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Polity Point By Arvind Singh PK Rewa

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असद वंश का पतन: सीरिया के 54 साल पुराने शासन से मिले 5 बड़े सबक

सीरिया का पचास वर्षीय भूत: असद वंश के पतन से 5 प्रमुख सबक



आधी सदी से भी अधिक समय तक, मध्य पूर्व की राजनीति एक ऐसे तत्व से परिभाषित होती रही जो अटल और स्थायी प्रतीत होता था: असद वंश। 1970 में हाफ़िज़ अल-असद के सत्ता में आने से लेकर दिसंबर 2024 में उनके पुत्र बशर अल-असद के नाटकीय और अचानक प्रस्थान तक, सीरिया राजनीतिक जड़ता की स्थिति में रहा। यह एक ऐसा देश था जहाँ मानो समय ठहर गया हो, जिसे व्यापक खुफिया नेटवर्कों और क्षेत्रीय रणनीतिक गठबंधनों के माध्यम से नियंत्रित रखा गया था। लेकिन 2024 के अंत में दमिश्क पर छा गई अचानक खामोशी ने 54 वर्षों के उस युग का अंत कर दिया जिसे कई पर्यवेक्षक स्थायी मानते थे। यह केवल सरकार का परिवर्तन नहीं था, बल्कि उस राज्य संरचना का पूर्ण विघटन था जिसने आधुनिक लेवांत (Levant) को आकार दिया था।

असद वंश के उदय, शासन और अंततः पतन से मिलने वाले पाँच महत्वपूर्ण सबक निम्नलिखित हैं।

सबक 1: "स्थिरता" की भारी कीमत (राज्य से ऊपर परिवार)

नवंबर 1970 में तत्कालीन रक्षा मंत्री हाफ़िज़ अल-असद बाथ पार्टी के भीतर एक कड़वे सत्ता संघर्ष में विजयी होकर उभरे। जिसे उन्होंने "सुधारात्मक आंदोलन" (Corrective Movement) कहा, उसके माध्यम से उन्होंने लगातार हो रहे तख्तापलटों के दौर का अंत किया। लेकिन यह स्थिरता राज्य की आत्मा की कीमत पर प्राप्त हुई।

हाफ़िज़ ने व्यवस्थित रूप से राष्ट्रीय संस्थाओं को कमजोर किया और सत्ता का केंद्र राज्य से हटाकर असद परिवार तथा मुखबरात (खुफिया एजेंसियों) पर केंद्रित व्यक्तिगत निष्ठा के जाल में स्थानांतरित कर दिया।

"तख्तापलट-रोधी व्यवस्था" (Coup-proofing) को प्राथमिकता देकर, अर्थात् नियमित सेना को जानबूझकर कमजोर बनाकर, शासन ने सुनिश्चित किया कि वास्तविक शक्ति केवल उन्हीं लोगों के पास रहे जिनके परिवार से सीधे संबंध हों।

यद्यपि इस रणनीति ने दशकों तक सत्ता को सुरक्षित रखा, लेकिन इसके परिणामस्वरूप संस्थागत क्षरण गहरा होता गया। असद युग का सबसे बड़ा विरोधाभास यह था कि परिवार की सत्ता बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किए गए वही उपाय, जैसे सेना का विखंडन और नौकरशाही का खोखलापन, अंततः 2024 के तेज़ और निर्णायक हमले के सामने शासन को प्रभावी प्रतिरोध करने में असमर्थ बना गए।

सबक 2: "दमिश्क स्प्रिंग" की त्रासदी

जून 2000 में बशर अल-असद का सत्ता में आना क्षेत्र के लिए आशा का क्षण था। पश्चिमी शिक्षा प्राप्त एक डॉक्टर होने के कारण उन्हें ऐसे आधुनिक नेता के रूप में देखा गया जो सीरिया को अधिक खुले और प्रगतिशील समाज की ओर ले जा सकते थे।

राजनीतिक बहस, बौद्धिक विमर्श और सीमित स्वतंत्रता के इस संक्षिप्त दौर को "दमिश्क स्प्रिंग" कहा गया।

"शुरुआती महीनों में राजनीतिक स्वतंत्रता और बौद्धिक बहस का वातावरण स्थापित हुआ, जिसे 'दमिश्क स्प्रिंग' कहा गया।"

इस दौर की सबसे बड़ी त्रासदी यह थी कि सुधार की यह खिड़की खुलते ही लगभग बंद कर दी गई। 2003 में इराक पर अमेरिकी आक्रमण और ईरान तथा हिज़्बुल्लाह के साथ बढ़ती निकटता से प्रभावित होकर बशर ने दमनकारी पुरानी नीतियों की ओर वापसी कर ली।

यह एक निर्णायक मोड़ था। दमिश्क स्प्रिंग को समाप्त करके बशर ने यह सुनिश्चित कर दिया कि कोई भी "मध्यमार्गी" या विश्वसनीय आंतरिक विपक्ष जीवित न रह सके। परिणामस्वरूप, जब 2024 में शासन का पतन हुआ, तब किसी नियंत्रित और शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण के लिए कोई पुल शेष नहीं था। इसी कारण राज्य का विघटन पूर्ण और अराजक साबित हुआ।

