Skip to main content

MENU👈

Show more

Polity Point By Arvind Singh PK Rewa

  राजनीति शास्त्र (Polity & Political Science) की तैयारी को बनाएं आसान और सटीक! क्या आप UPSC, State PCS, UGC NET, PGT या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं? सही मार्गदर्शन और बेहतरीन स्टडी मटेरियल के लिए विजिट करें: 🌐 www.politypoint.com Polity Point ही क्यों चुनें? विस्तृत एवं सरल नोट्स: भारतीय संविधान, राजव्यवस्था और राजनीतिक सिद्धांत की आसान भाषा में समझ। परीक्षा-उन्मुख सामग्री: पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) का विश्लेषण और ट्रेंड के अनुसार स्टडी मटेरियल। क्विज़ और टेस्ट सीरीज़: अपनी तैयारी का सही आकलन करने के लिए नियमित अभ्यास प्रश्न। करंट अफेयर्स से जुड़ाव: राजव्यवस्था से जुड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का सटीक कवरेज। 🎯 आज ही अपनी सफलता की नींव रखें! अभ्यास शुरू करने और अपनी तैयारी को अगली स्तर पर ले जाने के लिए अभी वेबसाइट पर जाएँ: 👉 www.politypoint.com (स्मार्ट स्टडी करें, सफलता हासिल करें!)

India’s Baby BrahMos: World’s Cheapest Precision Air-Launched Strike Weapon at ₹2.3 Crore

भारत का 'बेबी ब्रह्मोस': ₹2.3 करोड़ में दुनिया का सबसे सस्ता लेकिन सबसे घातक एयर-लॉन्च्ड प्रिसिजन स्ट्राइक हथियार

वैश्विक रक्षा बाजार में जहां महंगे हथियारों की होड़ मची हुई है, भारत ने अपनी आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल कायम की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने पिनाका रॉकेट सिस्टम का एयर-लॉन्च्ड संस्करण विकसित कर लिया है, जिसे 'बेबी ब्रह्मोस' के नाम से जाना जा रहा है। यह न केवल दुनिया का सबसे किफायती प्रिसिजन स्ट्राइक हथियार है, बल्कि अपनी घातक क्षमता से दुश्मनों के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो रहा है। कम लागत में उच्च प्रभाव – यही भारत की इस नवीनतम उपलब्धि का मूल मंत्र है।

पिनाका का विकास: ग्राउंड से स्काई तक की उड़ान

पिनाका की कहानी 1990 के दशक से शुरू होती है, जब DRDO ने भारतीय सेना के लिए एक मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) सिस्टम विकसित किया। शुरू में इसकी रेंज 40 किलोमीटर थी, लेकिन निरंतर उन्नयन से यह अब 120 किलोमीटर तक की गाइडेड रेंज तक पहुंच चुका है। हाल ही में, DRDO ने इसे एयर-लॉन्च्ड रूप में बदल दिया, जो फाइटर जेट्स जैसे Su-30MKI, LCA तेजस और राफेल से लॉन्च किया जा सकता है।

इस नए संस्करण में रॉकेट की लंबाई को घटाकर लगभग 4.8 मीटर किया गया है, ताकि यह विमान के पाइलन पर आसानी से फिट हो सके। ठोस ईंधन पर आधारित यह रॉकेट लॉन्च के साथ ही अपनी पूरी ऊर्जा खर्च कर सुपरसोनिक गति प्राप्त करता है, और फिर एयरोडायनामिक नियंत्रण सतहों की मदद से ग्लाइड करते हुए लक्ष्य तक पहुंचता है। यह मिड-कोर्स सुधार की क्षमता रखता है, जिससे दुश्मन के रडार और एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम्स को चकमा देना आसान हो जाता है।

प्रमुख तकनीकी विशेषताएं:

