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Rising Attacks on Hindu Minorities in Bangladesh: Global Silence and Human Rights Concerns

The Silent Genocide: Persecution of Hindus in Bangladesh and the Moral Failure of the Global Community In an age where conflicts in Gaza, Ukraine, and other flashpoints command the world’s attention, a quieter yet deeply disturbing humanitarian crisis continues to unfold next door to India — in Bangladesh. Since the political upheaval and resignation of Prime Minister Sheikh Hasina in August 2024, reports of violence against the Hindu minority have escalated dramatically. Killings, arson attacks, vandalism of temples, forced displacement, economic boycotts, and intimidation have become frighteningly frequent. According to figures cited by Indian authorities, more than 2,200 incidents of violence against Hindus were recorded in 2024 alone , with similar patterns continuing through 2025 and into 2026. Independent reports corroborate these trends: homes torched, idols desecrated, businesses looted, and families compelled to flee ancestral lands. Yet, despite the mounting evidence, the w...

New Income Tax Bill 2025: A Step Towards Simplified Taxation

इस संपादकीय लेख में "आयकर विधेयक, 2025" की प्रमुख विशेषताओं, इसके लाभों, चुनौतियों और संभावित प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की गई है। यह विधेयक भारत की कर प्रणाली को सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लेख में करदाताओं के लिए नई कर संरचना, कर विवाद समाधान तंत्र, डिजिटल कराधान, और सरकार की संभावित रणनीतियों का विश्लेषण किया गया है। साथ ही, इसमें इस विधेयक के सफल क्रियान्वयन के लिए सुझाव भी दिए गए हैं, जिससे यह देश की अर्थव्यवस्था और कर अनुपालन प्रणाली को मजबूत कर सके।

"New Income Tax Bill 2025

नए आयकर विधेयक 2025: कर सुधारों की नई दिशा

भारत सरकार द्वारा हाल ही में प्रस्तुत "आयकर विधेयक, 2025" देश की कर प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह विधेयक 1961 के आयकर अधिनियम को प्रतिस्थापित करने की योजना के तहत पेश किया गया है। करदाताओं के लिए इसे अधिक सुगम और समझने योग्य बनाने के लिए कई संशोधन किए गए हैं। यह विधेयक किसी नए कर का प्रावधान नहीं करता, बल्कि मौजूदा कर ढांचे को पुनर्संगठित और अद्यतन करने का प्रयास करता है। इस लेख में, हम नए विधेयक की प्रमुख विशेषताओं, इसकी संभावित प्रभावशीलता, चुनौतियों और इससे उत्पन्न होने वाले अवसरों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

वर्तमान कर प्रणाली की चुनौतियाँ और नए विधेयक की पृष्ठभूमि

भारत की वर्तमान कर प्रणाली आयकर अधिनियम, 1961 पर आधारित है, जो दशकों से विभिन्न संशोधनों और व्याख्याओं से जटिल हो गई है। इसमें 400 से अधिक धाराएँ और 14 अनुसूचियाँ हैं, जो करदाताओं और विशेषज्ञों के लिए इसे जटिल बनाती हैं।

समय के साथ कराधान में तकनीकी परिवर्तन, डिजिटल लेनदेन में वृद्धि, और वैश्विक कर नीतियों के अनुरूप संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई। इसके अलावा, कई कर प्रावधान अस्पष्टता और विवादों को जन्म देते रहे हैं। वर्ष 2020 में सरकार द्वारा प्रत्यक्ष कर संहिता (DTC) की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की गई थी, जिसने कर प्रणाली को अधिक सरल, आधुनिक और पारदर्शी बनाने की सिफारिश की। इसी आधार पर आयकर विधेयक, 2025 को तैयार किया गया है।

नए विधेयक की प्रमुख विशेषताएँ

1. सरल भाषा और संरचना

नए विधेयक को स्पष्ट, संक्षिप्त और बोधगम्य भाषा में प्रस्तुत किया गया है। इसमें:

536 धाराएँ

23 अध्याय

16 अनुसूचियाँ

शामिल हैं, जो 622 पृष्ठों में विस्तृत हैं। यह पुराने आयकर अधिनियम की तुलना में कम जटिल और अधिक समझने योग्य है।

2. कर प्रणाली की आधुनिक परिभाषाएँ

विधेयक में कई तकनीकी शब्दों को सरल बनाया गया है। उदाहरण के लिए:

"आकलन वर्ष" की जगह "टैक्स वर्ष" शब्द प्रयोग किया गया है।

"ग्रोस टोटल इनकम" की जगह "कुल आय" शब्द रखा गया है।

कर दरों और स्लैब को स्पष्टता के साथ परिभाषित किया गया है।

3. कर स्लैब और कर दरें

इस विधेयक में कोई नया कर नहीं जोड़ा गया है, लेकिन पुरानी और नई कर व्यवस्थाओं को स्पष्ट किया गया है।

