Skip to main content

MENU👈

Show more

Polity Point By Arvind Singh PK Rewa

  राजनीति शास्त्र (Polity & Political Science) की तैयारी को बनाएं आसान और सटीक! क्या आप UPSC, State PCS, UGC NET, PGT या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं? सही मार्गदर्शन और बेहतरीन स्टडी मटेरियल के लिए विजिट करें: 🌐 www.politypoint.com Polity Point ही क्यों चुनें? विस्तृत एवं सरल नोट्स: भारतीय संविधान, राजव्यवस्था और राजनीतिक सिद्धांत की आसान भाषा में समझ। परीक्षा-उन्मुख सामग्री: पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) का विश्लेषण और ट्रेंड के अनुसार स्टडी मटेरियल। क्विज़ और टेस्ट सीरीज़: अपनी तैयारी का सही आकलन करने के लिए नियमित अभ्यास प्रश्न। करंट अफेयर्स से जुड़ाव: राजव्यवस्था से जुड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का सटीक कवरेज। 🎯 आज ही अपनी सफलता की नींव रखें! अभ्यास शुरू करने और अपनी तैयारी को अगली स्तर पर ले जाने के लिए अभी वेबसाइट पर जाएँ: 👉 www.politypoint.com (स्मार्ट स्टडी करें, सफलता हासिल करें!)

Sudan Crisis 2025: Relief Camps Attacked, Hundreds Killed in Darfur Violence

 संपादकीय लेख: सूडान संकट – इतिहास से वर्तमान तक एक अंतहीन त्रासदी

Keywords- Sudan crisis, civil war, Darfur, RSF, humanitarian disaster.

सूडान एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है, लेकिन इस बार भी कारण वही है – हिंसा, गृहयुद्ध और मानवाधिकारों का भयावह उल्लंघन। हाल ही में सूडान के दारफुर क्षेत्र में दो राहत शिविरों पर हुए हमले में 300 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जिनमें मानवीय सहायता कर्मी और बच्चे भी शामिल हैं। यह घटना सिर्फ एक युद्ध अपराध नहीं, बल्कि एक देश की निरंतर होती मानवता की पराजय है। लेकिन इस संकट को समझने के लिए हमें सूडान के इतिहास में झांकना होगा, जहां वर्षों से चल रहे संघर्ष की जड़ें छिपी हैं।


इतिहास के गर्भ में सूडान का संकट

सूडान अफ्रीका का एक विशाल देश है, जो 1956 में ब्रिटेन और मिस्र से स्वतंत्र हुआ। स्वतंत्रता के बाद से ही यह देश जातीय, सांस्कृतिक और धार्मिक विविधताओं के कारण टकराव का केंद्र बन गया। उत्तर सूडान, जो मुख्यतः मुस्लिम और अरबी बोलने वाला है, और दक्षिण सूडान, जो अधिकतर ईसाई और आदिवासी समुदायों का है, के बीच द्वंद्व लंबे समय तक चला।

1955 से लेकर 1972 और फिर 1983 से 2005 तक दो भीषण गृहयुद्ध हुए, जिनमें लाखों लोग मारे गए और करोड़ों विस्थापित हुए। इस अंतहीन संघर्ष का ही परिणाम था कि 2011 में दक्षिण सूडान को एक स्वतंत्र राष्ट्र बना दिया गया। लेकिन इससे उत्तर सूडान की अंदरूनी समस्याएं खत्म नहीं हुईं, बल्कि और जटिल हो गईं।


दारफुर संकट: एक मानवीय त्रासदी

2003 में सूडान के दारफुर क्षेत्र में एक अलग संघर्ष शुरू हुआ, जब विद्रोही गुटों ने सरकार पर क्षेत्रीय उपेक्षा का आरोप लगाते हुए हथियार उठा लिए। इसके जवाब में सरकार ने जनजातीय मिलिशिया "जनजवीद" को समर्थन दिया, जिसने बड़े पैमाने पर नरसंहार, बलात्कार और गांवों को जलाने जैसे अपराध किए। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने इसे "नरसंहार" करार दिया।

दारफुर संकट ने लाखों लोगों को शरणार्थी बनने पर मजबूर कर दिया और आज भी यह क्षेत्र अस्थिरता, भूख और हिंसा की गिरफ्त में है।


वर्तमान संकट और RSF की भूमिका

2023 से सूडान में एक और गृहयुद्ध भड़क उठा, इस बार सेना और अर्धसैनिक बल RSF (Rapid Support Forces) के बीच सत्ता संघर्ष के रूप में। RSF की उत्पत्ति उसी जनजवीद से हुई थी, जिसने दारफुर में अत्याचार किए थे। अब वही बल राजधानी खार्तूम से लेकर दूर-दराज़ के राहत शिविरों तक आम नागरिकों पर हमले कर रहा है।