  • लागत: प्रति यूनिट मात्र ₹2.3 करोड़, जो ब्रह्मोस की ₹35-40 करोड़ की तुलना में बेहद कम है।
  • रेंज और सटीकता: ग्राउंड वर्जन की 120 किमी रेंज से अधिक, एयर-लॉन्च होने से स्टैंड-ऑफ दूरी बढ़ जाती है। INS, GPS और NavIC गाइडेंस से CEP (सर्कुलर एरर प्रोबेबल) न्यूनतम।
  • टारगेट: टैंक समूह, सैनिक टुकड़ियां, एयरबेस, लॉजिस्टिक सेंटर – मुख्यतः टैक्टिकल लक्ष्य।
  • प्लेटफॉर्म अनुकूलता: Su-30MKI पर कई यूनिट्स ले जाने की क्षमता, जिससे सैचुरेशन अटैक संभव।
  • गति: सुपरसोनिक से हाइपरसोनिक स्तर तक, जो इसे अप्रत्याशित बनाती है।

'बेबी ब्रह्मोस' नाम की वजह: एक तुलनात्मक विश्लेषण

ब्रह्मोस, जो भारत-रूस की संयुक्त परियोजना है, एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जो Mach 3 की गति से निचली ऊंचाई पर उड़कर बड़े स्ट्रैटेजिक लक्ष्यों जैसे युद्धपोतों या बंकरों को नष्ट करती है। इसकी लागत अधिक होने के कारण यह चुनिंदा ऑपरेशन्स के लिए उपयुक्त है। वहीं, एयर-लॉन्च्ड पिनाका एक गाइडेड रॉकेट है, जो छोटे-मध्यम लक्ष्यों पर तेज, सस्ते और बड़े पैमाने पर हमलों के लिए डिजाइन किया गया।

यह 'बेबी ब्रह्मोस' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह ब्रह्मोस की तरह घातक है, लेकिन छोटा, सस्ता और अधिक लचीला। जहां ब्रह्मोस एक स्नाइपर की तरह सटीक लेकिन महंगा है, वहीं बेबी ब्रह्मोस एक शॉटगन की तरह बड़े क्षेत्र को कवर करता है। दोनों मिलकर भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता को बहु-आयामी बनाते हैं।

वैश्विक तुलना: अमेरिका से 10 गुना सस्ता, फ्रांस की पहली पसंद

अमेरिका का HIMARS सिस्टम प्रति यूनिट लगभग ₹20 करोड़ का पड़ता है, जबकि भारत का यह संस्करण 10 गुना सस्ता है। फ्रांस का M270 सिस्टम 2027 में रिटायर होने वाला है, और रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्रांस अब पिनाका को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 114 राफेल जेट्स की बड़ी डील के साथ या उसके हिस्से के रूप में यह सिस्टम खरीदने की चर्चा है, जो भारत के रक्षा निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

यह चुनाव फ्रांस जैसे उन्नत देश द्वारा भारतीय तकनीक का चयन है, जो DRDO की विश्वसनीयता को रेखांकित करता है।

सामरिक महत्व: सीमाओं पर नई ताकत

  • वायुसेना की बढ़ती शक्ति: Su-30MKI जैसे जेट्स अब रॉकेट आर्टिलरी के रूप में काम करेंगे, पायलट्स को दुश्मन क्षेत्र में प्रवेश किए बिना दूर से हमला करने की सुविधा देंगे।
  • सैचुरेशन और ओवरलोड: एक विमान से कई रॉकेट दागकर दुश्मन की एयर डिफेंस को संतृप्त किया जा सकता है, जिससे बचाव मुश्किल हो जाता है।
  • चीन और पाकिस्तान के लिए चुनौती: ऑपरेशन जैसे बालाकोट या सिंदूर में यह ब्रह्मोस के साथ मिलकर छोटे लक्ष्यों को भी प्रभावी ढंग से नष्ट कर सकता है।
  • निर्यात संभावनाएं: आर्मेनिया को पहले ही पिनाका निर्यात किया जा चुका है, और अब फ्रांस, दक्षिण-पूर्व एशिया तथा अन्य देश रुचि दिखा रहे हैं।

