Skip to main content

MENU👈

Show more

Polity Point By Arvind Singh PK Rewa

  राजनीति शास्त्र (Polity & Political Science) की तैयारी को बनाएं आसान और सटीक! क्या आप UPSC, State PCS, UGC NET, PGT या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं? सही मार्गदर्शन और बेहतरीन स्टडी मटेरियल के लिए विजिट करें: 🌐 www.politypoint.com Polity Point ही क्यों चुनें? विस्तृत एवं सरल नोट्स: भारतीय संविधान, राजव्यवस्था और राजनीतिक सिद्धांत की आसान भाषा में समझ। परीक्षा-उन्मुख सामग्री: पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) का विश्लेषण और ट्रेंड के अनुसार स्टडी मटेरियल। क्विज़ और टेस्ट सीरीज़: अपनी तैयारी का सही आकलन करने के लिए नियमित अभ्यास प्रश्न। करंट अफेयर्स से जुड़ाव: राजव्यवस्था से जुड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का सटीक कवरेज। 🎯 आज ही अपनी सफलता की नींव रखें! अभ्यास शुरू करने और अपनी तैयारी को अगली स्तर पर ले जाने के लिए अभी वेबसाइट पर जाएँ: 👉 www.politypoint.com (स्मार्ट स्टडी करें, सफलता हासिल करें!)

09 April 2025 Current Affairs in Hindi

 UPSC Current Affairs : April 2025

1-"नमामि गंगे" परियोजना की शुरुआत के एक दशक बाद इसकी उपलब्धियों और चुनौतियों की समीक्षा करें।

(Review the achievements and challenges of the Namami Gange Project a decade after its launch.)


उत्तर का प्रारूप:

परिचय:

"नमामि गंगे" योजना वर्ष 2014 में प्रारंभ की गई थी। इसका उद्देश्य गंगा नदी को स्वच्छ, अविरल और निर्मल बनाना है। यह भारत सरकार की एक फ्लैगशिप परियोजना है जो पर्यावरण मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय और अन्य निकायों के सहयोग से संचालित होती है।


प्रमुख उपलब्धियाँ (Achievements):

  1. जल शुद्धिकरण संयंत्रों की स्थापना:
    अब तक 195 से अधिक STPs (Sewage Treatment Plants) स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से कई कार्यशील हैं।

  2. औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन:
    1,100 से अधिक प्रदूषक उद्योगों की निगरानी की जा रही है और गंगा में अवैध अपशिष्ट छोड़े जाने की घटनाओं में गिरावट आई है।

  3. घाट विकास एवं सौंदर्यीकरण:
    हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों पर 150+ घाटों का निर्माण/पुनर्निर्माण किया गया है।

  4. नदी सतह की सफाई:
    रिवर स्किमर मशीनों द्वारा नदी की सतह से टन के हिसाब से कचरा हटाया गया।

  5. जैव विविधता संरक्षण:
    गंगा डॉल्फिन, कछुए आदि जलजीवों के संरक्षण हेतु विशेष कार्यक्रम चलाए गए हैं।

  6. जनभागीदारी व जागरूकता:
    "गंगा उत्सव", "गंगा रन", "गंगा एंबेसेडर" जैसे अभियानों से लोगों की भागीदारी बढ़ी है।


प्रमुख चुनौतियाँ (Challenges):

  1. सीवेज उपचार संयंत्रों की क्षमता से कम संचालन:
    कई STPs अभी तक पूर्ण क्षमता से नहीं चल रहे हैं या तकनीकी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

  2. ग्रामीण क्षेत्रों में नालीकरण की कमी:
    छोटे शहरों और गांवों में सीवेज नेटवर्क का अभाव अभी भी एक बड़ी बाधा है।

  3. जनसंख्या दबाव और शहरीकरण:
    गंगा किनारे बढ़ती जनसंख्या और शहरी फैलाव से प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।

  4. औद्योगिक अपशिष्ट का अवैध निस्तारण:
    कुछ उद्योग अब भी अपशिष्ट को गुपचुप तरीके से नदी में बहा रहे हैं।

  5. राज्यों के बीच समन्वय की कमी:
    उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक तालमेल की कमी देखी गई है।