हाल ही में दारफुर में राहत शिविरों पर हुआ हमला इसी संघर्ष का भयावह चेहरा है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, पिछले दो वर्षों में सूडान में 24,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और लाखों विस्थापित हैं।


अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका और विफलता

सूडान संकट अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की एक गहरी विफलता को उजागर करता है। पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया सीमित निंदा और मानवीय सहायता तक सिमटी रही है। अफ्रीकी संघ की मध्यस्थता भी निर्णायक नहीं हो सकी है। जबकि रूस, चीन और कुछ खाड़ी देश सूडान में अपनी रणनीतिक पकड़ बनाए रखने की होड़ में लगे हैं।

जब तक वैश्विक समुदाय इस संघर्ष को सिर्फ ‘अफ्रीकी समस्या’ मानता रहेगा, तब तक सूडान में शांति की संभावना क्षीण बनी रहेगी।


क्या है रास्ता आगे का?

  1. राजनीतिक समाधान की पहल: संघर्षरत पक्षों के बीच स्थायी संघर्षविराम और राजनीतिक संवाद की आवश्यकता है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं निर्णायक भूमिका निभाएं।
  2. मानवीय सहायता की सुरक्षा: राहत शिविरों, अस्पतालों और स्कूलों को युद्ध से अलग रखा जाए और मानवीय संगठनों को सुरक्षा प्रदान की जाए।
  3. युद्ध अपराधों की जांच: ICC जैसे संस्थानों को प्रभावी हस्तक्षेप कर युद्ध अपराधियों के खिलाफ न्याय सुनिश्चित करना होगा।
  4. स्थानीय नागरिक भागीदारी: सूडान की शांति प्रक्रिया में केवल सत्ता पक्षों को नहीं, बल्कि नागरिक समाज, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।

निष्कर्ष

सूडान का संकट सिर्फ एक देश की समस्या नहीं, बल्कि समूची अंतरात्मा को झकझोरने वाली वैश्विक त्रासदी है। इतिहास बार-बार हमें यह सिखाता है कि जब न्याय, मानवाधिकार और संवाद की अनदेखी की जाती है, तब युद्ध, हिंसा और पीड़ा जन्म लेते हैं। सूडान की सड़कों पर बहता खून सिर्फ अफ्रीका का नहीं, वह पूरे मानव समाज की विफलता का प्रतीक है। अब समय आ गया है कि दुनिया जागे — इससे पहले कि सूडान इतिहास में एक और 'भूले-बिसरे नरसंहार' के रूप में दर्ज हो जाए।


नीचे सूडान संकट 2025 पर आधारित कुछ संभावित प्रश्न दिए गए हैं जो UPSC, राज्य PCS, निबंध लेखन, या समसामयिक चर्चा के लिए उपयोगी हो सकते हैं:


UPSC/PCS GS पेपर 2 व 3 हेतु संभावित प्रश्न:

  1. "सूडान संकट 2025" को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकारों के परिप्रेक्ष्य में विश्लेषित कीजिए।
  2. दारफुर क्षेत्र में जारी संघर्ष के ऐतिहासिक और वर्तमान कारणों की विवेचना कीजिए।
  3. अर्धसैनिक बल RSF की भूमिका और सूडान की आंतरिक स्थिरता पर उसके प्रभाव का मूल्यांकन कीजिए।
  4. सूडान संकट में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भूमिका कितनी प्रभावी रही है? विवेचना कीजिए।
  5. सूडान संकट से जुड़े मानवीय संकट के प्रमुख आयाम क्या हैं? भारत सहित वैश्विक समुदाय की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

निबंध लेखन हेतु संभावित विषय:

  1. "जब राहत शिविर भी सुरक्षित नहीं रहें – सूडान संकट में मानवता की हार"
  2. "सत्ता की भूख और जनता का संकट: अफ्रीका के संघर्ष से क्या सीखें?"
  3. "एक राष्ट्र, अनेक संघर्ष – सूडान की कहानी इतिहास से वर्तमान तक"
  4. "संकट केवल भू-राजनीतिक नहीं, मानवीय भी होता है"



Previous & Next Post in Blogger
|
✍️ARVIND SINGH PK REWA

Comments

Advertisement

POPULAR POSTS

Supreme Court Verdict on OBC Creamy Layer: Union of India v. Rohith Nathan Explained

