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Polity Point By Arvind Singh PK Rewa

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Union Budget 2026-27: Fiscal Stability, Structural Reforms and Inclusive Growth Strategy

केंद्रीय बजट 2026-27: स्थिरता, सुधार और समावेशी विकास की दिशा में एक संतुलित कदम

1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 केवल एक वार्षिक वित्तीय दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह उस नीति-निरंतरता का प्रमाण है जिसके माध्यम से भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में भी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है। यह बजट इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि यह उनका लगातार नौवाँ बजट है और ‘कर्तव्य भवन’ में तैयार किया गया पहला बजट भी—जो शासन की नई कार्य-संस्कृति और संस्थागत संक्रमण का प्रतीक है।

बजट का केंद्रीय दर्शन तीन परस्पर जुड़े उद्देश्यों पर आधारित दिखाई देता है—आर्थिक विकास की गति को बनाए रखना, मानव क्षमता का सशक्तिकरण, और “सबका साथ, सबका विकास” के सिद्धांत के अनुरूप समावेशी अवसरों का विस्तार। यह दर्शन किसी तात्कालिक राजनीतिक लाभ से अधिक, दीर्घकालिक आर्थिक सोच को प्रतिबिंबित करता है।

राजकोषीय अनुशासन: विश्वास और स्थिरता की नींव

बजट 2026–27 का सबसे मजबूत पक्ष उसका राजकोषीय संतुलन है। सरकार ने राजकोषीय घाटे को GDP के 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले वर्ष के 4.4 प्रतिशत से भी कम है। ऐसे समय में, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था व्यापार युद्धों, ऊर्जा मूल्य अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रही है, यह लक्ष्य भारत की मैक्रो-आर्थिक परिपक्वता और नीति-विश्वसनीयता को रेखांकित करता है।

यह दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और रेटिंग एजेंसियों के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है कि भारत ‘फिस्कल पॉपुलिज़्म’ के बजाय उत्तरदायी वित्तीय प्रबंधन को प्राथमिकता दे रहा है।

पूंजीगत व्यय: विकास का दीर्घकालिक इंजन

बजट में पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करना सरकार की उस रणनीति की निरंतरता है, जिसमें बुनियादी ढांचे को आर्थिक वृद्धि का मुख्य चालक माना गया है। लगभग 9 प्रतिशत की यह वृद्धि न केवल प्रत्यक्ष रोजगार सृजन करेगी, बल्कि निजी निवेश को भी “क्राउड-इन” करने में सहायक होगी।

हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, समर्पित माल ढुलाई कॉरिडोर, नए अंतर्देशीय जलमार्ग और शिप-रिपेयर इकोसिस्टम का विस्तार—ये सभी भारत को लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं। यह दृष्टिकोण भारत को केवल घरेलू बाजार तक सीमित न रखकर, वैश्विक वैल्यू चेन से जोड़ने का प्रयास भी है।

कर नीति: सुधार, न कि लोकलुभावनवाद

कराधान के मोर्चे पर बजट अपेक्षाकृत संयमित है। आयकर स्लैब या दरों में कोई बड़ा परिवर्तन न करना यह संकेत देता है कि सरकार अल्पकालिक लोकप्रियता के बजाय संरचनात्मक सुधारों को प्राथमिकता दे रही है। 1 अप्रैल 2026 से प्रस्तावित नया आयकर अधिनियम कर प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

हालाँकि, दुर्घटना पीड़ितों के लिए कर राहत जैसी घोषणाएँ यह दर्शाती हैं कि बजट में मानवीय संवेदनशीलता के लिए भी स्थान छोड़ा गया है।

रणनीतिक विनिर्माण और आत्मनिर्भरता

बजट का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आयाम रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को लेकर है। दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (Rare Earths) के लिए समर्पित कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव—विशेष रूप से ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में—भारत की चीन-निर्भरता कम करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में यह आत्मनिर्भरता भविष्य की आर्थिक और सामरिक सुरक्षा से सीधे जुड़ी है।

सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के तहत 40,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन भारत को केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक चिप-निर्माण इकोसिस्टम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।

‘ऑरेंज इकोनॉमी’: सॉफ्ट पावर और रोजगार का नया आयाम

इस बजट की एक नई और रोचक विशेषता ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ पर दिया गया जोर है। मुंबई में भारतीय क्रिएटिव टेक्नोलॉजी संस्थान की स्थापना और AVGC (एनिमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) लैब्स का विस्तार यह संकेत देता है कि भारत अब सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योगों को भी आर्थिक विकास के मुख्यधारा विमर्श में शामिल कर रहा है।

यह पहल युवाओं के लिए नए प्रकार के रोजगार सृजित करेगी और साथ ही वैश्विक मंच पर भारत की सॉफ्ट पावर को भी मजबूत बनाएगी।

स्वास्थ्य, पर्यावरण और मानव विकास

स्वास्थ्य क्षेत्र में 17 जीवन-रक्षक दवाओं को बेसिक कस्टम ड्यूटी से मुक्त करना कैंसर और दुर्लभ रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए बड़ी राहत है। बायोफार्मा शक्ति योजना के तहत 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान भारत की जैव-औषधि क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

पर्यावरण के मोर्चे पर कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) के लिए 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान यह दर्शाता है कि भारत विकास और जलवायु प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन साधने का प्रयास कर रहा है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और समग्र मूल्यांकन

विपक्ष ने बजट को अपेक्षाकृत फीका और दृष्टि-विहीन बताया है, जबकि सरकार इसे ‘विकसित भारत’ की ठोस रूपरेखा के रूप में प्रस्तुत कर रही है। वस्तुतः यह बजट न तो अत्यधिक लोकलुभावन है और न ही कट्टर austerity-केंद्रित। यह एक “रिफॉर्म-कंटिन्यूम” का बजट है—जहाँ स्थिरता, निवेश और समावेशन को एक साथ साधने का प्रयास किया गया है।

निष्कर्ष

केंद्रीय बजट 2026–27 भारत की आर्थिक यात्रा में किसी नाटकीय मोड़ का नहीं, बल्कि एक स्थिर और भरोसेमंद कदम का प्रतीक है। यह बजट बताता है कि भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी दीर्घकालिक सोच, संस्थागत सुधार और संतुलित विकास के रास्ते पर चलने के लिए प्रतिबद्ध है। यही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है—और शायद इसकी सबसे बड़ी पहचान भी।


With The Times of India Inputs

केंद्रीय बजट 2026-27 : UPSC Prelims 2026 – Quick Notes

🔹 मूल तथ्य (Basic Facts)

  • बजट प्रस्तुत: 1 फरवरी 2026
  • वित्त मंत्री: निर्मला सीतारमण
  • लगातार 9वां बजट (ऐतिहासिक उपलब्धि)
  • थीम: विकसित भारत @2047
  • प्रेरक सिद्धांत: तीन कर्तव्य (Kartavyas)

🔹 तीन कर्तव्य (Kartavyas)

  1. Economic Growth – तीव्र व सतत आर्थिक वृद्धि
  2. People’s Aspirations – मानव पूंजी और क्षमताओं का निर्माण
  3. Inclusive Development – हर वर्ग, क्षेत्र और समुदाय तक विकास

🔹 प्रमुख मैक्रो–आर्थिक संकेतक

  • कुल बजट आकार: ₹53.5 लाख करोड़ (लगभग)
  • पूंजीगत व्यय (Capex): ₹12.2 लाख करोड़
  • राजकोषीय घाटा लक्ष्य: GDP का 4.3%
  • नेट टैक्स प्राप्तियां: ₹28.7 लाख करोड़
  • रणनीति: Capex-led Growth + Private Investment Push