  6. फंड का उपयोग और पारदर्शिता:
    परियोजना के लिए आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहीं हो पाया है और निगरानी तंत्र में पारदर्शिता की आवश्यकता है।


निष्कर्ष:

"नमामि गंगे" ने गंगा को पुनर्जीवित करने की दिशा में सकारात्मक पहल की है और कुछ क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति भी हुई है। किंतु दीर्घकालिक सफलता के लिए तकनीकी दक्षता, प्रशासनिक सहयोग, पारदर्शिता और जन भागीदारी को और मजबूत करना होगा। साथ ही, इसे "नदी घाटी प्रबंधन" की व्यापक दृष्टि से भी जोड़ना आवश्यक है।



2-“भारत और फ्रांस के बीच हुई रक्षा डील भारत की समुद्री शक्ति को किस प्रकार सुदृढ़ करती है?” – का विश्लेषणात्मक उत्तर दीजिए। संपादकीय लेख व अन्य संभावित प्रश्न के लिए यहां क्लिक कीजिए👈


उत्तर:

भारत और फ्रांस के बीच हाल ही में हुआ ₹63,000 करोड़ का रक्षा समझौता, जिसमें भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन फाइटर जेट की खरीद की गई है, भारत की समुद्री शक्ति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सौदा भारत की रक्षा नीति, समुद्री रणनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नए आयाम जोड़ता है।


1. समुद्री शक्ति में रणनीतिक बढ़त:

  • राफेल मरीन जेट्स अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं, जो हवा से समुद्र में हमले और बहुस्तरीय निगरानी में सक्षम हैं।
  • इनकी तैनाती से भारतीय नौसेना की ऑफशोर डिटेरेंस (Offshore Deterrence) क्षमता में वृद्धि होगी।

2. विमानवाहक पोत की क्षमता में वृद्धि:

  • इन लड़ाकू विमानों को भारत के स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाएगा।
  • इससे नौसेना की मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा होगा।

3. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में प्रभाव:

  • चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों के बीच यह सौदा भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा।
  • भारत की “सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन (SAGAR)” नीति को बल मिलेगा।

4. फ्रांस के साथ रणनीतिक साझेदारी:

  • यह डील भारत और फ्रांस के बीच मजबूत होते रक्षा संबंधों को दर्शाती है।
  • इससे भारत को दीर्घकालिक तकनीकी सहयोग और ट्रेनिंग समर्थन भी प्राप्त होगा।

5. आत्मनिर्भरता की दिशा में योगदान:

  • डील में संभावित टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और रख-रखाव के स्वदेशीकरण से भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
  • रक्षा उत्पादन में घरेलू कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी।

निष्कर्ष:

यह रक्षा समझौता न केवल नौसेना की युद्ध क्षमता को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि भारत की समुद्री नीति, रणनीतिक संतुलन और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भी प्रभावशाली भूमिका निभाएगा। यह सौदा भारत को एक वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में उभारने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।



3-भारत द्वारा पक्षियों से मानवों में फैलने वाली बीमारियों पर किए जा रहे अध्ययन के आलोक में "वन हेल्थ" दृष्टिकोण की प्रासंगिकता पर चर्चा करें।

(Discuss the relevance of the "One Health" approach in light of India’s study on bird-to-human disease transmission.)


उत्तर का प्रारूप:

परिचय:

हाल ही में भारत सरकार ने सिक्किम, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पक्षियों से मानवों में फैलने वाली बीमारियों (Zoonotic Diseases) पर अध्ययन शुरू किया है। यह कदम "वन हेल्थ" (One Health) दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित करता है, जो मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एकीकृत रूप में देखता है।


वन हेल्थ दृष्टिकोण क्या है?