4. स्रोत पर कर कटौती (TDS) का सरलीकरण

वर्तमान में TDS की कई अलग-अलग धाराएँ हैं, जो करदाताओं के लिए जटिल हैं।

नए विधेयक में TDS से जुड़े सभी नियमों को एक तालिका में शामिल किया गया है, जिससे अनुपालन करना आसान होगा।

5. कर विवादों को कम करने की पहल

भारत में कर संबंधी मुकदमेबाजी एक गंभीर समस्या रही है। नए विधेयक में:

विवाद समाधान तंत्र को अधिक प्रभावी बनाया गया है।

करदाताओं को तेजी से न्यायिक राहत प्रदान करने के लिए नए प्रावधान किए गए हैं।

6. डिजिटल अर्थव्यवस्था और कर अनुपालन

नए विधेयक में डिजिटल ट्रांजैक्शनों, ऑनलाइन कमाई और क्रिप्टोकरेंसी पर कर प्रावधानों को स्पष्ट किया गया है।

7. सुलभ और करदाता-अनुकूल प्रक्रिया

कर रिटर्न फाइलिंग को और अधिक ऑटोमेटेड और सुविधाजनक बनाया जाएगा।

करदाता और कर अधिकारियों के बीच मानव हस्तक्षेप कम करने पर जोर दिया गया है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावनाएँ कम होंगी।

नए विधेयक से संभावित लाभ

1. करदाताओं के लिए अधिक स्पष्टता

सरल भाषा और संरचित कर नियमों के कारण व्यक्तियों, उद्यमियों और कंपनियों के लिए कर अनुपालन करना आसान होगा।

2. कर चोरी और भ्रष्टाचार में कमी

सरल और डिजिटल प्रणाली से काला धन और कर चोरी रोकने में मदद मिलेगी।

3. विदेशी निवेश में वृद्धि

एक स्पष्ट और स्थिर कर प्रणाली से विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, जिससे अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।

4. सरकार के राजस्व में वृद्धि

सरल कर प्रणाली से करदाता अधिक संख्या में आगे आएंगे, जिससे सरकार को अधिक राजस्व प्राप्त होगा।

संभावित चुनौतियाँ

1. स्थानांतरण की जटिलता

आयकर अधिनियम, 1961 को पूरी तरह से हटाकर नए कानून को लागू करना एक जटिल प्रक्रिया होगी।

ट्रांजिशन के दौरान करदाताओं को नए नियमों को समझने में समय लग सकता है।

2. कर अधिकारियों का पुनः प्रशिक्षण

नई प्रणाली के तहत कर अधिकारियों और पेशेवरों को पुनः प्रशिक्षित (Re-training) करने की आवश्यकता होगी।

3. छोटे करदाताओं को समायोजित करने की चुनौती

छोटे व्यापारियों, स्टार्टअप्स और स्वरोजगार व्यक्तियों के लिए नए नियमों के साथ समायोजित होना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

4. न्यायिक प्रक्रियाओं का सुधार

कर विवादों को हल करने के लिए न्यायालयों और ट्रिब्यूनलों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

भविष्य की संभावनाएँ और सुझाव

1. कर शिक्षा और जागरूकता अभियान

सरकार को करदाताओं के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने चाहिए, जिससे वे नए कानून को आसानी से समझ सकें।

2. डिजिटल कर प्रशासन को और मजबूत करना

AI और डेटा एनालिटिक्स की मदद से कर अनुपालन को और अधिक पारदर्शी और स्वचालित बनाया जा सकता है।

3. छोटे व्यवसायों के लिए विशेष छूट और सहायता

छोटे व्यापारियों और स्टार्टअप्स को कर नियमों में छूट दी जानी चाहिए, जिससे वे नए कानून को आसानी से अपना सकें।

4. कर सुधारों को धीरे-धीरे लागू करना

सरकार को नई कर प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू करना चाहिए, जिससे सभी वर्ग आसानी से इसे अपना सकें।

निष्कर्ष

आयकर विधेयक, 2025 भारत की प्रत्यक्ष कर प्रणाली में एक ऐतिहासिक सुधार है। यह विधेयक सरलता, पारदर्शिता और आधुनिक कर प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, इसके क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियाँ भी होंगी, लेकिन उचित रणनीति और प्रभावी नीति-निर्माण से इन्हें दूर किया जा सकता है।

इस विधेयक के लागू होने के बाद कर अनुपालन की दर बढ़ने, कर विवादों में कमी आने और भारत में व्यापारिक माहौल बेहतर होने की संभावनाएँ हैं। यदि सरकार करदाताओं को इस नई प्रणाली से परिचित कराने के लिए उचित कदम उठाती है, तो यह विधेयक देश की अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।



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✍️ARVIND SINGH PK REWA

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