OBC क्रीमी लेयर पर सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय: एक विस्तृत विश्लेषण भारत में सामाजिक न्याय और आरक्षण नीति के इतिहास में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय एक मील का पत्थर माना जा सकता है। मामला 'यूनियन ऑफ इंडिया वर्सेस रोहित नाथन' (Union of India v. Rohith Nathan) से जुड़ा है, जिसने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण के तहत लागू 'क्रीमी लेयर' (Creamy Layer) के सिद्धांतों को स्पष्ट किया और प्रशासनिक त्रुटियों पर विराम लगाया। यह विषय संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-II (GS-II) के अंतर्गत आने वाले विषयों—भारतीय संविधान, सामाजिक न्याय और शासन (Governance) के लिए। 1. मामले की पृष्ठभूमि और विवाद का मूल अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को दिए जाने वाले 27% आरक्षण का लाभ उन व्यक्तियों को नहीं मिलता है जो 'क्रीमी लेयर' के अंतर्गत आते हैं। सरकार द्वारा क्रीमी लेयर की पहचान के लिए आय और पद/स्थिति (Status) से संबंधित विभिन्न मापदंड तय किए गए हैं। वर्तमान में आर्थिक सीमा ₹8 लाख प्रति वर्ष की आय तय क...

Gujarat Becomes Second Indian State to Pass UCC: Key Highlights of the 2026 Act

गुजरात एक समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026: UPSC CSE हेतु संपूर्ण विश्लेषण पाठ्यक्रम संबंध (Syllabus Mapping): GS Paper-2 (शासन व्यवस्था, भारतीय संविधान, सामाजिक न्याय एवं तुलनात्मक राजनीति) 1. चर्चा में क्यों? (Context) हाल ही में गुजरात राज्य समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026 को भारत के राष्ट्रपति की स्वीकृति (अनुच्छेद 201) प्राप्त हो गई है। उत्तराखंड के पश्चात् गुजरात देश का ऐसा दूसरा प्रमुख राज्य बन गया है, जिसने अपने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू की है।  यह कानून राज्य में विवाह, तलाक, संपत्ति का उत्तराधिकार, गोद लेने (Adoption) तथा लिव-इन संबंधों के लिए सभी धर्मों पर लागू होने वाला एक सर्वसमावेशी व एकीकृत कानूनी ढांचा प्रदान करता है। 2. संवैधानिक एवं कानूनी आधार (Constitutional & Legal Framework) समान नागरिक संहिता (UCC) का अर्थ है— नागरिकों की धार्मिक या व्यक्तिगत (Personal) मान्यताओं से परे होकर संपूर्ण भारत के राज्यक्षेत्र में विवाह, तलाक, संपत्ति व उत्तराधिकार संबंधी एक समान नागरिक कानून का होना। अनुच्छेद 44 (DPSP): संविधान के भाग IV में निहित राज्य के नी...

India Election Controversy 2026: Opposition Raises Questions on Voter Lists

चुनावी विवाद, संस्थागत स्वायत्तता और लोकतांत्रिक विश्वास विषय (Syllabus Mapping):  UPSC CSE मुख्य परीक्षा - सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (GS Paper II): भारतीय संविधान, शासन व्यवस्था (Governance), लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका एवं चुनावी सुधार। 1. विषय का परिचय एवं हालिया संदर्भ (Context) भारत में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। 10-12 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में विभिन्न विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग और मतदाता सूची (Electoral Roll) से जुड़ी प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर विरोध मार्च आयोजित किया गया, जिसके बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर चुनावी प्रशासन, मतदाता सूची की शुद्धता और संस्थागत स्वायत्तता जैसे गंभीर मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है। 2. विवाद का मुख्य कारण एवं प्रशासनिक प्रतिक्रिया (Core Issue & Administrative Action) विवाद का मूल कारण: विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण (Voter-Roll Revision) की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं रही है। इससे पात्र...