"वन हेल्थ" एक अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त रणनीति है जो मानती है कि मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पारिस्थितिकीय स्वास्थ्य परस्पर जुड़े हुए हैं। इसका उद्देश्य समन्वित, बहु-क्षेत्रीय और बहु-अनुशासनात्मक प्रयासों के माध्यम से संक्रमणों की रोकथाम और प्रबंधन करना है।


प्रासंगिकता (Relevance) – पक्षीजनित बीमारियों के सन्दर्भ में:

  1. नवीन और पुनः उभरती बीमारियाँ:
    बर्ड फ्लू, एवियन इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारियाँ मानव समाज को महामारी की ओर ढकेल सकती हैं। "वन हेल्थ" दृष्टिकोण इनके शुरुआती पहचान और नियंत्रण में सहायक है।

  2. प्रभावी निगरानी और डेटा साझाकरण:
    पशुपालन, पर्यावरण, और स्वास्थ्य विभागों के बीच सहयोग से संक्रामक रोगों की निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणाली सशक्त बनती है।

  3. रोगों का क्रॉस-स्पीशीज़ ट्रांसमिशन रोकना:
    वन्यजीवों, घरेलू पशुओं और इंसानों के बीच संपर्क बढ़ने से संक्रमण की आशंका बढ़ती है। वन हेल्थ दृष्टिकोण इनसे निपटने के लिए नीति और प्रोटोकॉल विकसित करता है।

  4. प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव:
    पर्यावरणीय असंतुलन से रोगजनक जीवों का प्रसार बढ़ता है। वन हेल्थ में पर्यावरणीय डेटा के माध्यम से इन प्रभावों की बेहतर समझ विकसित की जाती है।

  5. COVID-19 जैसे वैश्विक उदाहरण:
    कोविड महामारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब तक मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एक साथ नहीं देखा जाएगा, महामारी का खतरा बना रहेगा।


भारत की पहलें (भारत में One Health की दिशा में प्रयास):

  • "राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन" (प्रस्तावित)
  • ICAR, ICMR, MoEF और स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच सहयोग
  • राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP)
  • पशु और मानव स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं का एकीकरण

निष्कर्ष:

"वन हेल्थ" दृष्टिकोण आज की वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने का एकमात्र टिकाऊ समाधान है। भारत द्वारा पक्षीजनित रोगों पर किया जा रहा अध्ययन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य की महामारियों की रोकथाम हेतु नीति निर्माण में आधार बन सकता है। इस दृष्टिकोण को राष्ट्रीय नीति, अनुसंधान, शिक्षा और प्रशासन में पूर्णतः एकीकृत करना समय की माँग है।




4-भारत में ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी में वृद्धि के क्या कारण हैं? इस परिवर्तन के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करें।

(What are the reasons behind the increase in rural women's labor force participation in India? Discuss the social and economic impacts of this change.)


परिचय:

2023-24 के आंकड़ों के अनुसार भारत में ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी दर (Labor Force Participation Rate - LFPR) बढ़कर 47.6% हो गई है, जो कि एक उल्लेखनीय सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का संकेत है। पहले यह दर 2017-18 में 24-26% के आसपास थी।


भागीदारी में वृद्धि के कारण (Reasons for Increase):

  1. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA):

    • महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने में इस योजना की बड़ी भूमिका रही है।
  2. स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups - SHGs) का विस्तार:

    • ग्रामीण महिलाओं की वित्तीय और सामाजिक सशक्तिकरण में SHGs ने सक्रिय भूमिका निभाई है।
  3. ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और शिक्षा में सुधार:

    • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कार्य करने की क्षमता बढ़ने से नई नौकरियों तक पहुँच आसान हुई है।
  4. कोविड-19 के बाद प्रवृत्त बदलाव:

    • महामारी के कारण परिवारों की आय में गिरावट आई, जिससे महिलाएँ भी आजीविका में सक्रिय रूप से जुड़ने लगीं।
  5. महिलाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम:

    • सरकार और गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा सिलाई, बुनाई, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी आदि में प्रशिक्षण देने से आत्मनिर्भरता बढ़ी।
  6. उद्यमिता में वृद्धि:

    • महिला किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), छोटे व्यवसायों और ऑनलाइन बिक्री प्लेटफॉर्म से महिलाएँ रोजगारदाता भी बन रही हैं।

सामाजिक प्रभाव (Social Impact):

  1. महिलाओं की सामाजिक स्थिति में सुधार:

    • आय अर्जन से निर्णय-निर्माण में भागीदारी बढ़ी है और पारिवारिक स्तर पर सम्मान भी।
  2. लिंग आधारित पूर्वाग्रहों में कमी:

    • महिलाओं को ‘आश्रित’ न मानकर ‘सहयोगी’ माना जाने लगा है।
  3. लड़कियों की शिक्षा पर सकारात्मक प्रभाव:

    • कामकाजी माताओं के कारण बालिकाओं की शिक्षा को परिवार में अधिक महत्व दिया जा रहा है।
  4. स्वास्थ्य और पोषण में सुधार:

    • आय बढ़ने से परिवार खासकर बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश संभव हुआ है।

आर्थिक प्रभाव (Economic Impact):

  1. ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूती:

    • अधिक कार्यबल के कारण उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि हुई है।
  2. घरेलू आय में सुधार:

    • महिला आय से परिवार की आर्थिक स्थिरता और बचत दर में वृद्धि होती है।
  3. स्थानीय स्तर पर उद्यमिता का विकास:

    • महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों या घरेलू उद्योगों के माध्यम से रोजगार सृजन में सहायक हो रही हैं।
  4. विकास में समावेशिता:

    • महिला श्रम शक्ति की भागीदारी से समावेशी और संतुलित आर्थिक विकास संभव होता है।

निष्कर्ष:

ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी में वृद्धि न केवल एक आर्थिक संकेतक है बल्कि यह सामाजिक बदलाव का भी प्रतीक है। इस प्रवृत्ति को स्थायी बनाए रखने के लिए संरचित श्रम बाजार, सुरक्षित कार्य वातावरण, बाल देखभाल सुविधाएँ और लैंगिक समानता पर आधारित नीतियाँ आवश्यक हैं। इससे भारत को समावेशी विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता मिलेगी।


5-रेसिप्रोकल टैरिफ़ पर विराम: वैश्विक व्यापार को स्थिरता की सांस?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 90 दिनों के लिए रेसिप्रोकल टैरिफ़ को स्थगित करने की घोषणा न केवल वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अचानक आए तूफान को कुछ समय के लिए थामने जैसा है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार राजनीति में रणनीतिक पुनर्विचार की ओर भी संकेत करता है। इस कदम ने न केवल शेयर बाजारों को राहत दी, बल्कि कांग्रेस में राजनीतिक तनाव को भी कुछ हद तक शांत किया।

रेसिप्रोकल टैरिफ़, मूलतः "जैसा व्यवहार वैसा शुल्क" की नीति है, जिसमें अमेरिका उन देशों पर समान या अधिक शुल्क लगाता है जो अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ लगाते हैं। ट्रम्प प्रशासन का यह तर्क रहा है कि अमेरिका लंबे समय से व्यापारिक असंतुलन झेलता आया है, और यह नीति 'फेयर ट्रेड' सुनिश्चित करेगी। परंतु इस नीति की आलोचना भी हुई – इसे संरक्षणवाद की ओर वापसी और वैश्विक आपूर्ति शृंखला के लिए खतरे के रूप में देखा गया।

90 दिनों की यह स्थगन अवधि, विशेष रूप से उस समय आई जब चीन के खिलाफ टैरिफ़ दर 125% कर दी गई, यह स्पष्ट करता है कि अमेरिका चीन के साथ व्यापार युद्ध को तेज करना चाहता है, जबकि अन्य सहयोगी देशों के लिए अपने रुख को कुछ समय के लिए लचीला बना रहा है।

बॉन्ड बाजार में आई अस्थिरता, डॉलर की बढ़ती मजबूती और घरेलू राजनीतिक दबाव इस फैसले के पीछे प्रमुख कारक रहे। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका अपनी टैरिफ नीति में लचीलापन नहीं लाता, तो इससे वैश्विक व्यापार मंदी, मुद्रास्फीति और निवेश प्रवाह में असंतुलन पैदा हो सकता है।

भारत के लिए यह अवसर और चेतावनी दोनों है। एक ओर, अमेरिका-चीन व्यापार तनाव के चलते भारत अपने निर्यात में वृद्धि कर सकता है, वहीं दूसरी ओर, अमेरिका द्वारा 'रेसिप्रोकल' शब्द का उपयोग भारत पर भी समान टैरिफ का दबाव बना सकता है।

