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Polity Point By Arvind Singh PK Rewa

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Beyond Trade: How India and Japan Are Shaping Indo-Pacific Security

इंडो-पैसिफिक में नई धुरी: भारत-जापान संबंधों का रणनीतिक कायाकल्प



नई दिल्ली: इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ अभूतपूर्व गति से बदल रही हैं। व्यस्त समुद्री मार्गों और रणनीतिक रूप से संवेदनशील जलक्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच, भारत और जापान के द्विपक्षीय संबंधों ने एक नई रणनीतिक दिशा ली है। विकास ऋणों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं तक सीमित रहने वाली यह साझेदारी अब एक मजबूत सुरक्षा ढांचे में तब्दील हो चुकी है।


यह बदलाव केवल व्यापार विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि अनिश्चितता के इस दौर में नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को बनाए रखने की एक सोची-समझी रणनीति है।


आर्थिक साझेदारी से रणनीतिक सुरक्षा की ओर


भारत-जापान संबंधों का यह विकास रणनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है। दशकों तक यह संबंध मुख्य रूप से "चेकबुक कूटनीति" और सीमित व्यापार तक सीमित था। हालांकि, समुद्री संप्रभुता पर मंडराते खतरों के बीच दोनों देशों ने माना है कि ठोस सुरक्षा आधार के बिना आर्थिक प्रगति टिकाऊ नहीं हो सकती।


यह नीतिगत बदलाव गुटनिरपेक्षता की पारंपरिक राह से हटकर क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह नया ढांचा केवल संयुक्त बयानों तक सीमित न रहकर खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान, रक्षा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सैन्य अंतर-संचालनीयता (interoperability) को बढ़ावा दे रहा है।

"भारत-जापान संबंध केवल आर्थिक सहयोग से आगे बढ़कर अब एक ठोस रणनीतिक साझेदारी का रूप ले चुके हैं।"


उच्च स्तरीय रक्षा समन्वय


हालिया उच्च-स्तरीय मंत्रीस्तरीय वार्ताओं ने इस सुरक्षा साझेदारी को गति दी है। रक्षा मंत्रियों के स्तर पर होने वाली ये बैठकें अमूर्त रणनीतिक विचारों को व्यावहारिक सैन्य तंत्र में बदलने का कार्य कर रही हैं। नौकरशाही की जटिलताओं को दरकिनार कर सीधा संवाद स्थापित करने से संयुक्त सैन्य अभ्यासों और रक्षा खरीद प्रक्रियाओं में तेजी आई है।


विस्तारवाद के खिलाफ साझा दृष्टिकोण


इस रणनीतिक गठजोड़ का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय यथास्थिति को बदलने वाले एकतरफा प्रयासों को संतुलित करना है। 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' (FOIP) की अवधारणा को साकार करने के लिए दोनों देश एक समन्वित प्रतिक्रिया देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग सुरक्षित रह सकें।


संस्थागत ढांचा: तीन प्रमुख स्तंभ


इस बहुआयामी रणनीति को क्रियान्वित करने के लिए भारत और जापान मुख्य रूप से तीन अंतरराष्ट्रीय ढांचों का उपयोग कर रहे हैं:


  • क्वाड (QUAD): एक रणनीतिक परामर्श समूह से आगे बढ़कर यह अब उच्च-स्तरीय सुरक्षा समन्वय का प्राथमिक मंच बन चुका है।


  • इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI): भारत द्वारा शुरू की गई इस पहल में जापान तकनीकी विशेषज्ञता और वित्तीय संसाधन प्रदान कर समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ कर रहा है।


  • फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (FOIP): यह सिद्धांत क्षेत्रीय दबावों के बजाय अंतरराष्ट्रीय कानूनों और पारदर्शिता के आधार पर समुद्री पहुंच सुनिश्चित करता है।


उत्तर-शीत युद्ध के बाद उभरा यह नया समुद्री संतुलन यह संकेत देता है कि आने वाले दशक में भारत-जापान गठबंधन 21वीं सदी की क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

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