UPSC Current Affairs in Hindi : 18 April 2025

दैनिक समसामयिकी: 18 अप्रैल 2025 1-भारतीय ज्ञान को वैश्विक मान्यता – भारतीय ग्रंथों की पुनर्प्रतिष्ठा का युग भारत की आत्मा उसकी सनातन सभ्यता में निहित है—एक ऐसी सभ्यता जो केवल भौतिक संरचनाओं से नहीं, बल्कि शाश्वत विचारों, ग्रंथों और सांस्कृतिक मूल्यों से परिपूर्ण है। हाल ही में UNESCO द्वारा श्रीमद्भगवद गीता और भरतमुनि के नाट्यशास्त्र को ‘Memory of the World Register’ में शामिल किया जाना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह निर्णय भारत के प्राचीन ज्ञान को वैश्विक स्वीकृति और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। भारत की सांस्कृतिक पूंजी की वापसी औपनिवेशिक दृष्टिकोण ने लंबे समय तक भारतीय ग्रंथों को उपेक्षित किया या मिथकीय घोषित कर दिया। लेकिन आज वही ग्रंथ, जो सदियों से मानवता का मार्गदर्शन करते आ रहे हैं, मानव सभ्यता की वैश्विक धरोहर के रूप में पुनः प्रतिष्ठित हो रहे हैं। यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति और बौद्धिक परंपरा की वापसी है। गीता: नैतिकता और मानसिक शांति का शाश्वत स्रोत श्रीमद्भगवद गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि एक दार्शनिक ग्रंथ है, जो कर्म , कर्तव्य , धर्म , और आत्मा जैसे...

Extradition of Tahawwur Rana – A Step Forward in India’s Fight Against Terrorism

 तहव्वुर हुसैन राणा का भारत प्रत्यर्पण: 26/11 मुंबई हमलों के लिए न्याय की दिशा में एक कदम 10 अप्रैल, 2025 को, 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के साजिशकर्ताओं में से एक, पाकिस्तानी मूल के कनाडाई-अमेरिकी नागरिक तहव्वुर हुसैन राणा को संयुक्त राज्य अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित कर दिया गया। यह घटना 2008 में हुए उन भयावह आतंकी हमलों के 17 साल बाद हुई है, जिसमें 166 से अधिक लोगों की जान गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। राणा का भारत आगमन एक लंबी कानूनी लड़ाई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का परिणाम है, जो मुंबई हमले के पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राणा की पृष्ठभूमि और भूमिका तहव्वुर हुसैन राणा एक पूर्व पाकिस्तानी सैन्य चिकित्सक था, जो बाद में कनाडा और अमेरिका में व्यवसायी बन गया। उसका नाम तब सुर्खियों में आया जब यह पता चला कि वह डेविड कोलमैन हेडली का करीबी सहयोगी था। हेडली, जो मूल रूप से अमेरिकी-पाकिस्तानी नागरिक था, ने मुंबई हमलों की योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इन हमलों को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) ने अंजाम दिया था। राणा पर आरोप है कि उ...

Global Forest Resources Assessment (GFRA) 2025: India’s Progress, Challenges, and Policy Insights

वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन (GFRA) 2025: भारत के संदर्भ में एक विश्लेषणात्मक लेख परिचय 22 अक्टूबर 2025 को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने इंडोनेशिया के बाली में आयोजित “वैश्विक वन अवलोकन पहल (GFOI)” सम्मेलन के दौरान वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन (Global Forest Resources Assessment - GFRA) 2025 जारी किया। यह FAO की एक प्रतिष्ठित और दीर्घकालिक पहल है, जो पिछले 80 वर्षों से वनों की स्थिति, विस्तार और स्वास्थ्य पर निगरानी रखती आ रही है। यह रिपोर्ट हर पाँच वर्ष में प्रकाशित होती है और इसमें 200 से अधिक देशों के उपग्रह चित्रण, राष्ट्रीय सर्वेक्षणों, और फील्ड डेटा का विश्लेषण शामिल होता है। GFRA 2025 का उद्देश्य वनों की पारिस्थितिक स्थिति, कार्बन भंडारण, जैव-विविधता, और मानव जीवन में उनके योगदान का मूल्यांकन करना है। यह रिपोर्ट न केवल वैश्विक पर्यावरणीय प्रवृत्तियों को रेखांकित करती है, बल्कि देशों के लिए सतत वन प्रबंधन की दिशा में नीति निर्धारण हेतु एक ठोस आधार भी प्रदान करती है। वैश्विक परिदृश्य GFRA 2025 के अनुसार, विश्व के वनों की स्थिति में सुधार और चुनौतियों दोनों ...

Trump's 50% Tariff on India: Economic Impacts and Strategic Responses

ट्रम्प की टैरिफ नीति: भारत के लिए नया आर्थिक संकट या केवल परीक्षा की घड़ी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने वैश्विक व्यापार को नया मोड़ दे दिया है। भारत, जो अमेरिका का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार माना जाता रहा है, अब 50 प्रतिशत टैरिफ की चपेट में फंस गया है। यह कदम न केवल द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करेगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डालेगा। ट्रम्प प्रशासन का तर्क है कि भारत का रूस से सस्ता तेल खरीदना यूक्रेन युद्ध को 'ईंधन' दे रहा है, लेकिन यह दावा कई सवाल खड़े करता है—क्यों केवल भारत को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि चीन जैसे अन्य बड़े आयातक बच गए हैं? यह टैरिफ युद्ध भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के लिए एक कठिन परीक्षा है, जहां एक ओर निर्यात पर संकट मंडरा रहा है, वहीं दूसरी ओर आत्मनिर्भरता की राहें खुल रही हैं। ट्रम्प का यह फैसला अप्रत्याशित नहीं है। अप्रैल 2025 में उन्होंने 'मुक्ति दिवस' घोषित कर वैश्विक आयात पर 10 प्रतिशत बेसलाइन टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में देश-विशेष दरों में बदल दिया ग...