पिनाका परिवार का भविष्य: Pinaka IV और उससे आगे

DRDO अब Pinaka IV पर काम कर रहा है, जिसकी रेंज 300 किलोमीटर से अधिक होगी। इसका एयर-लॉन्च्ड संस्करण और भी घातक साबित होगा, साथ ही BrahMos-NG (हल्का संस्करण) अलग से विकसित हो रहा है। 2030 तक ये सिस्टम्स उत्पादन में आने की उम्मीद है, जो भारत की मल्टी-लेयर स्ट्राइक क्षमता को वैश्विक स्तर पर बेमिसाल बनाएंगे।

निष्कर्ष: आत्मनिर्भर भारत की जीत

'बेबी ब्रह्मोस' महज एक हथियार नहीं, बल्कि भारत की उस सोच का प्रतीक है जो कहती है – हम आयात पर निर्भर नहीं, बल्कि स्वदेशी नवाचार से दुनिया को चुनौती देंगे। DRDO, भारतीय वायुसेना और रक्षा मंत्रालय की यह उपलब्धि 'कम लागत, अधिक प्रभाव' की नीति को साकार करती है। जब फ्रांस जैसे देश हमसे हथियार मांग रहे हैं, तो भारत रक्षा क्षेत्र में 'विश्व गुरु' बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।

जय हिंद! 🇮🇳🚀

Comments

Advertisement

POPULAR POSTS

Supreme Court Verdict on OBC Creamy Layer: Union of India v. Rohith Nathan Explained

OBC क्रीमी लेयर पर सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय: एक विस्तृत विश्लेषण भारत में सामाजिक न्याय और आरक्षण नीति के इतिहास में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय एक मील का पत्थर माना जा सकता है। मामला 'यूनियन ऑफ इंडिया वर्सेस रोहित नाथन' (Union of India v. Rohith Nathan) से जुड़ा है, जिसने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण के तहत लागू 'क्रीमी लेयर' (Creamy Layer) के सिद्धांतों को स्पष्ट किया और प्रशासनिक त्रुटियों पर विराम लगाया। यह विषय संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-II (GS-II) के अंतर्गत आने वाले विषयों—भारतीय संविधान, सामाजिक न्याय और शासन (Governance) के लिए। 1. मामले की पृष्ठभूमि और विवाद का मूल अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को दिए जाने वाले 27% आरक्षण का लाभ उन व्यक्तियों को नहीं मिलता है जो 'क्रीमी लेयर' के अंतर्गत आते हैं। सरकार द्वारा क्रीमी लेयर की पहचान के लिए आय और पद/स्थिति (Status) से संबंधित विभिन्न मापदंड तय किए गए हैं। वर्तमान में आर्थिक सीमा ₹8 लाख प्रति वर्ष की आय तय क...

Gujarat Becomes Second Indian State to Pass UCC: Key Highlights of the 2026 Act

गुजरात एक समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026: UPSC CSE हेतु संपूर्ण विश्लेषण पाठ्यक्रम संबंध (Syllabus Mapping): GS Paper-2 (शासन व्यवस्था, भारतीय संविधान, सामाजिक न्याय एवं तुलनात्मक राजनीति) 1. चर्चा में क्यों? (Context) हाल ही में गुजरात राज्य समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026 को भारत के राष्ट्रपति की स्वीकृति (अनुच्छेद 201) प्राप्त हो गई है। उत्तराखंड के पश्चात् गुजरात देश का ऐसा दूसरा प्रमुख राज्य बन गया है, जिसने अपने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू की है।  यह कानून राज्य में विवाह, तलाक, संपत्ति का उत्तराधिकार, गोद लेने (Adoption) तथा लिव-इन संबंधों के लिए सभी धर्मों पर लागू होने वाला एक सर्वसमावेशी व एकीकृत कानूनी ढांचा प्रदान करता है। 2. संवैधानिक एवं कानूनी आधार (Constitutional & Legal Framework) समान नागरिक संहिता (UCC) का अर्थ है— नागरिकों की धार्मिक या व्यक्तिगत (Personal) मान्यताओं से परे होकर संपूर्ण भारत के राज्यक्षेत्र में विवाह, तलाक, संपत्ति व उत्तराधिकार संबंधी एक समान नागरिक कानून का होना। अनुच्छेद 44 (DPSP): संविधान के भाग IV में निहित राज्य के नी...