सबक 3: हामा मिसाल और भय की संरचना

शासन की दीर्घायु को समझने के लिए हामा शहर की ओर देखना आवश्यक है।

फ़रवरी 1982 में सेना ने मुस्लिम ब्रदरहुड के विद्रोह को कुचलने के लिए व्यापक सैन्य अभियान चलाया। इस कार्रवाई में हुए नरसंहार ने राज्य दमन का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर "भय की संरचना" की नींव रखी।

हामा एक संदेश था: राज्य किसी भी संगठित घरेलू चुनौती को अस्तित्वगत खतरा मानता है और उसका जवाब असीमित बल प्रयोग से देगा।

इस घटना ने लगभग चार दशकों तक सीरियाई राजनीति को प्रभावित करने वाली "भय की छाया" पैदा की। यही कारण है कि 2011 के विरोध प्रदर्शन इतने ऐतिहासिक साबित हुए। वे केवल नीतिगत बदलाव की मांग नहीं थे, बल्कि 1982 की स्मृति से सामूहिक मनोवैज्ञानिक मुक्ति का प्रयास भी थे।

शासन ने 2011 के संकट का जवाब भी हामा की तरह ही देने की कोशिश की, लेकिन इस बार न तो दुनिया और न ही सीरियाई जनता पीछे हटने को तैयार थी।

सबक 4: 2024 का पतन – 54 वर्षों की दीवार कुछ दिनों में ढह गई

एक दशक से अधिक लंबे गृहयुद्ध और 2015 में रूस के सैन्य हस्तक्षेप के बाद, कई लोगों को विश्वास था कि बशर अल-असद की सत्ता अब सुरक्षित है।

फिर भी दिसंबर 2024 में उनका शासन आश्चर्यजनक तेजी से ढह गया। हयात तहरीर अल-शाम (HTS) और उसके सहयोगियों सहित एक विद्रोही गठबंधन द्वारा चलाए गए तेज़ सैन्य अभियान ने कुछ ही दिनों में शासन की सुरक्षा संरचना को ध्वस्त कर दिया।

इस पतन ने स्पष्ट कर दिया कि शासन वास्तव में एक खोखला ढांचा बन चुका था, जो बाहरी समर्थन और कमजोर आंतरिक व्यवस्था के सहारे टिका हुआ था तथा आर्थिक विनाश का बोझ अब और नहीं उठा सकता था।

जैसे ही मोर्चे टूटे, 1963 से शासन कर रही 54 वर्ष पुरानी बाथवादी व्यवस्था लगभग रातोंरात गायब हो गई। बशर अल-असद का देश छोड़कर भाग जाना इस बात की अंतिम स्वीकारोक्ति थी कि "भय की संरचना" के वास्तुकार अब समाप्त हो चुके थे।

सबक 5: 2026 का मोड़ – "आतंकवाद प्रायोजक राज्य" से वैश्विक स्वीकृति तक

असद-उपरांत युग का सबसे चौंकाने वाला विकास अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तेज़ी से आया यथार्थवाद (Realpolitik) था।

अगस्त 2026 में अमेरिकी विदेश विभाग ने आधिकारिक रूप से सीरिया को "स्टेट स्पॉन्सर ऑफ टेररिज़्म" (आतंकवाद प्रायोजक राज्य) की सूची से हटा दिया। यह दर्जा 1979 से, यानी लगभग 47 वर्षों से लागू था।

आधुनिक कूटनीति के व्यावहारिक और कुछ हद तक विडंबनापूर्ण स्वरूप को दर्शाते हुए, अमेरिका ने HTS को भी वैश्विक आतंकवादी संगठन की सूची से हटा दिया।

यह नीति परिवर्तन युद्धग्रस्त देश के पुनर्निर्माण को आसान बनाने और बैंकिंग प्रणाली को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से किया गया था। यह एक निर्णायक संकेत था कि दशकों तक शासन को अलग-थलग रखने के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब उन्हीं विद्रोही समूहों के साथ जुड़ने को तैयार था जिन्होंने असद शासन को उखाड़ फेंका था, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सके और सत्ता शून्य को भरा जा सके।

निष्कर्ष: एक नए युग की अनिश्चित शुरुआत

जैसे-जैसे सीरिया असद युग की लंबी छाया से बाहर निकल रहा है, वह आशाओं और अत्यंत कठिन चुनौतियों से भरे परिदृश्य का सामना कर रहा है।

नई अंतरिम व्यवस्था को एक मृतप्राय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और लाखों शरणार्थियों की वापसी सुनिश्चित करने जैसे विशाल कार्यों का सामना करना होगा।

हालाँकि, सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक मेल-मिलाप की होगी। अंतरिम शासन को सुन्नियों, अलावी समुदाय, कुर्दों, ईसाइयों और द्रूज़ों सहित एक गहराई से विभाजित समाज को एक साथ लाने का रास्ता खोजना होगा।

विशेष रूप से कुर्द प्रश्न और उत्तर में सक्रिय सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज़ (SDF) की भूमिका, तुर्की से जुड़े तनावों के साथ एक ऐसा त्रिकोण बनाती है जो भविष्य की शांति को चुनौती दे सकता है।

अंततः केंद्रीय प्रश्न यही है: क्या गहरे ऐतिहासिक घावों से जन्मा यह राष्ट्र प्रतिनिधित्व, न्याय और कानून के शासन पर आधारित भविष्य का निर्माण कर पाएगा, या फिर भय की वही संरचना किसी नए नाम और नए स्वरूप में दोबारा खड़ी कर दी जाएगी?


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