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Polity Point By Arvind Singh PK Rewa

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Abujhmad and North Bastar Declared Naxal-Free: A Historic Milestone in India’s Internal Security Strategy

अबुझमाड़ और उत्तरी बस्तर नक्सल-मुक्त: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में एक उपलब्धि

भूमिका

भारत की आंतरिक सुरक्षा के इतिहास में यह घोषणा एक युगांतरकारी क्षण के रूप में दर्ज की जाएगी कि छत्तीसगढ़ के अबुझमाड़ और उत्तरी बस्तर क्षेत्र अब नक्सल प्रभाव से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा की गई यह घोषणा केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि उन आदिवासी अंचलों के लिए नई सुबह का प्रतीक है जो दशकों तक हिंसा, भय और अलगाव के घेरे में रहे।
साथ ही, हाल में 170 नक्सलियों के सामूहिक आत्मसमर्पण ने यह प्रमाणित कर दिया है कि सरकार की "समर्पण और पुनर्वास" नीति ने नक्सलवाद के जनाधार को कमजोर करने में निर्णायक भूमिका निभाई है।


नक्सलवाद: उत्पत्ति और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

भारत में नक्सलवाद की जड़ें स्वतंत्रता के बाद के ग्रामीण सामाजिक-आर्थिक असमानताओं में निहित हैं।
इस आंदोलन की शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के नक्सलबाड़ी गांव से हुई, जब भूमिहीन किसानों ने जमींदारों और दमनकारी भूमि नीति के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह किया।
इस आंदोलन के नेतृत्व में चारु मजूमदार और कानू सान्याल जैसे नेताओं ने माओ त्से-तुंग की "सशस्त्र क्रांति" की विचारधारा को भारतीय संदर्भ में लागू करने का प्रयास किया।

प्रारंभ में यह आंदोलन सीमित था, लेकिन 1970 और 1980 के दशकों में यह ओडिशा, झारखंड, बिहार, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बहुल राज्यों में फैल गया।
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद की पैठ 1980 के दशक में हुई, जब आंध्र प्रदेश के सीमा क्षेत्रों से माओवादी कार्यकर्ता यहां आए और स्थानीय जनजातीय समुदायों में "भूमि अधिकार" और "शोषण विरोधी" नारों के माध्यम से समर्थन जुटाया।


अबुझमाड़: ‘मुक्त क्षेत्र’ से ‘मुख्यधारा’ तक

अबुझमाड़, नारायणपुर जिले में स्थित लगभग 4,000 वर्ग किलोमीटर का दुर्गम वन क्षेत्र, दशकों तक प्रशासन और विकास से अछूता रहा।
यहां सरकारी सर्वेक्षण तक नहीं हो पाए थे, और इसी भौगोलिक अलगाव का लाभ उठाकर माओवादी संगठन — विशेषकर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओइस्ट) — ने इसे अपना ‘मुक्त क्षेत्र’ (Liberated Zone) घोषित कर दिया।
यहां प्रशिक्षण शिविर, हथियार गोदाम और भूमिगत बैठकें आयोजित की जाती थीं।

1990 के दशक तक बस्तर, दंतेवाड़ा और नारायणपुर माओवादी गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बन चुके थे।
इसी काल में हिंसक घटनाओं की श्रृंखला ने प्रशासन को झकझोर दिया।
2005 में राज्य सरकार ने ‘सलवा जूडुम’ नामक जन-आंदोलन को बढ़ावा दिया, जिसका उद्देश्य नक्सलियों के खिलाफ स्थानीय प्रतिरोध खड़ा करना था।
परंतु यह प्रयोग मानवाधिकार हनन और विस्थापन के आरोपों में घिरा, और 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक घोषित किया।

बस्तर में हुई प्रमुख घटनाएं — जैसे

  • 2010 का दंतेवाड़ा हमला (76 सीआरपीएफ जवान शहीद),
  • और 2013 का दरभा घाटी नरसंहार (25 कांग्रेस नेता मारे गए) —
    नक्सल हिंसा की भयावहता के चरम उदाहरण बने।

सरकार की रणनीतिक दृष्टि में परिवर्तन

नक्सलवाद से निपटने की नीति वर्षों में परिष्कृत होती रही है।
यूपीए सरकार (2004–2014) ने “विकास और सुरक्षा का संतुलन” स्थापित करने के लिए एकीकृत कार्रवाई योजना (IAP) लागू की थी।
लेकिन 2014 के बाद, एनडीए सरकार के नेतृत्व में नीति का स्वरूप निर्णायक रूप से बदला — इसे “समर्पण या समाप्ति” (Surrender or Elimination) के दोहरे दृष्टिकोण के रूप में लागू किया गया।