निष्कर्षतः, यह टैरिफ विराम अमेरिका के लिए रणनीतिक संतुलन बनाने का प्रयास है, जो वैश्विक व्यापार में विश्वास बहाल करने का मौका देता है। लेकिन स्थायी समाधान के लिए बहुपक्षीय संवाद, WTO जैसी संस्थाओं की पुनर्बहाली और समावेशी आर्थिक दृष्टिकोण की आवश्यकता बनी रहेगी।

9 अप्रैल 2025 UPSC करंट अफेयर्स आधारित क्विज़ दिए गए हैं (Prelims स्तर के संभावित प्रश्न)। 
प्रत्येक टॉपिक से जुड़े 2 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) शामिल हैं।


1. नमामि गंगे परियोजना

Q1. ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

1. यह केवल उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में लागू किया गया है।

2. इसका उद्देश्य गंगा नदी को अविरल, निर्मल और जैवविविधतायुक्त बनाना है।

3. इसमें गंगा डॉल्फिन संरक्षण को भी सम्मिलित किया गया है।

कूट:
A) केवल 2
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 2
D) 1, 2 और 3

उत्तर: B

Q2. निम्न में से कौन-सी एजेंसी नमामि गंगे परियोजना के क्रियान्वयन में शामिल नहीं है?
A) जल शक्ति मंत्रालय
B) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
C) ISRO
D) राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन

उत्तर: C

2. भारत-फ्रांस रक्षा डील

Q3. हाल ही में भारत द्वारा फ्रांस से खरीदे जा रहे राफेल मरीन विमानों को किस भारतीय युद्धपोत पर तैनात किया जाएगा?
A) INS विराट
B) INS विक्रांत
C) INS विक्रमादित्य
D) INS अरिहंत

उत्तर: B

Q4. भारत और फ्रांस के रक्षा सहयोग का क्या प्रमुख उद्देश्य है?
A) हिंद महासागर में चीन की गतिविधियों का संतुलन
B) एंटी-टेररिज्म ऑपरेशन
C) मछली पालन सहयोग
D) UN शांति मिशन

उत्तर: A

3. वन हेल्थ दृष्टिकोण

Q5. ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
A) यह केवल मानव स्वास्थ्य पर केंद्रित रणनीति है।
B) यह मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य के बीच संबंध को मान्यता देता है।
C) इसका उद्देश्य संक्रामक रोगों की रोकथाम हेतु समन्वित प्रयास करना है।
D) यह COVID-19 जैसी महामारियों के रोकथाम में सहायक है।

उत्तर: A

Q6. भारत में वन हेल्थ के क्रियान्वयन हेतु किस संगठन को शामिल नहीं किया गया है?
A) ICMR
B) ICAR
C) NASA
D) पर्यावरण मंत्रालय

उत्तर: C

4. ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी

Q7. ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी में हालिया वृद्धि के लिए कौन-सा/से कारण उत्तरदायी हैं?

1. MGNREGA

2. स्वयं सहायता समूह

3. डिजिटल साक्षरता

4. कृषि सब्सिडी

कूट:
A) केवल 1 और 2
B) केवल 3 और 4
C) 1, 2 और 3
D) सभी सही

उत्तर: C

Q8. ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी बढ़ने से कौन-से प्रभाव देखे गए हैं?
A) परिवार की आय में वृद्धि
B) बालिकाओं की शिक्षा में गिरावट
C) पोषण स्तर में सुधार
D) A और C दोनों

उत्तर: D

5. रेसिप्रोकल टैरिफ

Q9. रेसिप्रोकल टैरिफ नीति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A) व्यापार घाटा बढ़ाना
B) संरक्षणवाद को बढ़ावा देना
C) वैश्विक व्यापार नियमों को सरल बनाना
D) निर्यात को हतोत्साहित करना

उत्तर: B

Q10. अमेरिका द्वारा 90 दिनों का रेसिप्रोकल टैरिफ विराम देने के क्या संभावित वैश्विक प्रभाव हो सकते हैं?
A) वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता
B) शेयर बाजार में अस्थिरता
C) WTO की भूमिका समाप्त
D) वैश्विक निवेश में गिरावट

उत्तर: A

Previous & Next Post in Blogger
|
✍️ARVIND SINGH PK REWA

Comments

Advertisement

POPULAR POSTS

Supreme Court Verdict on OBC Creamy Layer: Union of India v. Rohith Nathan Explained