India Election Controversy 2026: Opposition Raises Questions on Voter Lists

चुनावी विवाद, संस्थागत स्वायत्तता और लोकतांत्रिक विश्वास विषय (Syllabus Mapping):  UPSC CSE मुख्य परीक्षा - सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (GS Paper II): भारतीय संविधान, शासन व्यवस्था (Governance), लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका एवं चुनावी सुधार। 1. विषय का परिचय एवं हालिया संदर्भ (Context) भारत में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। 10-12 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में विभिन्न विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग और मतदाता सूची (Electoral Roll) से जुड़ी प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर विरोध मार्च आयोजित किया गया, जिसके बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर चुनावी प्रशासन, मतदाता सूची की शुद्धता और संस्थागत स्वायत्तता जैसे गंभीर मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है। 2. विवाद का मुख्य कारण एवं प्रशासनिक प्रतिक्रिया (Core Issue & Administrative Action) विवाद का मूल कारण: विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण (Voter-Roll Revision) की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं रही है। इससे पात्र...

UPSC Current Affairs in Hindi : 18 April 2025

दैनिक समसामयिकी: 18 अप्रैल 2025 1-भारतीय ज्ञान को वैश्विक मान्यता – भारतीय ग्रंथों की पुनर्प्रतिष्ठा का युग भारत की आत्मा उसकी सनातन सभ्यता में निहित है—एक ऐसी सभ्यता जो केवल भौतिक संरचनाओं से नहीं, बल्कि शाश्वत विचारों, ग्रंथों और सांस्कृतिक मूल्यों से परिपूर्ण है। हाल ही में UNESCO द्वारा श्रीमद्भगवद गीता और भरतमुनि के नाट्यशास्त्र को ‘Memory of the World Register’ में शामिल किया जाना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह निर्णय भारत के प्राचीन ज्ञान को वैश्विक स्वीकृति और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। भारत की सांस्कृतिक पूंजी की वापसी औपनिवेशिक दृष्टिकोण ने लंबे समय तक भारतीय ग्रंथों को उपेक्षित किया या मिथकीय घोषित कर दिया। लेकिन आज वही ग्रंथ, जो सदियों से मानवता का मार्गदर्शन करते आ रहे हैं, मानव सभ्यता की वैश्विक धरोहर के रूप में पुनः प्रतिष्ठित हो रहे हैं। यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति और बौद्धिक परंपरा की वापसी है। गीता: नैतिकता और मानसिक शांति का शाश्वत स्रोत श्रीमद्भगवद गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि एक दार्शनिक ग्रंथ है, जो कर्म , कर्तव्य , धर्म , और आत्मा जैसे...