गृह मंत्रालय ने ‘ऑपरेशन ग्रीन हंट’, ‘ऑपरेशन प्रहार’ जैसे अभियान चलाए, जिनमें आधुनिक तकनीक, ड्रोन निगरानी, संचार उपकरणों और हेलीकॉप्टर सहायता का उपयोग बढ़ाया गया।
अबुझमाड़ और उत्तरी बस्तर में सुरक्षाबलों ने न केवल सड़कें और पुलिस कैंप स्थापित किए, बल्कि स्थानीय जनजातीय समाज के साथ विश्वास बहाली के उपाय भी किए।

विकास योजनाओं — जैसे

  • प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना,
  • आदिवासी रोजगार मिशन,
  • आयुष्मान भारत स्वास्थ्य सेवा,
  • तथा ई-शिक्षा कार्यक्रमों — ने नक्सलियों की “राज्य-विरोधी” विचारधारा को कमजोर किया।

हालिया आत्मसमर्पण और नक्सल-मुक्ति

2025 में गृह मंत्री अमित शाह की यह घोषणा कि “अबुझमाड़ और उत्तरी बस्तर अब नक्सल प्रभाव से पूर्णतः मुक्त हैं,” न केवल प्रतीकात्मक बल्कि रणनीतिक उपलब्धि भी है।
इस घोषणा के साथ 170 नक्सलियों का सामूहिक आत्मसमर्पण, जिसमें वरिष्ठ कमांडर रूपेश और रानीता जैसे नाम शामिल हैं, एक ऐतिहासिक मोड़ है।
इससे पहले महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले में 61 नक्सलियों के आत्मसमर्पण की खबर आई थी, जो इस प्रवृत्ति के व्यापक प्रसार को दर्शाती है।

सरकार की पुनर्वास नीति, जिसमें समर्पण करने वालों को आवास, आर्थिक सहायता और सुरक्षा दी जाती है, ने कई युवाओं को हिंसा का मार्ग छोड़ने के लिए प्रेरित किया है।
यह मॉडल "आतंक के खिलाफ विकास" की नीति का सफल उदाहरण बन चुका है।


वृहद निहितार्थ और आगे की दिशा

यह उपलब्धि केवल सुरक्षा दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक रूपांतरण के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अबुझमाड़ जैसे क्षेत्र, जो दशकों तक प्रशासन से कटे रहे, अब

  • शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि सुधार और पर्यटन के नए अवसरों के लिए खुल रहे हैं।
    हालांकि, विकास की गति तेज होने के साथ पर्यावरणीय संतुलन और आदिवासी अधिकारों की रक्षा को सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।

गृह मंत्रालय का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद का पूर्ण उन्मूलन है।
परंतु यह तभी स्थायी सफलता मानी जाएगी जब स्थानीय समाज को
सामाजिक न्याय, भूमि सुधार और सांस्कृतिक सम्मान के माध्यम से सशक्त बनाया जाएगा।


निष्कर्ष

अबुझमाड़ और उत्तरी बस्तर का नक्सल-मुक्त होना भारत के आंतरिक सुरक्षा इतिहास में एक निर्णायक अध्याय है।
यह सिद्ध करता है कि जब सुरक्षा नीति, विकास रणनीति और जनसहभागिता एक साथ चलें, तो सबसे कठिन संघर्षों को भी सुलझाया जा सकता है।
नक्सलवाद की वैचारिक और सामाजिक जड़ें भले ही पुरानी हों, पर इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने यह संकेत दिया है कि भारत अब अपने सबसे दुर्गम हिस्सों में भी शांति और विकास की रोशनी पहुँचाने में सक्षम है।


📚 स्रोत-संदर्भ (References)

  1. भारत सरकार, गृह मंत्रालय — वार्षिक रिपोर्ट 2024–25, “Left Wing Extremism Division”.
  2. प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), “Statement by Home Minister Amit Shah on Naxal-Free Bastar Region”, अक्टूबर 2025.
  3. The Hindu, “Abujhmad, Once India’s Most Inaccessible Region, Declared Free of Maoist Influence”, 15 अक्टूबर 2025.
  4. Indian Express, “170 Maoists Surrender in Bastar; Shah Calls it a Milestone in Ending Red Terror”, 14 अक्टूबर 2025.
  5. BBC Hindi, “सलवा जूडुम से लेकर अबुझमाड़ तक: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की बदलती तस्वीर”, 2024.
  6. Down To Earth Magazine, “From Jungle Stronghold to Peace Zone: The Transformation of Abujhmad”, जुलाई 2025.
  7. सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, Nandini Sundar & Others vs. State of Chhattisgarh, Judgment, 2011.