OBC क्रीमी लेयर पर सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय: एक विस्तृत विश्लेषण भारत में सामाजिक न्याय और आरक्षण नीति के इतिहास में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय एक मील का पत्थर माना जा सकता है। मामला 'यूनियन ऑफ इंडिया वर्सेस रोहित नाथन' (Union of India v. Rohith Nathan) से जुड़ा है, जिसने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण के तहत लागू 'क्रीमी लेयर' (Creamy Layer) के सिद्धांतों को स्पष्ट किया और प्रशासनिक त्रुटियों पर विराम लगाया। यह विषय संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-II (GS-II) के अंतर्गत आने वाले विषयों—भारतीय संविधान, सामाजिक न्याय और शासन (Governance) के लिए। 1. मामले की पृष्ठभूमि और विवाद का मूल अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को दिए जाने वाले 27% आरक्षण का लाभ उन व्यक्तियों को नहीं मिलता है जो 'क्रीमी लेयर' के अंतर्गत आते हैं। सरकार द्वारा क्रीमी लेयर की पहचान के लिए आय और पद/स्थिति (Status) से संबंधित विभिन्न मापदंड तय किए गए हैं। वर्तमान में आर्थिक सीमा ₹8 लाख प्रति वर्ष की आय तय क...

Gujarat Becomes Second Indian State to Pass UCC: Key Highlights of the 2026 Act

गुजरात एक समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026: UPSC CSE हेतु संपूर्ण विश्लेषण पाठ्यक्रम संबंध (Syllabus Mapping): GS Paper-2 (शासन व्यवस्था, भारतीय संविधान, सामाजिक न्याय एवं तुलनात्मक राजनीति) 1. चर्चा में क्यों? (Context) हाल ही में गुजरात राज्य समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026 को भारत के राष्ट्रपति की स्वीकृति (अनुच्छेद 201) प्राप्त हो गई है। उत्तराखंड के पश्चात् गुजरात देश का ऐसा दूसरा प्रमुख राज्य बन गया है, जिसने अपने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू की है।  यह कानून राज्य में विवाह, तलाक, संपत्ति का उत्तराधिकार, गोद लेने (Adoption) तथा लिव-इन संबंधों के लिए सभी धर्मों पर लागू होने वाला एक सर्वसमावेशी व एकीकृत कानूनी ढांचा प्रदान करता है। 2. संवैधानिक एवं कानूनी आधार (Constitutional & Legal Framework) समान नागरिक संहिता (UCC) का अर्थ है— नागरिकों की धार्मिक या व्यक्तिगत (Personal) मान्यताओं से परे होकर संपूर्ण भारत के राज्यक्षेत्र में विवाह, तलाक, संपत्ति व उत्तराधिकार संबंधी एक समान नागरिक कानून का होना। अनुच्छेद 44 (DPSP): संविधान के भाग IV में निहित राज्य के नी...

India Election Controversy 2026: Opposition Raises Questions on Voter Lists

चुनावी विवाद, संस्थागत स्वायत्तता और लोकतांत्रिक विश्वास विषय (Syllabus Mapping):  UPSC CSE मुख्य परीक्षा - सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (GS Paper II): भारतीय संविधान, शासन व्यवस्था (Governance), लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका एवं चुनावी सुधार। 1. विषय का परिचय एवं हालिया संदर्भ (Context) भारत में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। 10-12 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में विभिन्न विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग और मतदाता सूची (Electoral Roll) से जुड़ी प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर विरोध मार्च आयोजित किया गया, जिसके बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर चुनावी प्रशासन, मतदाता सूची की शुद्धता और संस्थागत स्वायत्तता जैसे गंभीर मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है। 2. विवाद का मुख्य कारण एवं प्रशासनिक प्रतिक्रिया (Core Issue & Administrative Action) विवाद का मूल कारण: विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण (Voter-Roll Revision) की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं रही है। इससे पात्र...