Extradition of Tahawwur Rana – A Step Forward in India’s Fight Against Terrorism

 तहव्वुर हुसैन राणा का भारत प्रत्यर्पण: 26/11 मुंबई हमलों के लिए न्याय की दिशा में एक कदम 10 अप्रैल, 2025 को, 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के साजिशकर्ताओं में से एक, पाकिस्तानी मूल के कनाडाई-अमेरिकी नागरिक तहव्वुर हुसैन राणा को संयुक्त राज्य अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित कर दिया गया। यह घटना 2008 में हुए उन भयावह आतंकी हमलों के 17 साल बाद हुई है, जिसमें 166 से अधिक लोगों की जान गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। राणा का भारत आगमन एक लंबी कानूनी लड़ाई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का परिणाम है, जो मुंबई हमले के पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राणा की पृष्ठभूमि और भूमिका तहव्वुर हुसैन राणा एक पूर्व पाकिस्तानी सैन्य चिकित्सक था, जो बाद में कनाडा और अमेरिका में व्यवसायी बन गया। उसका नाम तब सुर्खियों में आया जब यह पता चला कि वह डेविड कोलमैन हेडली का करीबी सहयोगी था। हेडली, जो मूल रूप से अमेरिकी-पाकिस्तानी नागरिक था, ने मुंबई हमलों की योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इन हमलों को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) ने अंजाम दिया था। राणा पर आरोप है कि उ...

Global Forest Resources Assessment (GFRA) 2025: India’s Progress, Challenges, and Policy Insights

वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन (GFRA) 2025: भारत के संदर्भ में एक विश्लेषणात्मक लेख परिचय 22 अक्टूबर 2025 को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने इंडोनेशिया के बाली में आयोजित “वैश्विक वन अवलोकन पहल (GFOI)” सम्मेलन के दौरान वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन (Global Forest Resources Assessment - GFRA) 2025 जारी किया। यह FAO की एक प्रतिष्ठित और दीर्घकालिक पहल है, जो पिछले 80 वर्षों से वनों की स्थिति, विस्तार और स्वास्थ्य पर निगरानी रखती आ रही है। यह रिपोर्ट हर पाँच वर्ष में प्रकाशित होती है और इसमें 200 से अधिक देशों के उपग्रह चित्रण, राष्ट्रीय सर्वेक्षणों, और फील्ड डेटा का विश्लेषण शामिल होता है। GFRA 2025 का उद्देश्य वनों की पारिस्थितिक स्थिति, कार्बन भंडारण, जैव-विविधता, और मानव जीवन में उनके योगदान का मूल्यांकन करना है। यह रिपोर्ट न केवल वैश्विक पर्यावरणीय प्रवृत्तियों को रेखांकित करती है, बल्कि देशों के लिए सतत वन प्रबंधन की दिशा में नीति निर्धारण हेतु एक ठोस आधार भी प्रदान करती है। वैश्विक परिदृश्य GFRA 2025 के अनुसार, विश्व के वनों की स्थिति में सुधार और चुनौतियों दोनों ...

Trump's 50% Tariff on India: Economic Impacts and Strategic Responses

ट्रम्प की टैरिफ नीति: भारत के लिए नया आर्थिक संकट या केवल परीक्षा की घड़ी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने वैश्विक व्यापार को नया मोड़ दे दिया है। भारत, जो अमेरिका का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार माना जाता रहा है, अब 50 प्रतिशत टैरिफ की चपेट में फंस गया है। यह कदम न केवल द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करेगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डालेगा। ट्रम्प प्रशासन का तर्क है कि भारत का रूस से सस्ता तेल खरीदना यूक्रेन युद्ध को 'ईंधन' दे रहा है, लेकिन यह दावा कई सवाल खड़े करता है—क्यों केवल भारत को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि चीन जैसे अन्य बड़े आयातक बच गए हैं? यह टैरिफ युद्ध भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के लिए एक कठिन परीक्षा है, जहां एक ओर निर्यात पर संकट मंडरा रहा है, वहीं दूसरी ओर आत्मनिर्भरता की राहें खुल रही हैं। ट्रम्प का यह फैसला अप्रत्याशित नहीं है। अप्रैल 2025 में उन्होंने 'मुक्ति दिवस' घोषित कर वैश्विक आयात पर 10 प्रतिशत बेसलाइन टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में देश-विशेष दरों में बदल दिया ग...