Bypassing Hormuz: India’s Strategic Deep-Sea Oil Pipeline to Secure Gulf Energy Imports

MEIDP Project: क्या है भारत-यूएई की डीप-सी पाइपलाइन योजना, जिससे खत्म होगी होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता? पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव और जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित रखने के लिए एक मास्टरस्ट्रोक योजना पर काम शुरू कर दिया है। भारत और यूएई (UAE) के बीच अरब सागर के नीचे गहरे समुद्र में एक सीधी तेल और गैस पाइपलाइन बिछाने की तैयारी चल रही है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और यूएई के विदेश व्यापार मंत्री थानी बिन अहमद अल जेउदी के बीच हुई बैठक के बाद इस महा-परियोजना को केंद्र सरकार ने अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल कर लिया है। पहले इसे एक निजी प्रोजेक्ट माना जा रहा था, लेकिन अब यह भारत की राष्ट्रीय ऊर्जा रणनीति का मुख्य हिस्सा बन चुका है। परियोजना का नाम और मुख्य विशेषताएं: MEIDP इस महत्वाकांक्षी परियोजना को MEIDP (Middle East to India Deep-Water Pipeline) नाम दिया गया है।   रूट: यह पाइपलाइन यूएई और ओमान के तटों से शुरू होकर अरब सागर के नीचे से गुजरते हुए सीधे भारत में गुजरात और महाराष्ट्र ...

09 April 2025 Current Affairs in Hindi

 UPSC Current Affairs : April 2025 1-"नमामि गंगे" परियोजना की शुरुआत के एक दशक बाद इसकी उपलब्धियों और चुनौतियों की समीक्षा करें। (Review the achievements and challenges of the Namami Gange Project a decade after its launch.) उत्तर का प्रारूप: परिचय: "नमामि गंगे" योजना वर्ष 2014 में प्रारंभ की गई थी। इसका उद्देश्य गंगा नदी को स्वच्छ, अविरल और निर्मल बनाना है। यह भारत सरकार की एक फ्लैगशिप परियोजना है जो पर्यावरण मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय और अन्य निकायों के सहयोग से संचालित होती है। प्रमुख उपलब्धियाँ (Achievements): जल शुद्धिकरण संयंत्रों की स्थापना: अब तक 195 से अधिक STPs (Sewage Treatment Plants) स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से कई कार्यशील हैं। औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन: 1,100 से अधिक प्रदूषक उद्योगों की निगरानी की जा रही है और गंगा में अवैध अपशिष्ट छोड़े जाने की घटनाओं में गिरावट आई है। घाट विकास एवं सौंदर्यीकरण: हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों पर 150+ घाटों का निर्माण/पुनर्निर्माण किया गया है। नदी सतह की सफाई: रिवर स्किमर मशीनों द्व...

DRDO and Indian Army Successfully Conduct Four MRSAM Missile Tests in Odisha

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक और कदम: DRDO व भारतीय सेना द्वारा MRSAM परीक्षण की सफलता हाल ही में DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) और भारतीय सेना ने ओडिशा के समुद्र तटीय क्षेत्र से मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (MRSAM) के चार उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए। यह न केवल देश की सैन्य क्षमताओं को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक ठोस प्रगति भी है। MRSAM प्रणाली की विशेषताएँ: MRSAM, जिसे बाराक-8 के नाम से भी जाना जाता है, भारत-इज़राइल संयुक्त परियोजना का हिस्सा है। यह मिसाइल प्रणाली दुश्मन के विमानों, ड्रोन, हेलीकॉप्टरों और क्रूज़ मिसाइलों को 70-100 किमी तक की दूरी पर नष्ट करने में सक्षम है। एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने की क्षमता। 360 डिग्री कवरेज व हाई रेस्पॉन्स टाइम। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के अनुकूल डिजाइन। रणनीतिक महत्व: यह परीक्षण भारतीय सेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को बढ़ाता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में वायु सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित करता है। भविष्य में स्वदेशी हथियार प्रणालियों ...