🔹 कराधान (Taxation)

  • आयकर स्लैब: कोई बदलाव नहीं
  • नई और पुरानी कर व्यवस्था: दोनों यथावत
  • छोटे कर अपराध: जुर्माना, सीमित कारावास (≤2 वर्ष)
  • ITR समय-सीमा:
    • ITR-1, ITR-2 → 31 जुलाई
    • अन्य ITR → 31 अगस्त
  • विदेशी संपत्ति खुलासा: One-time Disclosure Scheme
  • F&O ट्रेड: STT बढ़ाया गया
  • विदेश शिक्षा/चिकित्सा: TCS दरें कम
  • डेटा सेंटर्स को 2047 तक टैक्स छूट

🔹 कृषि एवं ग्रामीण विकास

  • Bharat-VISTAAR:
    • बहुभाषी AI आधारित किसान सलाह टूल
    • कीट, मौसम, बाजार जानकारी
  • उच्च मूल्य फसलें:
    • काजू, कोको, अखरोट – ब्रांडिंग योजना
  • नारियल संवर्धन योजना
  • पूर्वोत्तर: अगरवुड (Agar) संवर्धन

🔹 रोजगार, कौशल एवं सेवा क्षेत्र

  • सेवा क्षेत्र = प्रमुख रोजगार इंजन
    • स्वास्थ्य, पर्यटन, शिक्षा, क्रिएटिव इंडस्ट्री
  • Education to Employment & Enterprise Committee
  • MSME:
    • Champion MSME Approach
    • ₹10,000 करोड़ – SME Growth Fund

🔹 शिक्षा

  • 5 University Townships
  • पूर्वी भारत में:
    • National Institute of Design (NID)
  • ABGC Labs:
    • 1500 स्कूल
    • 500 कॉलेज
    • (Animation, Gaming, Comics)

🔹 स्वास्थ्य

  • Biopharma Shakti Mission
    • ₹10,000 करोड़ (5 वर्ष)
  • फार्मा:
    • 3 नए NIPER
    • 7 NIPER अपग्रेड
  • 1000 Clinical Trial Sites
  • मेडिकल टूरिज्म:
    • 5 Regional Medical Hubs
    • AYUSH एकीकरण
  • 17 कैंसर दवाओं पर कस्टम ड्यूटी छूट

🔹 इंफ्रास्ट्रक्चर

  • City Economic Regions
    • Tier-II/III शहर
    • ₹5000 करोड़ प्रति क्षेत्र
  • 7 High-Speed Rail Corridors
    • उदाहरण: मुंबई–पुणे, हैदराबाद–बेंगलुरु
  • 20 नए National Waterways
  • Dedicated Freight Corridors

🔹 ऊर्जा एवं पर्यावरण

  • CCUS (Carbon Capture, Utilisation & Storage):
    • ₹20,000 करोड़
  • बैटरी एनर्जी स्टोरेज:
    • कस्टम ड्यूटी छूट
  • न्यूक्लियर ऊर्जा:
    • ड्यूटी छूट

🔹 MSME एवं विनिर्माण

  • Semiconductor Mission 2.0
    • ₹40,000 करोड़
  • इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट स्कीम:
    • ₹40,000 करोड़ (दोगुनी)
  • Rare Earth Corridor
    • ओडिशा, केरल प्रमुख राज्य

🔹 क्षेत्रीय एवं सामाजिक पहल

  • पूर्वोत्तर:
    • Mission Purvodaya
    • पर्यटन, ई-बस
  • महिलाएँ:
    • SHE (Self Help Entrepreneur) Market

🔹 Prelims के लिए महत्वपूर्ण की-वर्ड्स

  • Capex-led Growth
  • Developed India @2047
  • Bharat-VISTAAR
  • Biopharma Shakti Mission
  • Semiconductor Mission 2.0
  • CCUS
  • City Economic Region
  • Champion MSME



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