Bypassing Hormuz: India’s Strategic Deep-Sea Oil Pipeline to Secure Gulf Energy Imports

MEIDP Project: क्या है भारत-यूएई की डीप-सी पाइपलाइन योजना, जिससे खत्म होगी होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता? पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव और जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित रखने के लिए एक मास्टरस्ट्रोक योजना पर काम शुरू कर दिया है। भारत और यूएई (UAE) के बीच अरब सागर के नीचे गहरे समुद्र में एक सीधी तेल और गैस पाइपलाइन बिछाने की तैयारी चल रही है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और यूएई के विदेश व्यापार मंत्री थानी बिन अहमद अल जेउदी के बीच हुई बैठक के बाद इस महा-परियोजना को केंद्र सरकार ने अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल कर लिया है। पहले इसे एक निजी प्रोजेक्ट माना जा रहा था, लेकिन अब यह भारत की राष्ट्रीय ऊर्जा रणनीति का मुख्य हिस्सा बन चुका है। परियोजना का नाम और मुख्य विशेषताएं: MEIDP इस महत्वाकांक्षी परियोजना को MEIDP (Middle East to India Deep-Water Pipeline) नाम दिया गया है।   रूट: यह पाइपलाइन यूएई और ओमान के तटों से शुरू होकर अरब सागर के नीचे से गुजरते हुए सीधे भारत में गुजरात और महाराष्ट्र ...

09 April 2025 Current Affairs in Hindi

 UPSC Current Affairs : April 2025 1-"नमामि गंगे" परियोजना की शुरुआत के एक दशक बाद इसकी उपलब्धियों और चुनौतियों की समीक्षा करें। (Review the achievements and challenges of the Namami Gange Project a decade after its launch.) उत्तर का प्रारूप: परिचय: "नमामि गंगे" योजना वर्ष 2014 में प्रारंभ की गई थी। इसका उद्देश्य गंगा नदी को स्वच्छ, अविरल और निर्मल बनाना है। यह भारत सरकार की एक फ्लैगशिप परियोजना है जो पर्यावरण मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय और अन्य निकायों के सहयोग से संचालित होती है। प्रमुख उपलब्धियाँ (Achievements): जल शुद्धिकरण संयंत्रों की स्थापना: अब तक 195 से अधिक STPs (Sewage Treatment Plants) स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से कई कार्यशील हैं। औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन: 1,100 से अधिक प्रदूषक उद्योगों की निगरानी की जा रही है और गंगा में अवैध अपशिष्ट छोड़े जाने की घटनाओं में गिरावट आई है। घाट विकास एवं सौंदर्यीकरण: हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों पर 150+ घाटों का निर्माण/पुनर्निर्माण किया गया है। नदी सतह की सफाई: रिवर स्किमर मशीनों द्व...

DRDO and Indian Army Successfully Conduct Four MRSAM Missile Tests in Odisha

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक और कदम: DRDO व भारतीय सेना द्वारा MRSAM परीक्षण की सफलता हाल ही में DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) और भारतीय सेना ने ओडिशा के समुद्र तटीय क्षेत्र से मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (MRSAM) के चार उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए। यह न केवल देश की सैन्य क्षमताओं को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक ठोस प्रगति भी है। MRSAM प्रणाली की विशेषताएँ: MRSAM, जिसे बाराक-8 के नाम से भी जाना जाता है, भारत-इज़राइल संयुक्त परियोजना का हिस्सा है। यह मिसाइल प्रणाली दुश्मन के विमानों, ड्रोन, हेलीकॉप्टरों और क्रूज़ मिसाइलों को 70-100 किमी तक की दूरी पर नष्ट करने में सक्षम है। एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने की क्षमता। 360 डिग्री कवरेज व हाई रेस्पॉन्स टाइम। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के अनुकूल डिजाइन। रणनीतिक महत्व: यह परीक्षण भारतीय सेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को बढ़ाता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में वायु सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित करता है। भविष्य में स्वदेशी हथियार प्रणालियों ...