव दो लंबे और खूनी गृहयुद्धों (1955–1972 और 1983–2005) में बदल गया, जिनमें लाखों लोग मारे गए। अंततः 2005 के व्यापक शांति समझौते ने दक्षिण सूडान को स्वायत्तता दी और 2011 में वह अलग राष्ट्र बन गया।

इसी बीच, 1989 में उमर अल-बशीर ने सैन्य तख्तापलट कर सत्ता पर कब्जा कर लिया। बशीर के शासन ने इस्लामीकरण और अरबीकरण की नीतियों से गैर-अरब समुदायों को हाशिये पर धकेल दिया। दारफुर क्षेत्र में 2003 से शुरू हुए विद्रोह को कुचलने के लिए उन्होंने जिस जनजावीद मिलिशिया का इस्तेमाल किया, वही आगे चलकर RSF की नींव बनी। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने दारफुर में हुए अत्याचारों को नरसंहार करार दिया। 2019 में बशीर का पतन हुआ, लेकिन लोकतंत्र की उम्मीदें अल्पजीवी साबित हुईं। सत्ता SAF और RSF के दो गुटों के बीच खिंच गई और अंततः 2023 में यह संघर्ष खुले युद्ध में बदल गया।

आज का सूडान संकट सत्ता संघर्ष, संसाधनों की होड़ और जातीय-धार्मिक विभाजनों का मिश्रण है। SAF पारंपरिक सैन्य प्रतिष्ठान और उत्तरी अरब समुदायों पर आधारित है, जबकि RSF दारफुर और हाशिये के समुदायों से उभरकर राष्ट्रीय राजनीति में अपना हिस्सा चाहती है। सोना, तेल और उपजाऊ कृषि भूमि पर नियंत्रण दोनों पक्षों के लिए निर्णायक प्रश्न है। दशकों की भेदभावपूर्ण नीतियों ने इन दरारों को और चौड़ा कर दिया है।

इस आंतरिक संघर्ष में बाहरी हस्तक्षेप ने आग में घी का काम किया। UAE ने सोना और कृषि संसाधनों के बदले RSF को हथियार और धन उपलब्ध कराया। मिस्र ने SAF को समर्थन दिया ताकि उसकी सीमाएं सुरक्षित रहें। रूस, लीबिया और अन्य ताकतों ने हथियारों की आपूर्ति में भूमिका निभाई। पश्चिमी देशों ने मानवीय सहायता तो दी, लेकिन युद्ध को रोकने के लिए निर्णायक दबाव नहीं बनाया। नतीजा यह हुआ कि संघर्ष लंबा खिंच गया और आम नागरिक सबसे बड़े शिकार बने।

2025 तक स्थिति भयावह हो चुकी है। SAF ने राजधानी खार्तूम पर नियंत्रण कर लिया है, जबकि RSF पश्चिमी और उत्तरी सूडान में मजबूत बनी हुई है। दारफुर में अकाल घोषित हो चुका है और स्वास्थ्य संकट विकराल रूप ले चुका है। कोलेरा के प्रकोप ने हजारों लोगों की जान ले ली है। दो-तिहाई अस्पताल बंद हैं और एक लाख से अधिक बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं। महिलाओं और बच्चों पर यौन हिंसा युद्ध का एक स्थायी हथियार बन चुकी है। लाखों लोग पड़ोसी देशों—चाड, मिस्र और दक्षिण सूडान—में शरण ले रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ रही है।

आर्थिक मोर्चे पर भी सूडान टूट चुका है। कृषि भूमि बंजर पड़ी है, व्यापार मार्ग बंद हैं और हथियारों की तस्करी ने सीमाई देशों को भी असुरक्षित कर दिया है। यह युद्ध केवल सूडान की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी है। वैश्विक स्तर पर लाल सागर और अफ्रीका से जुड़े व्यापार मार्गों पर इसका असर महसूस किया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया इस संकट में बेहद कमजोर रही है। संयुक्त राष्ट्र, अफ्रीकी संघ और क्षेत्रीय संगठनों की वार्ताएं बार-बार विफल हुईं। अमेरिका की मध्यस्थता भी निष्फल रही। हथियारों की आपूर्ति पर कोई ठोस रोक नहीं लगी। गाजा जैसे अन्य संकटों ने सूडान को वैश्विक एजेंडे से लगभग गायब कर दिया है। यह वैश्विक उदासीनता युद्ध को और लंबा और घातक बना रही है।

फिर भी, समाधान की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। सबसे पहले, तत्काल संघर्षविराम और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। हथियारों की आपूर्ति पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और कठोर निगरानी जरूरी है। शांति वार्ता तभी सार्थक होगी जब उसमें सभी जातीय, धार्मिक और राजनीतिक समूहों की भागीदारी हो। मानवीय सहायता का विस्तार, विशेषकर भोजन और स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली, अनिवार्य है। दीर्घकालिक समाधान के लिए सुरक्षा बलों का पुनर्गठन और RSF का पूर्ण विघटन आवश्यक है।

निष्कर्षतः, सूडान का संकट केवल एक देश की विफलता नहीं है, बल्कि वैश्विक समुदाय की सामूहिक असफलता का प्रतिबिंब है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह युद्ध न केवल सूडान को बल्कि पूरे अफ्रीका और वैश्विक स्थिरता को प्रभावित करेगा। इतिहास बताता है कि उपेक्षित युद्ध कभी सीमित नहीं रहते; वे धीरे-धीरे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति की नींव को हिला देते हैं। यही सबक आज सूडान के संकट से सीखने की आवश्यकता है।



महत्वपूर्ण स्रोत

1. UN OHCHR - Sudan War Intensifying with Devastating Consequences (जून 2025): युद्ध की तीव्रता और मानवीय प्रभाव।

2. UN News - Sudan, ‘the Most Devastating Humanitarian and Displacement Crisis’ (फरवरी 2025): विस्थापन और भुखमरी।

3. OCHA - Sudan Humanitarian Needs and Response Plan 2025: सहायता योजना।

4. Human Rights Watch - World Report 2025: Sudan: अकाल और सहायता बाधाएं।

5. ICC - Darfur, Sudan Investigation: नरसंहार और युद्ध अपराध।

6. Wikipedia - Sudanese Civil War (2023–present): ऐतिहासिक और वर्तमान संदर्भ।

7. Washington Post - Advanced Weapons Pour into Sudan (2025): हथियारों की आपूर्ति।

8. Wilson Center - Conflict in Sudan: Map of Regional Actors: बाहरी हस्तक्षेप।

9. UNHCR - Sudan Situation: शरणार्थी डेटा।

10. IRC - Crisis in Sudan: What is Happening (जुलाई 2025): कोलेरा और बच्चों पर प्रभाव।

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