UPSC Current Affairs in Hindi : 18 April 2025

दैनिक समसामयिकी: 18 अप्रैल 2025 1-भारतीय ज्ञान को वैश्विक मान्यता – भारतीय ग्रंथों की पुनर्प्रतिष्ठा का युग भारत की आत्मा उसकी सनातन सभ्यता में निहित है—एक ऐसी सभ्यता जो केवल भौतिक संरचनाओं से नहीं, बल्कि शाश्वत विचारों, ग्रंथों और सांस्कृतिक मूल्यों से परिपूर्ण है। हाल ही में UNESCO द्वारा श्रीमद्भगवद गीता और भरतमुनि के नाट्यशास्त्र को ‘Memory of the World Register’ में शामिल किया जाना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह निर्णय भारत के प्राचीन ज्ञान को वैश्विक स्वीकृति और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। भारत की सांस्कृतिक पूंजी की वापसी औपनिवेशिक दृष्टिकोण ने लंबे समय तक भारतीय ग्रंथों को उपेक्षित किया या मिथकीय घोषित कर दिया। लेकिन आज वही ग्रंथ, जो सदियों से मानवता का मार्गदर्शन करते आ रहे हैं, मानव सभ्यता की वैश्विक धरोहर के रूप में पुनः प्रतिष्ठित हो रहे हैं। यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति और बौद्धिक परंपरा की वापसी है। गीता: नैतिकता और मानसिक शांति का शाश्वत स्रोत श्रीमद्भगवद गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि एक दार्शनिक ग्रंथ है, जो कर्म , कर्तव्य , धर्म , और आत्मा जैसे...

Extradition of Tahawwur Rana – A Step Forward in India’s Fight Against Terrorism

 तहव्वुर हुसैन राणा का भारत प्रत्यर्पण: 26/11 मुंबई हमलों के लिए न्याय की दिशा में एक कदम 10 अप्रैल, 2025 को, 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के साजिशकर्ताओं में से एक, पाकिस्तानी मूल के कनाडाई-अमेरिकी नागरिक तहव्वुर हुसैन राणा को संयुक्त राज्य अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित कर दिया गया। यह घटना 2008 में हुए उन भयावह आतंकी हमलों के 17 साल बाद हुई है, जिसमें 166 से अधिक लोगों की जान गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। राणा का भारत आगमन एक लंबी कानूनी लड़ाई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का परिणाम है, जो मुंबई हमले के पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राणा की पृष्ठभूमि और भूमिका तहव्वुर हुसैन राणा एक पूर्व पाकिस्तानी सैन्य चिकित्सक था, जो बाद में कनाडा और अमेरिका में व्यवसायी बन गया। उसका नाम तब सुर्खियों में आया जब यह पता चला कि वह डेविड कोलमैन हेडली का करीबी सहयोगी था। हेडली, जो मूल रूप से अमेरिकी-पाकिस्तानी नागरिक था, ने मुंबई हमलों की योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इन हमलों को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) ने अंजाम दिया था। राणा पर आरोप है कि उ...

Global Forest Resources Assessment (GFRA) 2025: India’s Progress, Challenges, and Policy Insights

वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन (GFRA) 2025: भारत के संदर्भ में एक विश्लेषणात्मक लेख परिचय 22 अक्टूबर 2025 को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने इंडोनेशिया के बाली में आयोजित “वैश्विक वन अवलोकन पहल (GFOI)” सम्मेलन के दौरान वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन (Global Forest Resources Assessment - GFRA) 2025 जारी किया। यह FAO की एक प्रतिष्ठित और दीर्घकालिक पहल है, जो पिछले 80 वर्षों से वनों की स्थिति, विस्तार और स्वास्थ्य पर निगरानी रखती आ रही है। यह रिपोर्ट हर पाँच वर्ष में प्रकाशित होती है और इसमें 200 से अधिक देशों के उपग्रह चित्रण, राष्ट्रीय सर्वेक्षणों, और फील्ड डेटा का विश्लेषण शामिल होता है। GFRA 2025 का उद्देश्य वनों की पारिस्थितिक स्थिति, कार्बन भंडारण, जैव-विविधता, और मानव जीवन में उनके योगदान का मूल्यांकन करना है। यह रिपोर्ट न केवल वैश्विक पर्यावरणीय प्रवृत्तियों को रेखांकित करती है, बल्कि देशों के लिए सतत वन प्रबंधन की दिशा में नीति निर्धारण हेतु एक ठोस आधार भी प्रदान करती है। वैश्विक परिदृश्य GFRA 2025 के अनुसार, विश्व के वनों की स्थिति में सुधार और चुनौतियों दोनों ...