🧭 UPSC Mains (GS Paper-3 / Essay) संभावित प्रश्न

1. विश्लेषणात्मक प्रश्न

प्रश्न:
अबुझमाड़ और उत्तरी बस्तर के नक्सल-मुक्त होने की घोषणा भारत की आंतरिक सुरक्षा नीति में किस प्रकार का परिवर्तन दर्शाती है? इसकी स्थायित्व के लिए किन नीतिगत सुधारों की आवश्यकता है?
(250 words)

संकेत:

  • “समर्पण या समाप्ति” नीति
  • विकास और सुरक्षा का संतुलन
  • स्थानीय जनसहभागिता
  • पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों का संतुलन

2. निबंध विषय के रूप में

विषय:
"भारत में नक्सलवाद का अंत: सुरक्षा, विकास और जनसहभागिता की संयुक्त विजय"

या
"अबुझमाड़ से मुख्यधारा तक: भारत की आंतरिक सुरक्षा यात्रा का निर्णायक मोड़"


3. GS Paper-2 (Governance & Policy)

प्रश्न:
नक्सलवाद उन्मूलन में "विकास ही सर्वश्रेष्ठ प्रतिरोध" की अवधारणा को अबुझमाड़ के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
(150 words)


4. GS Paper-3 (Internal Security)

प्रश्न:
भारत में वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism) से निपटने में आधुनिक तकनीक, स्थानीय समुदायों और पुनर्वास नीतियों की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
(250 words)


🧩 UPSC Prelims (Objective / MCQ) संभावित प्रश्न

1. तथ्य-आधारित प्रश्न

प्रश्न:
हाल ही में समाचारों में उल्लेखित “अबुझमाड़” क्षेत्र संबंधित है—
(a) नक्सल प्रभाव वाला घना वन क्षेत्र
(b) भारत-चीन सीमा विवादित क्षेत्र
(c) प्रमुख जैव विविधता आरक्षित क्षेत्र
(d) नर्मदा घाटी का भू-आकृतिक क्षेत्र

उत्तर: (a) नक्सल प्रभाव वाला घना वन क्षेत्र


2. नीति-संबंधी प्रश्न

प्रश्न:
भारत सरकार की “समर्पण या समाप्ति” (Surrender or Elimination) नीति का संबंध है —
(a) आतंकवाद निरोधक अभियानों से
(b) नक्सलवाद उन्मूलन रणनीति से
(c) अवैध खनन नियंत्रण से
(d) सीमा सुरक्षा नीति से

उत्तर: (b) नक्सलवाद उन्मूलन रणनीति से


3. संगठन-संबंधी प्रश्न

प्रश्न:
भारत में वामपंथी उग्रवाद से संबंधित प्रमुख संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओइस्ट) का गठन किस दशक में हुआ था?
(a) 1960 का दशक
(b) 1970 का दशक
(c) 1980 का दशक
(d) 1990 का दशक

उत्तर: (d) 1990 का दशक


4. घटनाक्रम आधारित प्रश्न

प्रश्न:
निम्नलिखित घटनाओं को कालानुक्रम में सही क्रम में लगाइए —

  1. दरभा घाटी हमला
  2. सलवा जूडुम की शुरुआत
  3. दंतेवाड़ा हमला
  4. अबुझमाड़ नक्सल-मुक्त घोषणा

क्रम:
2 → 3 → 1 → 4

सही उत्तर: सलवा जूडुम (2005) → दंतेवाड़ा (2010) → दरभा घाटी (2013) → अबुझमाड़ नक्सल-मुक्त (2025)


5. वैचारिक प्रश्न

प्रश्न:
भारत में नक्सलवाद की वैचारिक प्रेरणा मुख्यतः किस विचारधारा से संबंधित है?
(a) लेनिनवाद
(b) मार्क्सवाद-लेनिनवाद-माओवाद
(c) समाजवाद
(d) अराजकतावाद

उत्तर: (b) मार्क्सवाद-लेनिनवाद-माओवाद




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