Trump's 50% Tariff on India: Economic Impacts and Strategic Responses

ट्रम्प की टैरिफ नीति: भारत के लिए नया आर्थिक संकट या केवल परीक्षा की घड़ी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने वैश्विक व्यापार को नया मोड़ दे दिया है। भारत, जो अमेरिका का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार माना जाता रहा है, अब 50 प्रतिशत टैरिफ की चपेट में फंस गया है। यह कदम न केवल द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करेगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डालेगा। ट्रम्प प्रशासन का तर्क है कि भारत का रूस से सस्ता तेल खरीदना यूक्रेन युद्ध को 'ईंधन' दे रहा है, लेकिन यह दावा कई सवाल खड़े करता है—क्यों केवल भारत को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि चीन जैसे अन्य बड़े आयातक बच गए हैं? यह टैरिफ युद्ध भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के लिए एक कठिन परीक्षा है, जहां एक ओर निर्यात पर संकट मंडरा रहा है, वहीं दूसरी ओर आत्मनिर्भरता की राहें खुल रही हैं। ट्रम्प का यह फैसला अप्रत्याशित नहीं है। अप्रैल 2025 में उन्होंने 'मुक्ति दिवस' घोषित कर वैश्विक आयात पर 10 प्रतिशत बेसलाइन टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में देश-विशेष दरों में बदल दिया ग...

Bypassing Hormuz: India’s Strategic Deep-Sea Oil Pipeline to Secure Gulf Energy Imports

MEIDP Project: क्या है भारत-यूएई की डीप-सी पाइपलाइन योजना, जिससे खत्म होगी होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता? पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव और जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित रखने के लिए एक मास्टरस्ट्रोक योजना पर काम शुरू कर दिया है। भारत और यूएई (UAE) के बीच अरब सागर के नीचे गहरे समुद्र में एक सीधी तेल और गैस पाइपलाइन बिछाने की तैयारी चल रही है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और यूएई के विदेश व्यापार मंत्री थानी बिन अहमद अल जेउदी के बीच हुई बैठक के बाद इस महा-परियोजना को केंद्र सरकार ने अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल कर लिया है। पहले इसे एक निजी प्रोजेक्ट माना जा रहा था, लेकिन अब यह भारत की राष्ट्रीय ऊर्जा रणनीति का मुख्य हिस्सा बन चुका है। परियोजना का नाम और मुख्य विशेषताएं: MEIDP इस महत्वाकांक्षी परियोजना को MEIDP (Middle East to India Deep-Water Pipeline) नाम दिया गया है।   रूट: यह पाइपलाइन यूएई और ओमान के तटों से शुरू होकर अरब सागर के नीचे से गुजरते हुए सीधे भारत में गुजरात और महाराष्ट्र ...

DRDO and Indian Army Successfully Conduct Four MRSAM Missile Tests in Odisha

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक और कदम: DRDO व भारतीय सेना द्वारा MRSAM परीक्षण की सफलता हाल ही में DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) और भारतीय सेना ने ओडिशा के समुद्र तटीय क्षेत्र से मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (MRSAM) के चार उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए। यह न केवल देश की सैन्य क्षमताओं को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक ठोस प्रगति भी है। MRSAM प्रणाली की विशेषताएँ: MRSAM, जिसे बाराक-8 के नाम से भी जाना जाता है, भारत-इज़राइल संयुक्त परियोजना का हिस्सा है। यह मिसाइल प्रणाली दुश्मन के विमानों, ड्रोन, हेलीकॉप्टरों और क्रूज़ मिसाइलों को 70-100 किमी तक की दूरी पर नष्ट करने में सक्षम है। एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने की क्षमता। 360 डिग्री कवरेज व हाई रेस्पॉन्स टाइम। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के अनुकूल डिजाइन। रणनीतिक महत्व: यह परीक्षण भारतीय सेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को बढ़ाता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में वायु सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित करता है। भविष्य में स्वदेशी हथियार प्रणालियों ...